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जोधपुर में कजली तीज पर सजा अनोखा पार्क, पूजा के साथ रील्स का दिखा जबरदस्त क्रेजराजस्थान
1 सित॰ 2026, 12:06 pm (1 घंटे पहले)· 2

जोधपुर में कजली तीज पर सजा अनोखा पार्क, पूजा के साथ रील्स का दिखा जबरदस्त क्रेज

जोधपुर के शास्त्री नगर में कजली तीज के मौके पर एक खास पार्क को सजाया गया, जहां महिलाओं ने पारंपरिक पूजा के साथ रील्स भी बनाईं।

जोधपुर में आधुनिक दौर के डिजिटल ट्रेंड और प्राचीन परंपराओं का एक अनूठा संगम देखने को मिला है। आज के समय में जब हर कोई अपने जीवन के हसीन पलों को कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा करना चाहता है, तो तीज जैसे पावन त्योहार पर यह उत्साह और भी अधिक बढ़ जाता है। पारंपरिक वस्त्रों में तैयार होने के बाद महिलाओं की यह चाहत होती है कि वे अपनी खूबसूरती को तस्वीरों और वीडियो के जरिए हमेशा के लिए यादगार बना लें। इसी आधुनिक सोच और संस्कृति के मिलन को ध्यान में रखते हुए जोधपुर शहर में कजली तीज के पावन अवसर पर एक विशेष और भव्य पार्क को सजाया गया, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ रील्स बनाने का भी जमकर क्रेज नजर आया।

शास्त्री नगर के पार्क में सजे आकर्षक सेल्फी बूथ

शहर के शास्त्री नगर ए सेक्टर में स्थित रामकृष्ण परमहंस पार्क को स्थानीय नागरिकों के सहयोग से कजली तीज के पर्व पर बेहद खास तरीके से सजाया गया था। इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी खासियत अलग-अलग विचारों और डिजाइनों पर तैयार किए गए विशेष सेल्फी पॉइंट्स थे। इन रंग-बिरंगे और मनमोहक सेल्फी बूथों की सजावट इतनी आकर्षक थी कि पार्क में कदम रखते ही महिलाएं अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाईं और तुरंत तस्वीरें तथा वीडियो शूट करने में जुट गईं। हर कोने पर सजावट का अलग अंदाज देखने को मिला, जिसने उत्सव के माहौल में चार चांद लगा दिए।

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पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचकर महिलाओं ने की पूजा

इस शानदार कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में पूरी तरह सज-धजकर पहुंची थीं। निर्धारित कार्यक्रमों के तहत महिलाओं ने अपने पतियों के साथ मिलकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और तीज पर्व का अनुष्ठान पूरा किया। इस दौरान सभी ने सामूहिक रूप से बैठकर तीज की कथाएं सुनीं और इस प्राचीन पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को गहराई से जाना। पूजा की रस्में पूरी होने के बाद महिलाओं ने इन विशेष सेल्फी बूथों का रुख किया, जहां उन्होंने अकेले और अपने परिवार के सदस्यों के साथ जमकर तस्वीरें खिंचवाईं। कई महिलाओं को अपने जीवनसाथी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वीडियो बनाते हुए भी देखा गया।

संस्कृति और आधुनिकता का दिखा अनूठा मिलन

एक तरफ जहां महिलाओं ने पूरी निष्ठा के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की और धार्मिक कथाओं का श्रवण किया, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक तकनीक और मोबाइल कैमरों का इस्तेमाल करके अपने इन खास पलों को डिजिटल रूप से सुरक्षित भी किया। इस आयोजन स्थल पर केवल पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं रहा गया, बल्कि मनोरंजन और नृत्य से जुड़ी कई अन्य गतिविधियां भी आयोजित की गईं। महिलाओं ने इन गतिविधियों में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया, जिसके चलते पूरे पार्क परिसर में गीत-संगीत, हंसी-ठिठोली और उल्लास का एक खुशनुमा माहौल बना रहा। हर सेल्फी पॉइंट पर अलग-अलग मुद्राओं में पोज देने और रील्स तैयार करने की गजब की उत्सुकता महिलाओं में दिखाई दी।

एकता और भाईचारे का संदेश देता सामुदायिक उत्सव

इस तरह के आयोजनों का मूल उद्देश्य केवल तस्वीरें क्लिक करना या रील्स बनाना ही नहीं होता, बल्कि इसका मकसद क्षेत्र की महिलाओं और परिवारों को एक मंच पर लाकर त्योहार की खुशियों को आपस में बांटना होता है। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग कई बार त्योहारों को बहुत सीमित दायरे में मनाने लगे हैं, लेकिन इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों ने सभी को एकजुट होने का शानदार मौका दिया। जोधपुर के इस कजली तीज उत्सव ने आपसी मेल-मिलाप, भाईचारे और अपनापन को बढ़ावा देने का एक मजबूत संदेश दिया, जहां प्राचीन परंपरा, गहरी आस्था, आधुनिकता और सामाजिक एकजुटता का बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिला।

सवाल-जवाब

कजली तीज का यह विशेष आयोजन जोधपुर में कहाँ किया गया था?
यह आयोजन जोधपुर के शास्त्री नगर ए सेक्टर स्थित रामकृष्ण परमहंस पार्क में किया गया था।
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण क्या था?
आयोजन का मुख्य आकर्षण विभिन्न कॉन्सेप्ट पर तैयार किए गए रंग-बिरंगे और आकर्षक सेल्फी बूथ थे।
कार्यक्रम में महिलाओं ने किस प्रकार की पोशाक पहनी थी?
महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी परिधानों में सज-धजकर इस कार्यक्रम में पहुंची थीं।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने क्या धार्मिक गतिविधियां कीं?
महिलाओं ने अपने पतियों के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और सामूहिक रूप से बैठकर तीज की कथाएं सुनीं।
इस आयोजन का उद्देश्य क्या था?
इस आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र की महिलाओं और परिवारों को एकजुट कर परंपरा और आधुनिकता के साथ त्योहार की खुशियां मनाना था।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

जोधपुर में कजली तीज के दौरान परंपरा और सोशल मीडिया रील्स के इस अनूठे संगम ने सार्वजनिक आयोजनों के बदलते स्वरूप को उजागर किया है। यद्यपि यह उत्सव और सार्वजनिक जुड़ाव का एक सकारात्मक माध्यम है, लेकिन ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में भीड़ प्रबंधन और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के बीच सुरक्षा और निजता जैसे पहलू भी आने वाले समय में आयोजकों के लिए एक नई चुनौती बन सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

यह आयोजन स्पष्ट करता है कि कैसे सार्वजनिक उत्सव अब केवल सांस्कृतिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर डिजिटल सहभागिता का बड़ा मंच बन रहे हैं। जब पारंपरिक आयोजनों में इस स्तर पर रील्स और सेल्फी का क्रेज जुड़ता है, तो यह सामुदायिक मेलजोल को तो बढ़ाता ही है, साथ ही स्थानीय प्रशासन और आयोजकों के लिए भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और डिजिटल सुरक्षा जैसी नई प्रशासनिक व्यवस्थाओं की मांग भी पैदा करता है। भविष्य के ऐसे आयोजनों में सांस्कृतिक संरक्षण के साथ तकनीकी प्रबंधन की यह चुनौती और अधिक मुखर होकर सामने आएगी।

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