राजस्थान के विभिन्न अंचलों में 17 अक्टूबर को मौसम के दो विपरीत रूप देखने को मिल सकते हैं। एक तरफ जहां उत्तर और पूर्वी हिस्सों में वायुमंडलीय हलचल के कारण घने बादलों की आवाजाही, बादलों की गड़गड़ाहट और तेज झोंके वाली हवाओं के साथ बारिश की स्थिति बन रही है, वहीं थार मरुस्थल से सटे पश्चिमी क्षेत्रों में शुष्क मौसम और तेज धूप के कारण तीखी गर्मी का असर बना रहेगा। वातावरण में यह बदलाव उत्तर भारत में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के चलते विकसित हुआ है, जिससे दिन के पारे में भी अलग-अलग इलाकों के भीतर बड़ा फासला दर्ज किया जा रहा है।
ग्यारह जिलों में धूल भरी आंधी और बौछारों की चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के ताजा बुलेटिन के अनुसार राज्य के 11 विशिष्ट जिलों में मौसमी बदलाव का सर्वाधिक असर पड़ने की संभावना है। इन जिलों में चूरू, अजमेर, टोंक, बीकानेर, बूंदी, जयपुर, भरतपुर, श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़, धौलपुर और हनुमानगढ़ शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। इसके साथ ही आंधी चलने की भी प्रबल आशंका जताई गई है, जिसके दौरान सतही हवाओं की गति 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर तक पहुंच सकती है।
हालांकि मौसम विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि बारिश का यह फैलाव एक समान नहीं रहेगा। कई इलाकों में केवल आसमान में बादलों का डेरा रहेगा या केवल बिजली चमकने और बादलों की गर्जना की स्थिति बनेगी। स्थानीय भौगोलिक और वातावरणीय दबाव के आधार पर प्रत्येक जिले में जमीनी हालात में मामूली फेरबदल संभव है। जयपुर, भरतपुर, अजमेर और कोटा संभाग के तहत आने वाले चुनिंदा क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की बूंदाबांदी और झोंकेदार हवाओं का दौर चलने का अनुमान जताया गया है।
राजधानी जयपुर समेत शेखावाटी और मेवात में मौसम का हाल
प्रदेश की राजधानी जयपुर में 17 अक्टूबर को दिनभर आंशिक से लेकर घने बादल छाए रहने के आसार हैं। जयपुर में दिन का अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा सकता है, जबकि रात का न्यूनतम तापमान 21 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास टिके रहने का अनुमान है। शहर के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बौछारें गिरने से वातावरण में हल्की ठंडक घुल सकती है।
अलवर और सीकर जैसे शेखावाटी व मेवात क्षेत्र के जिलों में भी ऐसी ही स्थिति बनती दिख रही है। अलवर में दिन का पारा 36 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की संभावना है, जहां छिटपुट बारिश अथवा मेघगर्जन की गतिविधियां हो सकती हैं। सीकर में भी अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द रहने के साथ बादलों की तेज गर्जना के संकेत हैं। इसके अलावा अजमेर, टोंक और भरतपुर संभाग के कुछ ग्रामीण व शहरी अंचलों में भी हल्की वर्षा का दौर दर्ज किया जा सकता है।
जैसलमेर में 41 डिग्री की तपिश, माउंट आबू में सुहाना मौसम
प्रदेश के एक हिस्से में जहां बादलों का डेरा रहेगा, वहीं पश्चिमी राजस्थान का मौसम बिल्कुल जुदा नजर आएगा। सीमावर्ती जिले जैसलमेर में अधिकतम तापमान उछलकर 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। यहां तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण दिन के समय तेज गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की उम्मीद न के बराबर है और वहां का मौसम अपेक्षाकृत सूखा रहने का संकेत है।
इसके ठीक उलट, राज्य के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में पर्वतीय वातावरण के चलते मौसम काफी खुशनुमा और ठंडा बना रहेगा। माउंट आबू में दिन का अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम पारा गिरकर 19 डिग्री सेल्सियस पर आ सकता है। वहां बादलों के बरसने की पूरी संभावना है, जिससे तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। इस तरह एक ही दिन राज्य में सबसे गर्म और सबसे ठंडे स्थानों के बीच करीब 17 डिग्री सेल्सियस का भारी अंतर दिखाई देगा।
वायुमंडलीय प्रणालियों का असर, 18 अक्टूबर से थमेगी बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक वर्तमान में कई वायुमंडलीय प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं। उत्तर पंजाब और उसके नजदीकी क्षेत्रों के ऊपर 3.1 से 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके अतिरिक्त दक्षिण हरियाणा और उत्तरी राजस्थान के निकटवर्ती भागों तथा दक्षिण राजस्थान व उत्तरी गुजरात की सीमा पर निचले स्तरों में अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं।
इन प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से अरब सागर और स्थानीय स्तर से नमी खिंच रही है, जो गरज-चमक और बौछारों का रूप ले रही है। मौसम विभाग ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आगामी 48 घंटों के दौरान पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ हल्की वर्षा देखने को मिल सकती है। हालांकि यह मौसमी उथल-पुथल ज्यादा लंबी नहीं खिंचेगी। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 18 अक्टूबर से राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसमी गतिविधियों में तेजी से कमी आ जाएगी और मौसम दोबारा शुष्क होने की ओर बढ़ जाएगा। ऐसे में 17 अक्टूबर का यह दिन किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए सतर्क रहने का दिन रहेगा।

















