सीकर और जयपुर को आपस में जोड़ने वाला एनएच-52 का सीकर-रींगस हाईवे इन दिनों अपनी खतरनाक सड़क दुर्घटनाओं के कारण चर्चा में है। रानोली थाना इलाके में लगातार हो रहे जानलेवा हादसों को देखते हुए अब स्थानीय पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस पूरे हाईवे पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए कुल 23 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इस हाई-टेक निगरानी का मुख्य उद्देश्य तेज रफ्तार वाहनों, हिट एंड रन के मामलों और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले चालकों पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई करना है।
एनएचएआई के सर्वे में सामने आए डरावने आंकड़े
एनएचएआई द्वारा हाल ही में किए गए एक विस्तृत सर्वे ने इस हाईवे के जोखिम को पूरी तरह से साफ कर दिया है। अधिकारियों ने दुर्घटनाओं की दर के आधार पर तीन सबसे खतरनाक स्थानों को 'ब्लैक स्पॉट' घोषित किया है। इनमें बधाला की ढाणी का कट, अखैपुरा टोल प्लाजा के ठीक आगे स्थित पलसाना बाइपास और त्रिलोकपुरा कट शामिल हैं। इन स्थानों से जुड़े आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। पिछले महज छह महीनों के भीतर, केवल इन तीन जगहों पर 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अलावा 25 से ज्यादा लोग इन हादसों में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हादसों की यह भयावह तस्वीर प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी बनकर उभरी है।
कैमरे लगाने की योजना और टेंडर प्रक्रिया
निगरानी तंत्र को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए 20 जुलाई से सीसीटीवी कैमरों की टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रानोली थानाधिकारी रामलाल ने बताया कि सीकर से लेकर रींगस तक के पूरे स्ट्रेच पर 23 अलग-अलग जगहों को कैमरों के लिए चुना गया है। सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले रानोली और पलसाना के बीच के हिस्से में सबसे ज्यादा 13 कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के चालू होने के बाद, पुलिस कंट्रोल रूम से हाईवे पर चौबीसों घंटे सीधी नजर रखी जा सकेगी। इससे ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों की पहचान करने, किसी भी संदिग्ध गतिविधि को पकड़ने और हिट एंड रन के मामलों में भागने वाले ड्राइवरों को ट्रेस करने में काफी मदद मिलेगी।
पुलिया निर्माण की स्थानीय मांग
प्रशासन भले ही कैमरे लगाकर निगरानी मजबूत कर रहा हो, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि हादसों को रोकने के लिए सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। बधाला की ढाणी कट और अखैपुरा टोल के पास वाले पलसाना बाइपास पर लंबे समय से पुलिया बनाने की जोरदार मांग उठ रही है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इन जानलेवा कटों पर सुरक्षित क्रॉसिंग या अंडरपास नहीं बन जाते, तब तक दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाना संभव नहीं है। जनता की इस मांग को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया है और पुलिया निर्माण से जुड़ी एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेज दी है।
हादसों पर लगाम के लिए फौरी उपाय
पुलिया निर्माण जैसे बड़े प्रोजेक्ट में समय लगने की संभावना को देखते हुए, प्रशासन ने ब्लैक स्पॉट वाले इलाकों में कई तात्कालिक सुधार लागू किए हैं। तेज रफ्तार से आ रही गाड़ियों की गति को धीमा करने के लिए सड़क पर रबर की पट्टियां (रबर स्ट्रिप) बिछाई गई हैं। इसके साथ ही, खतरनाक मोड़ों और ब्लाइंड कटों के पास लगभग 150 नए चेतावनी वाले और यातायात संकेत देने वाले बोर्ड लगाए गए हैं। इन साइन बोर्ड का मकसद चालकों को खतरे से पहले ही सावधान करना है ताकि वे अपनी गाड़ी की स्पीड नियंत्रित कर सकें।
नियम तोड़ने वालों पर पुलिस का सख्त एक्शन
इन तकनीकी और ढांचागत सुधारों के साथ-साथ, रानोली पुलिस ने सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अपना अभियान काफी तेज कर दिया है। पुलिस की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छह महीनों के दौरान 4,265 वाहनों के चालान काटे गए हैं। इसके अलावा, शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में 109 लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है। पुलिस विभाग का स्पष्ट संदेश है कि नियमों का कड़ाई से पालन और नई तकनीक का मिलाजुला इस्तेमाल सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीसीटीवी की नजर, पुलिस की सख्ती और सड़क में किए गए ये बदलाव कितने असरदार साबित होते हैं, ताकि सीकर-रींगस रूट पर सफर करने वाले यात्रियों की जान सुरक्षित रह सके।




















