राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में इस बार गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आस्था, कलात्मकता और पर्यावरण जागरूकता का एक बेहद खूबसूरत और अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। बाड़मेर शहर के हृदय स्थल जुनी चौकी पाड़ा में आजाद युवा ग्रुप द्वारा स्थापित किया गया गणेश पंडाल इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। इस विशेष पंडाल की अनूठी विशेषता यह है कि आयोजकों ने इसे एक भव्य पोस्टर म्यूजियम का रूप दिया है, जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की हानिकारक मूर्तियों के बजाय सांगली से लाई गई भारी-भरकम पत्थर की गणेश प्रतिमा को स्थापित किया गया है।
पोस्टर म्यूजियम के जरिए सनातन संस्कृति से जुड़ाव
इस पंडाल को साधारण तरीके से सजाने के बजाय आयोजकों ने इसे एक जीवंत और ज्ञानवर्धक पोस्टर म्यूजियम की तरह तैयार किया है। पंडाल की दीवारों पर भारत के प्रमुख बावन शक्तिपीठों, बारह ज्योतिर्लिंगों, संपूर्ण शिव परिवार और भगवान के विभिन्न पौराणिक अवतारों से जुड़े बेहद सुंदर और रंगीन सचित्र पोस्टर लगाए गए हैं। बप्पा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु, विशेषकर बच्चे और युवा पीढ़ी, कतारों में खड़े होकर इन चित्रों के माध्यम से हमारे समृद्ध धार्मिक इतिहास, सनातन संस्कारों और गौरवशाली पौराणिक विरासत से सीधे तौर पर परिचित हो रहे हैं। यह रचनात्मक प्रयास केवल आध्यात्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को हमारी ऐतिहासिक कहानियों से भी जोड़ने का काम कर रहा है।
साल 2013 से अनवरत पूजे जा रहे 520 किलो के पत्थर वाले बप्पा
आजाद युवा ग्रुप के सदस्यों द्वारा गणेशोत्सव के दौरान मूर्ति स्थापना का यह सिलसिला साल 2005 से ही लगातार चलाया जा रहा है। शुरुआती वर्षों में यहां स्थापित की जाने वाली मूर्तियां पारंपरिक मिट्टी से तैयार की जाती थीं। इसके बाद, साल 2013 में समूह के सदस्यों ने एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया और जोधपुर के निकट सांगली नामक स्थान से लगभग 520 किलोग्राम वजन वाली एक विशाल पत्थर की गणेश प्रतिमा को बाड़मेर लेकर आए। तब से लेकर आज तक हर साल इसी ऐतिहासिक और भव्य प्रतिमा की पूजा-अर्चना की जाती है। उत्सव के दौरान यहां प्रत्येक बुधवार को महाआरती और विशेष छप्पन भोग का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही, प्रतिदिन संध्याकाल में होने वाले दीपोत्सव के दौरान पंडाल में सैकड़ों दीये जलाए जाते हैं, जिसे देखने के लिए बाड़मेर वासियों की अपार भीड़ उमड़ती है।
जल संरक्षण और पर्यावरण हितैषी विसर्जन की मिसाल
बप्पा की इस विशाल पत्थर की मूर्ति को स्थापित करने के पीछे एक बहुत ही महत्वपूर्ण और गहरा संदेश छिपा हुआ है, जो सीधे तौर पर पर्यावरण और जल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़ा है। आजाद युवा ग्रुप के सक्रिय सदस्य रवि सोनी ने बताया कि PoP से बनी प्रतिमाओं का जब तालाबों और नदियों में विसर्जन किया जाता है, तो उनसे निकलने वाले जहरीले रसायन पानी को प्रदूषित कर देते हैं, जिससे जलीय जीवों के जीवन को गंभीर खतरा पैदा होता है। इस विकराल समस्या के समाधान के रूप में इस समूह ने पत्थर की प्रतिमा का विकल्प चुना। गणेशोत्सव की समाप्ति पर इस बेहद भारी प्रतिमा को किसी भी जल स्रोत में विसर्जित नहीं किया जाता है। इसके स्थान पर पंडाल में ही पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ बप्पा को प्रतीकात्मक स्नान कराया जाता है। इसके बाद, इस पवित्र प्रतिमा को पूरे आदर और सम्मान के साथ पुराने सुनारों के वास नामक स्थान पर सुरक्षित रख दिया जाता है, ताकि अगले वर्ष इसे फिर से स्थापित किया जा सके।


















