राजस्थान के सीकर जिला स्थित मोहनपुरा गांव के महाराव शेखाजी बालिका सैनिक स्कूल तथा बीकानेर स्थित बालिका सैनिक स्कूल में अध्ययन प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से नया स्वरूप दिया जा रहा है। राज्य सरकार की नई नियमावली के तहत इन संस्थानों का संचालन अब चित्तौड़गढ़ और झुंझुनूं में स्थित स्थापित सैनिक स्कूलों की कार्यप्रणाली के आधार पर किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य छात्राओं को न केवल गुणात्मक शैक्षणिक माहौल प्रदान करना है, बल्कि उन्हें अनुशासित जीवन और सशस्त्र बलों में करियर बनाने के लिए पूरी तरह तैयार करना है। संस्थागत सुधारों के तहत प्रवेश, पाठ्यक्रम, शारीरिक क्षमता संवर्धन और प्रशासनिक निगरानी के नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू किए जा रहे हैं।
प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक पाठ्यक्रम में बदलाव
नए नियमों के अनुसार, इन बालिका सैनिक स्कूलों में शिक्षा का मुख्य माध्यम अंग्रेजी रहेगा। शैक्षणिक आधार को मजबूत करने के लिए कक्षा छह से कक्षा दस तक सामान्य विषयों का अध्ययन कराया जाएगा, जबकि 11वीं और 12वीं में केवल विज्ञान विषय की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके अलावा, निर्धारित शर्तों और पात्रता मानकों को पूरा करने के बाद स्कूलों को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के स्थान पर सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध कराने का विकल्प भी नियमावली में रखा गया है। इससे बालिकाओं को राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में भाग लेने का सीधा लाभ मिलेगा।
लिखित परीक्षा और चरणबद्ध प्रवेश व्यवस्था
नामांकन प्रणाली को पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने के लिए लिखित परीक्षा को प्रवेश का प्राथमिक आधार घोषित किया गया है। कक्षा छह में प्रवेश चाहने वाली छात्राओं के लिए भाषा, गणित और बुद्धिमत्ता से जुड़े प्रश्नों पर आधारित लिखित परीक्षा ली जाएगी। वहीं, कक्षा नौ के स्तर पर गणित, अंग्रेजी, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों का आकलन करने वाली लिखित परीक्षा आयोजित होगी। शुरुआती दो वर्षों के दौरान प्रवेश केवल कक्षा छह में ही दिया जाएगा। इसके बाद, जब कक्षा नौ की शुरुआत होगी, तब उपलब्ध रिक्त सीटों को भरने के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा ली जाएगी।
सैन्य प्रशिक्षण, एनसीसी और छात्रवृत्ति से जुड़े नियम
छात्राओं में शारीरिक क्षमता, नेतृत्व गुण और आत्मरक्षा के कौशल विकसित करने के लिए विशेष सैन्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। कक्षा 11वीं तक सभी छात्राओं के लिए एनसीसी गतिविधियों में भागीदारी अनिवार्य रहेगी। इसके साथ ही शूटिंग, हॉरस राइडिंग और सेल्फ डिफेंस जैसे विशेष कौशलों का नियमित अभ्यास कराया जाएगा। शैक्षणिक भ्रमण, साहसिक अभियान और कठिन शारीरिक श्रम को भी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, जो छात्राएं सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ उठाएंगी, उनके लिए एनडीए अथवा अन्य रक्षा सेवाओं की प्रवेश परीक्षाओं में बैठना अनिवार्य होगा। हालांकि, शुल्क देकर पढ़ने वाली गैर-छात्रवृत्ति प्राप्त बालिकाओं पर यह नियम लागू नहीं होगा।
आरक्षण, कुल क्षमता और प्रशासनिक प्रबंधन
स्कूलों में नामांकित होने वाली सीटों के लिए कोटा प्रणाली तय की गई है। कुल प्रवेश क्षमता का 25 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित रखा गया है, जिसमें से 20 प्रतिशत सीटें संबंधित प्रशासनिक संभाग के सेवारत सैन्यकर्मियों और पूर्व सैनिकों की बेटियों के लिए नियत होंगी। कक्षा छह से 12वीं तक चलने वाले इन स्कूलों में प्रत्येक कक्षा में अधिकतम 80 छात्राओं को प्रवेश मिलेगा, जिससे पूरे विद्यालय की कुल छात्र क्षमता 560 तक सीमित रहेगी। प्रशासनिक और शैक्षणिक निगरानी के लिए शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस और शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति का गठन किया गया है। इसके अलावा, स्कूल के प्रिंसिपल के पद पर लेफ्टिनेंट कर्नल या समकक्ष सैन्य अधिकारी तथा वार्डन के पद पर भी पूर्व सैन्य अधिकारी को ही तैनात किया जाएगा।
आधुनिक बुनियादी ढांचा और खेल सुविधाएं
छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए परिसर के भीतर विश्वस्तरीय खेल और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हॉस्टल, कैंटीन और मेस के अतिरिक्त, बहुउद्देशीय इंडोर गेम्स हॉल, स्विमिंग पूल, ऑडिटोरियम, आधुनिक व्यायामशाला और एथलेटिक्स ट्रैक विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और हॉकी के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले खेल मैदान तैयार करने का प्रावधान किया गया है।

















