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दिल्ली में जर्जर 34 सरकारी स्कूल भवन गिराए जाएंगे, 900 करोड़ से बनेंगे 27 नए हाईटेक विद्यालयशिक्षा
13 अग॰ 2026, 9:02 pm (2 घंटे पहले)· 2

दिल्ली में जर्जर 34 सरकारी स्कूल भवन गिराए जाएंगे, 900 करोड़ से बनेंगे 27 नए हाईटेक विद्यालय

राष्ट्रीय राजधानी में 1,090 सरकारी स्कूलों की डिजिटल प्रोफाइलिंग के बाद 34 असुरक्षित इमारतों को गिराने और 900 करोड़ रुपये की लागत से 27 नए आधुनिक स्कूल परिसर बनाने का निर्णय लिया गया है।

दिल्ली के राज्य संचालित विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचागत बदलाव शुरू किया गया है। राजधानी के सभी 1,090 सरकारी स्कूलों का व्यापक स्तर पर डिजिटल सर्वे और मूल्यांकन पूरा होने के बाद बुनियादी सुविधाओं में सुधार का यह खाका तैयार किया गया है। भौतिक निरीक्षण और तकनीकी जांच के आधार पर 34 सरकारी स्कूल इमारतों को ध्वस्त करने के लिए चिह्नित किया गया है, जबकि छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शहर भर के खाली भूखंडों पर 27 नए और आधुनिक स्कूल भवन निर्मित किए जाएंगे।

ध्वस्तीकरण और नए निर्माण का विस्तृत खाका

सुरक्षा ऑडिट की सिफारिशों के तहत जिन 34 स्कूल भवनों को गिराने की पहचान की गई है, उनमें से 16 परिसरों में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। इसके साथ ही 9 अन्य मामलों में संबंधित प्राधिकारियों से औपचारिक मंजूरी हासिल की जा चुकी है। अधिकारियों के अध्ययन में पाया गया कि कई स्कूल भवन जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे, कुछ इमारतों का ढांचा जर्जर होकर असुरक्षित स्थिति में पहुंच चुका था, जबकि कुछ स्कूल परिसर ऐसी जगहों पर स्थित थे जो बच्चों के शैक्षणिक माहौल के अनुकूल नहीं थे।

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इन जर्जर संरचनाओं के विकल्प के रूप में दिल्ली सरकार 27 नए आधुनिक स्कूल परिसरों का निर्माण करने जा रही है। इन निर्माण कार्यों के लिए 900 करोड़ रुपये का बजट अनुमानित किया गया है। नया इंफ्रास्ट्रक्चर 18 महीने की समयसीमा के भीतर बनाकर तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि छात्रों को बिना किसी रुकावट के बेहतर माहौल में शिक्षा दी जा सके।

डिजिटल मैपिंग और वैज्ञानिक इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट

शिक्षा विभाग ने प्राप्त आंकड़ों का गहन अध्ययन करके प्रत्येक विद्यालय की बुनियादी कमियों की सूची तैयार की है। ऑडिट के दौरान कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति, स्वच्छ पेयजल और पुरानी पड़ चुकी संरचनाओं से जुड़ी समस्याएं रेखांकित की गईं। प्रोफाइलिंग अभियान में प्रत्येक कक्षा और भवन के स्तर पर परिसंपत्तियों का विस्तृत डिजिटल ब्योरा जुटाया गया, जिसमें सुरक्षा इंतजाम, फर्नीचर, डिजिटल संसाधन, प्रयोगशालाएं, रसोई और स्वच्छता प्रणालियों की स्थिति शामिल है।

स्कूलों का स्थायी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए अत्याधुनिक 360-डिग्री इमेजिंग तकनीक का सहारा लिया गया, जिससे किसी भी परिसर का वर्चुअल वॉकथ्रू संभव हो गया है। इसके अलावा जीआईएस (GIS) आधारित विजुअलाइजेशन, हाई-रिजॉल्यूशन ऑर्थोमोजेक तस्वीरों और ड्रोन सर्वे के जरिए सटीक मैपिंग की गई है। वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ टीमों ने विजुअल मुआयने के साथ-साथ अल्ट्रासोनिक पल्स और रिबाउंड हैमर परीक्षण जैसी नॉन-डिस्ट्रक्टिव विधियों का उपयोग किया। इसी डेटा के आधार पर स्कूलों को रखरखाव, मरम्मत, रेट्रोफिटिंग या पूर्ण ध्वस्तीकरण की श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

5 क्लस्टर में बांटी गई 27 नई निर्माण साइटें

निर्माण प्रक्रिया को पारदर्शी और गति प्रदान करने के लिए शिक्षा निदेशालय (DoE) ने केंद्र सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट-कम-EPC एजेंसी के चयन हेतु निविदाएं आमंत्रित की हैं। कार्य निष्पादन और निगरानी को सुगम बनाने के उद्देश्य से 27 चिन्हित स्थलों को 5 भौगोलिक समूहों में विभाजित किया गया है।

पहले क्लस्टर में नरेला और बवाना के 6 प्लॉट शामिल हैं। दूसरे क्लस्टर के अंतर्गत भलस्वा, सलामपुरा माजरा और दरियापुर कलां में 5 स्थल रखे गए हैं। तीसरे क्लस्टर में रोहिणी, मुंडका और सावदा घेवरा के 5 भूखंड शामिल किए गए हैं। चौथे क्लस्टर में शालीमार बाग, बक्करवाला, हस्तसाल, श्याम विहार और नांगली विहार के 5 स्थानों को जोड़ा गया है। वहीं पांचवें क्लस्टर में कुतुबापुर, कापसहेड़ा, जाफरपुर, जौनापुर, सतबड़ी और असोला के 6 प्लॉटों पर नए परिसरों का निर्माण किया जाएगा।

सवाल-जवाब

दिल्ली में कितने सरकारी स्कूलों को गिराने का फैसला लिया गया है?
डिजिटल प्रोफाइलिंग और सुरक्षा जांच के बाद 34 जर्जर सरकारी स्कूल इमारतों को गिराने का निर्णय लिया गया है।
नए स्कूल भवनों के निर्माण पर कितना खर्च आएगा?
27 नए स्कूल भवनों के निर्माण पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नए स्कूल भवनों का निर्माण कार्य कितने समय में पूरा होगा?
अधिकारियों के अनुसार नए स्कूल परिसरों का निर्माण कार्य 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्कूलों की सुरक्षा जांच के लिए किन वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया गया?
विशेषज्ञ टीमों ने 360-डिग्री इमेजिंग, ड्रोन सर्वे, जीआईएस विजुअलाइजेशन, अल्ट्रासोनिक पल्स और रिबाउंड हैमर टेस्ट जैसी तकनीकों का उपयोग किया।
27 निर्माण स्थलों को कितने समूहों में बांटा गया है?
निगरानी और काम को तेजी से पूरा करने के लिए 27 साइटों को 5 भौगोलिक क्लस्टर में विभाजित किया गया है।
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