घर के बगीचे को महकाने के लिए सितंबर और अक्टूबर के महीनों में लगाएं ये पांच खुशबूदार पौधेचार राज्यों का सफर आधा करने आ रहा अमृतसर जामनगर एक्सप्रेसवे, दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीदसौ रुपये की घूस लेने के इकतीस साल पुराने मुकदमे में झारखंड उच्च न्यायालय ने बुजुर्ग रेल कर्मचारी की जेल अवधि घटाईशुक्र अस्त 2026: 23 सितंबर से अस्त होंगे शुक्र देव, जानिए दांपत्य जीवन और सेहत पर क्या पड़ेगा असरफरीदाबाद के शाहुपुरा में पूर्व सरपंच के घर घुसे चोर, परिवार को बंधक जैसी स्थिति में रख पार किए डेढ़ करोड़ के जेवरात और कैशबहराइच के कतर्नियाघाट में घड़ियालों और दुर्लभ स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल के संरक्षण की अनूठी पहलपरप्पना अग्रहारा जेल के कैदियों को आत्मनिर्भर बनाएगी 'नव संकल्प बेकरी', मोबाइल वैन से शहर में बिकेंगे उत्पादराजस्थान के जोधपुर में लाल-पीले रक्षासूत्र से सजी गजानन की अनोखी प्रतिमा, 31 किलो मौली से तैयार हुआ बप्पा का भव्य रूपवृंदावन के बांके बिहारी बने पंजाब के एक कारोबारी के बिजनेस पार्टनर हर साल करोड़ों रुपये का दान करते हैं भेंटगुरुग्राम हिट एंड रन मामले में आरोपी कल्याण बैंसला के समर्थन में महापंचायत पर उठे गंभीर सवाल
बाड़मेर में 520 किलो की पत्थर की मूर्ति के साथ अनोखा गणेश पंडाल, पोस्टर म्यूजियम से दिया सनातन धर्म का संदेशराजस्थान
18 सित॰ 2026, 3:05 pm (21 मिनट पहले)· 0

बाड़मेर में 520 किलो की पत्थर की मूर्ति के साथ अनोखा गणेश पंडाल, पोस्टर म्यूजियम से दिया सनातन धर्म का संदेश

बाड़मेर के जुनी चौकी पाड़ा में आजाद युवा ग्रुप ने 520 किलो वजनी पत्थर की गणेश प्रतिमा स्थापित कर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की है, साथ ही पंडाल को पोस्टर म्यूजियम का रूप दिया है।

राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर में इस बार गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आस्था, कलात्मकता और पर्यावरण जागरूकता का एक बेहद खूबसूरत और अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। बाड़मेर शहर के हृदय स्थल जुनी चौकी पाड़ा में आजाद युवा ग्रुप द्वारा स्थापित किया गया गणेश पंडाल इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। इस विशेष पंडाल की अनूठी विशेषता यह है कि आयोजकों ने इसे एक भव्य पोस्टर म्यूजियम का रूप दिया है, जहां प्लास्टर ऑफ पेरिस की हानिकारक मूर्तियों के बजाय सांगली से लाई गई भारी-भरकम पत्थर की गणेश प्रतिमा को स्थापित किया गया है।

पोस्टर म्यूजियम के जरिए सनातन संस्कृति से जुड़ाव

इस पंडाल को साधारण तरीके से सजाने के बजाय आयोजकों ने इसे एक जीवंत और ज्ञानवर्धक पोस्टर म्यूजियम की तरह तैयार किया है। पंडाल की दीवारों पर भारत के प्रमुख बावन शक्तिपीठों, बारह ज्योतिर्लिंगों, संपूर्ण शिव परिवार और भगवान के विभिन्न पौराणिक अवतारों से जुड़े बेहद सुंदर और रंगीन सचित्र पोस्टर लगाए गए हैं। बप्पा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु, विशेषकर बच्चे और युवा पीढ़ी, कतारों में खड़े होकर इन चित्रों के माध्यम से हमारे समृद्ध धार्मिक इतिहास, सनातन संस्कारों और गौरवशाली पौराणिक विरासत से सीधे तौर पर परिचित हो रहे हैं। यह रचनात्मक प्रयास केवल आध्यात्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को हमारी ऐतिहासिक कहानियों से भी जोड़ने का काम कर रहा है।

ये भी पढ़ें

साल 2013 से अनवरत पूजे जा रहे 520 किलो के पत्थर वाले बप्पा

आजाद युवा ग्रुप के सदस्यों द्वारा गणेशोत्सव के दौरान मूर्ति स्थापना का यह सिलसिला साल 2005 से ही लगातार चलाया जा रहा है। शुरुआती वर्षों में यहां स्थापित की जाने वाली मूर्तियां पारंपरिक मिट्टी से तैयार की जाती थीं। इसके बाद, साल 2013 में समूह के सदस्यों ने एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया और जोधपुर के निकट सांगली नामक स्थान से लगभग 520 किलोग्राम वजन वाली एक विशाल पत्थर की गणेश प्रतिमा को बाड़मेर लेकर आए। तब से लेकर आज तक हर साल इसी ऐतिहासिक और भव्य प्रतिमा की पूजा-अर्चना की जाती है। उत्सव के दौरान यहां प्रत्येक बुधवार को महाआरती और विशेष छप्पन भोग का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही, प्रतिदिन संध्याकाल में होने वाले दीपोत्सव के दौरान पंडाल में सैकड़ों दीये जलाए जाते हैं, जिसे देखने के लिए बाड़मेर वासियों की अपार भीड़ उमड़ती है।

जल संरक्षण और पर्यावरण हितैषी विसर्जन की मिसाल

बप्पा की इस विशाल पत्थर की मूर्ति को स्थापित करने के पीछे एक बहुत ही महत्वपूर्ण और गहरा संदेश छिपा हुआ है, जो सीधे तौर पर पर्यावरण और जल स्रोतों की सुरक्षा से जुड़ा है। आजाद युवा ग्रुप के सक्रिय सदस्य रवि सोनी ने बताया कि PoP से बनी प्रतिमाओं का जब तालाबों और नदियों में विसर्जन किया जाता है, तो उनसे निकलने वाले जहरीले रसायन पानी को प्रदूषित कर देते हैं, जिससे जलीय जीवों के जीवन को गंभीर खतरा पैदा होता है। इस विकराल समस्या के समाधान के रूप में इस समूह ने पत्थर की प्रतिमा का विकल्प चुना। गणेशोत्सव की समाप्ति पर इस बेहद भारी प्रतिमा को किसी भी जल स्रोत में विसर्जित नहीं किया जाता है। इसके स्थान पर पंडाल में ही पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ बप्पा को प्रतीकात्मक स्नान कराया जाता है। इसके बाद, इस पवित्र प्रतिमा को पूरे आदर और सम्मान के साथ पुराने सुनारों के वास नामक स्थान पर सुरक्षित रख दिया जाता है, ताकि अगले वर्ष इसे फिर से स्थापित किया जा सके।

सवाल-जवाब

यह अनोखा गणेश पंडाल कहां स्थित है?
यह पंडाल राजस्थान के बाड़मेर शहर के जुनी चौकी पाड़ा क्षेत्र में स्थित है, जिसे आजाद युवा ग्रुप द्वारा सजाया गया है।
यहां स्थापित की गई गणेश जी की मूर्ति का वजन कितना है और यह किस सामग्री से बनी है?
इस प्रतिमा का वजन लगभग 520 किलोग्राम है और यह जोधपुर के समीप सांगली से लाए गए विशेष पत्थर से बनी है।
इस पंडाल को किस खास थीम पर सजाया गया है?
इस पंडाल को एक 'पोस्टर म्यूजियम' की थीम पर सजाया गया है, जिसमें भारत के 52 शक्तिपीठों, 12 ज्योतिर्लिंगों और भगवान के अवतारों के सचित्र पोस्टर प्रदर्शित किए गए हैं।
गणेशोत्सव की समाप्ति पर इस भारी पत्थर की मूर्ति का विसर्जन कैसे किया जाता है?
इस मूर्ति को किसी जलाशय में विसर्जित नहीं किया जाता। इसके स्थान पर पंडाल में ही विधि-विधान से स्नान कराकर प्रतिमा को 'पुराने सुनारों के वास' में सुरक्षित रख दिया जाता है।
आजाद युवा ग्रुप द्वारा इस मूर्ति की स्थापना कब से की जा रही है?
इस ग्रुप ने साल 2005 से गणेशोत्सव मनाना शुरू किया था, लेकिन इस भारी पत्थर की मूर्ति की स्थापना साल 2013 से लगातार की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp