राजस्थान के कोटा जिले में सिमलिया इलाके के पोलाई खुर्द गांव से एक चिंताजनक मामला सामने आया था, जहां कल पानी-पतासे यानी गोलगप्पे खाने के बाद करीब 115 स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. बच्चों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी थी, जिसके बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया था. अब इस घटना के एक दिन बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं और मामले की तह तक जाने में जुटे हैं.
शोली गांव पहुंची जांच टीम, लिए गए सैंपल
घटना को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम बिना देर किए शोली गांव पहुंची. यही वह गांव है, जहां का रहने वाला वह पानी-पतासे बेचने वाला विक्रेता था, जिसके ठेले से बच्चों ने पानी-पतासे खाए थे. टीम ने मौके पर पहुंचकर पानी-पतासे के साथ-साथ उसमें इस्तेमाल होने वाले मसालों और पानी के सैंपल भी जब्त कर लिए हैं. इन सभी सैंपलों को अब जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर बीमारी की असली वजह क्या थी.
बच्चों की हालत स्थिर, डॉक्टरों की टीम कर रही निगरानी
कल जिन करीब एक दर्जन बच्चों की हालत ज्यादा बिगड़ गई थी, उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी सिमलिया में भर्ती कराया गया था. उनकी सेहत को लेकर आज राहत भरी खबर सामने आई है. डॉक्टरों के मुताबिक, उपचार करा रहे सभी बच्चों की हालत फिलहाल पूरी तरह स्थिर बनी हुई है. अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार बच्चों की सेहत पर नजर रखे हुए है और जरूरत के मुताबिक उन्हें दवाइयां व ड्रिप दी जा रही है. राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की स्थिति चिंताजनक नहीं बताई जा रही.
गांव में मेडिकल टीमों का डेरा, घर-घर सर्वे जारी
मामले की नजाकत को देखते हुए उपखंड अधिकारी दीगोद दीपक महावर, सीएमएचओ डॉ. नरेंद्र नागर और बीसीएमओ सुल्तानपुर डॉ. राजेश सामर खुद पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में भेजी गई दो मेडिकल टीमें और एक 108 एम्बुलेंस अभी भी वहीं मुस्तैद हैं. इसके अलावा एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं ने पूरे पोलाई खुर्द गांव में घर-घर जाकर सर्वे अभियान शुरू कर दिया है. इस सर्वे का मकसद यह पता लगाना है कि कहीं कोई और बच्चा या ग्रामीण भी इस फूड प्वॉइजनिंग की चपेट में तो नहीं आया, ताकि अगर कोई नया मरीज मिले तो उसे तुरंत मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया जा सके.
अब अन्य वेंडरों पर भी नजर, विक्रेता पर होगी कानूनी कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग अब इलाके के दूसरे स्ट्रीट फूड वेंडरों पर भी नजर रखने लगा है. साथ ही मेडिकल टीमें गांव वालों को इस मानसूनी सीजन में खासतौर पर सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं, जैसे साफ-सुथरा खाना खाना, उबला हुआ या स्वच्छ पेयजल ही इस्तेमाल करना और खुले में बिकने वाली खाने-पीने की चीजों से दूरी बनाए रखना. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि लैब से सैंपलों की रिपोर्ट आने के बाद उस पानी-पतासे विक्रेता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि आगे चलकर ऐसी लापरवाही दोबारा न हो.











