रेगिस्तानी राज्य राजस्थान के वायुमंडल में सक्रिय हो रहे एक नए पश्चिमी विक्षोभ ने पूरे प्रदेश के मौसमी मिजाज को अचानक बदलने के संकेत दे दिए हैं। इस मौसमी हलचल के प्रभाव से 15 अक्टूबर को राज्य के पश्चिमी व पूर्वी दोनों अंचलों में बादलों की तेज गर्जना, आकाशीय बिजली चमकने और झोंकेदार हवाओं के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बरसात देखने को मिल सकती है। मौसमी गणनाओं के मुताबिक, वातावरण में अचानक बनने वाले इस दबाव के कारण सतही हवाओं की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर तक पहुंच सकती है। इस फेरबदल से पहले बुधवार के दिन जैसलमेर क्षेत्र में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के उच्च स्तर को छू गया था, जिससे अब तापमान में गिरावट और मौसम में अप्रत्याशित तब्दीली का दौर शुरू होने वाला है।
उत्तरी और पश्चिमी अंचल में तेज आंधी के साथ ओले गिरने का संकट
मौसम के इस ताजा बदलाव का सबसे व्यापक असर राज्य के पश्चिमी भूभाग, विशेषकर बीकानेर संभाग तथा उससे सटे मैदानी जिलों पर पड़ने की आशंका है। पूर्वानुमान के मुताबिक, 15 अक्टूबर के दिन बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर तथा फलोदी के विस्तृत इलाकों में गरज-चमक के साथ फुहारें और मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। इसी दौरान झोंकेदार हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से वातावरण को अशांत करेंगी।
विशेष रूप से बीकानेर और हनुमानगढ़ जिलों में आकाशीय बिजली गिरने, भीषण अंधड़ चलने और ओलावृष्टि होने की गंभीर चेतावनी दी गई है। इसके अलावा चूरू और श्रीगंगानगर के खेतों और कस्बों में भी बिजली कड़कने के साथ तेज रफ्तार बवंडर उठने का खतरा बना हुआ है। नागौर जिले से सटे डीडवाना-कुचामन क्षेत्र में भी बादलों के घिरने और कुछ स्थानों पर ओले बरसने का अंदेशा जताया गया है, जिससे स्थानीय जनजीवन और किसानी पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
जयपुर और भरतपुर संभाग के जिलों में भी बरसेंगे बादल
पश्चिमी अंचल के बाद यह विक्षोभ पूर्वी राजस्थान के बड़े हिस्से को भी अपनी जद में लेगा। 15 और 16 अक्टूबर के दौरान जयपुर एवं भरतपुर संभाग के विभिन्न जिलों में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे तक की बारिश होने के पूरे आसार बने हुए हैं। इस दायरे में राजधानी जयपुर के अलावा अलवर, भरतपुर, दौसा, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, डीग, झुंझुनूं, सीकर, खैरथल-तिजारा तथा कोटपूतली-बहरोड़ के क्षेत्र शामिल हैं।
इन सभी जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की चाल से आंधी चलने, बादलों की तेज गड़गड़ाहट होने और आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम रहेगा। मौसम विज्ञानियों का आकलन है कि अलवर, डीग, झुंझुनूं, सीकर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ के कुछ सीमित इलाकों में बारिश के साथ ओले भी गिर सकते हैं। जयपुर संभाग के ग्रामीण अंचलों में भी कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त मध्य राजस्थान के अजमेर संभाग में भी कुछ जगहों पर बादलों के बरसने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं।
फसल सुरक्षा को लेकर मौसम केंद्र की आधिकारिक हिदायत
खेतों में पक चुकी फसलों और कृषि मंडियों में खुले में रखी जिंसों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इसी संदर्भ में मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने X पर लिखा कि आगामी दो से तीन दिनों तक राज्य के उत्तर-पश्चिमी व उत्तरी भागों में बारिश होने की प्रबल संभावना है, अतः पककर तैयार फसलों और मंडियों में रखे अनाज को भीगने से बचाने के पुख्ता उपाय किए जाएं।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय रबी सीजन की तैयारी और खरीफ फसलों की कटाई अथवा मड़ाई का काम जोरों पर चल रहा है। खेतों में कटी पड़ी फसल या खलिहानों में सुखाया जा रहा अनाज यदि ओलों और पानी की चपेट में आता है, तो पैदावार की गुणवत्ता और चमक खराब हो सकती है। कृषि उत्पाद विपणन समितियों और अनाज मंडियों में टीन शेड के बाहर पड़े अनाज के ढेरों को तिरपाल से तुरंत सुरक्षित ढकने की सख्त जरूरत है।
मौसम का आगामी रुख और सतर्कता के जरूरी नियम
मौसम प्रणाली की गति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि पश्चिमी राजस्थान के जिलों में 16 अक्टूबर से ही मौसम तेजी से साफ और मुख्यतः शुष्क होने लगेगा। दूसरी ओर, पूर्वी राजस्थान के क्षेत्रों में 16 अक्टूबर की देर शाम तक हल्की मौसमी गतिविधियां जारी रह सकती हैं। तत्पश्चात 17 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा और शुष्क मौसम की वापसी होगी।
खराब मौसम के इस अल्पकालिक दौर में आम जनता और कृषकों को व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी बेहद सतर्क रहने की सलाह दी गई है। तेज अंधड़ और वज्रपात के समय खुले मैदानों, बड़े पेड़ों, लोहे के खंभों अथवा कमजोर कच्ची छतों के नीचे शरण लेने से पूरी तरह बचना चाहिए। अचानक चलने वाली 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं कमजोर ढांचों और होर्डिंग्स को गिरा सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग अपने पशुओं को भी पक्के और सुरक्षित स्थानों पर बांधें तथा सरकारी मौसम बुलेटिन के आधार पर ही अपने दैनिक कृषि कार्यों की रूपरेखा बनाएं।



















