नागौर जिले के रियांबड़ी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-58 एक बार फिर खूनी साबित हुआ। मंगलवार रात पादुकलां बायपास लिंक रोड के पास दो मोटरसाइकिलें आमने-सामने इतनी जोर से टकराईं कि मेवाड़ा के पूर्व सरपंच सहित दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों मोटरसाइकिलें तेज रफ्तार में एक-दूसरे की ओर आ रही थीं। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए और सवार उछलकर सड़क पर काफी दूर जा गिरे। हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास के गांवों के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और घायलों को संभालने में जुट गए।
समय पर नहीं आई 108 एम्बुलेंस
ग्रामीणों के अनुसार जब घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की जरूरत थी, तब 108 एम्बुलेंस सेवा समय पर उपलब्ध ही नहीं हुई। मजबूरी में लोगों ने खुद एक कैंपर वाहन का इंतजाम किया और घायल व मृतकों को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया, जहां उसकी हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
ग्रामीणों में नाराजगी
एम्बुलेंस के देर से या नहीं पहुंचने को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब आपात स्थिति में ही समय पर मदद नहीं मिल पाई, तो ऐसी सेवा का क्या फायदा। घायलों को अस्पताल ले जाने में हुई देरी पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली की जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस जांच और शोक
सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त दोनों मोटरसाइकिलों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसे की असली वजह जानने के लिए हर पहलू की पड़ताल की जा रही है। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी में रखवाए गए हैं। मेवाड़ा के पूर्व सरपंच की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक छा गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे।
प्रशासन से मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कराने, राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने और 108 एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की मांग रखी है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।













