जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के सामने टिक नहीं पाती हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर के ग्रामीण अंचल से निकलकर एक युवा उद्यमी ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। जोबनेर के पास स्थित गोकुलपुरा (कालख) गांव के रहने वाले कमलेश कुमावत ने गंभीर आर्थिक संकट, पारिवारिक त्रासदियों और महामारी के झटकों को झेलते हुए कोल्ड स्टोरेज निर्माण के कारोबार में अपनी खास पहचान बनाई है। बड़े भाई के मजबूत साथ और अपनी अटूट लगन के दम पर उन्होंने शून्य से शुरुआत करके सालाना करीब 5 करोड़ रुपये का टर्नओवर खड़ा कर लिया है।
बचपन में आर्थिक तंगी और पिता की गंभीर बीमारी का दौर
कमलेश कुमावत का जन्म 30 जुलाई 1997 को एक बेहद साधारण ग्रामीण परिवार में हुआ था। उनके पिता सुवालाल कुमावत के छह बच्चे थे, जिनमें कमलेश सबसे छोटे थे। परिवार के सीमित साधनों के बीच कमलेश ने वर्ष 2008 तक अपने गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा हासिल की। परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी, लेकिन एक स्थानीय निजी स्कूल ने उनकी लगन देखकर फीस में विशेष छूट दी, जिसके चलते वे अपनी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक पढ़ाई आगे जारी रख सके।
साल 2009 में इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब पिता सुवालाल कुमावत को चौथी स्टेज के कैंसर की बीमारी का पता चला। पिता के लंबे और महंगे इलाज में परिवार की सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। कर्ज और तंगी के बीच घर चलाना भी दूभर होने लगा था। मुश्किलों के इसी दौर में फरवरी 2013 में छोटी बहन का विवाह संपन्न कराया गया। इसके कुछ ही महीनों बाद, अगस्त 2013 में पिता जिंदगी की जंग हार गए। घर के मुखिया का साया सिर से उठ जाने के बाद पूरे परिवार पर गहरा संकट मंडराने लगा था।
तकनीकी शिक्षा और कूलिंग समाधान कारोबार की शुरुआत
घर में गहरा शोक और आर्थिक संकट होने के बावजूद कमलेश ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का पक्का फैसला किया और वर्ष 2015 में आईटीआई में प्रवेश लिया। वर्ष 2017 में तकनीकी प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। इसी प्रशिक्षण के दौरान उनके बड़े भाई अशोक कुमावत ने उनका मार्गदर्शन किया और दोनों ने मिलकर कूलिंग सॉल्यूशंस के क्षेत्र में काम करने की योजना बनाई।
शुरुआत में कारोबार को व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए वर्ष 2018 में दोस्तों के सहयोग से इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उतारने की कोशिश की गई। हालांकि, इस प्रयोग से उन्हें मनचाही सफलता नहीं मिली। असफलता से निराश होने के बजाय दोनों भाइयों ने अपनी रणनीति का बारीकी से विश्लेषण किया। वर्ष 2018 के अंत में उन्होंने ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की जरूरत को समझा और कोल्ड स्टोरेज निर्माण पर अपना पूरा ध्यान लगाने का रणनीतिक फैसला किया।
कोरोना का संकट और एकेजी जयपुर की आधिकारिक नींव
जब कोल्ड स्टोरेज निर्माण का यह नया उपक्रम गति पकड़ ही रहा था, तभी वर्ष 2020 में कोरोना महामारी ने दस्तक दी। लॉकडाउन और पाबंदियों के कारण सारा जमीनी कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। काम बंद रहने से देनदारियां और कर्ज लगातार बढ़ते चले गए, जिससे भविष्य पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल छा गए। इस बेहद नाजुक मोड़ पर बड़े भाई अशोक कुमावत ने ढाल बनकर कमलेश का हौसला टूटने नहीं दिया।
महामारी की पाबंदियों में ढील मिलने के बाद वर्ष 2021 में इस उपक्रम को औपचारिक स्वरूप दिया गया। कंपनी का पंजीकरण एकेजी जयपुर नाम से कमलेश के नाम पर कराया गया। इसके बाद दोनों भाइयों ने काम का व्यवस्थित बंटवारा किया। बड़े भाई अशोक ने सभी सरकारी मंजूरियों, कानूनी औपचारिकताओं, कागजी प्रक्रियाओं और कोल्ड स्टोरेज से जुड़ी सरकारी सब्सिडी की कंसल्टेंसी का जिम्मा संभाला। वहीं कमलेश ने पूरे राजस्थान के अलग अलग हिस्सों में फील्ड पर जाकर नए ग्राहकों से संपर्क करने, साइट का प्रबंधन संभालने और व्यापार के विस्तार पर पूरा जोर लगाया।
परिश्रम से मिली पहचान और साझा सफलता
काम के स्पष्ट विभाजन, सटीक रणनीति और आपसी विश्वास के बूते एकेजी जयपुर ने तेजी से प्रगति की। आज यह कंपनी कोल्ड स्टोरेज निर्माण के क्षेत्र में राजस्थान के प्रमुख नामों में गिनी जाती है और इसका सालाना कारोबार 5 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू चुका है। सबसे छोटे भाई होने के नाते कमलेश ने सफलता हासिल करने के बाद भी पूरे परिवार को जोड़े रखा और सभी छह भाई बहनों को साथ लेकर आगे बढ़े। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि कठिन समय में यदि परिवार का मार्गदर्शन और अटूट मेहनत मिले, तो साधारण शुरुआत भी असाधारण मुकाम तक पहुंच सकती है।
















