राजस्थान के डूंगरपुर जिले के दोवड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सत्तु देवकी के अपर प्राइमरी स्कूल में एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। स्कूल के भीतर जब बच्चे और शिक्षक अपनी नियमित कक्षाओं में व्यस्त थे, तभी परिसर में बने एक पुराने और बंद कमरे की छत अचानक ढह गई। घटना के वक्त स्कूल में कुल 120 विद्यार्थी अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे। छत के गिरने की तेज आवाज गूंजते ही पूरे स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया और दहशत का माहौल बन गया। इस अप्रत्याशित आवाज को सुनकर शिक्षक और सभी छात्र तुरंत अपने-अपने कमरों से बाहर खुले मैदान में निकल आए।
पहले से बंद था जर्जर कमरा
घटना के बाद जब स्थिति का जायजा लिया गया तो राहत की बात सामने आई कि जिस कमरे की छत गिरी है, वह काफी समय से जर्जर स्थिति में था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रबंधन ने उस कमरे को पहले ही बंद कर दिया था। इसी दूरदर्शिता के कारण उस स्थान पर किसी भी बच्चे या शिक्षक को नहीं बैठाया गया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यह पूरी घटना मंगलवार के दिन सामान्य दिनों की तरह कक्षाओं के संचालन के दौरान हुई। सत्तु देवकी के इस अपर प्राइमरी स्कूल में लगभग 120 बच्चे नामांकित हैं जो रोजाना पढ़ने आते हैं। शिक्षक जब कक्षाओं में बच्चों को पढ़ा रहे थे, तभी यह तेज धमाका हुआ जिसके बाद बाहर आकर देखा गया कि दो जर्जर कमरों में से एक की पूरी छत मलबे में तब्दील हो चुकी थी।
अधिकारियों ने किया मौके का मुआयना
स्कूल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे विद्यालय भवन में कुल 10 कमरे बने हुए हैं जिनमें से 2 कमरे काफी लंबे समय से अत्यंत जर्जर अवस्था में पहुंच चुके थे। इन दोनों कमरों को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका था और लगभग एक साल से इनका उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इन कमरों के भीतर किसी भी प्रकार की कक्षाएं नहीं लगाई जा रही थीं। इसी बरती गई सावधानी और सतर्कता के चलते छत के भरभराकर गिरने के बावजूद किसी भी छात्र, छात्रा या शिक्षक को चोट नहीं आई और कोई जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना तुरंत मिलने पर स्कूल के शिक्षकों ने पीईईओ पंकज वर्मा को अवगत कराया। इसके बाद पीईईओ पंकज वर्मा और सीबीईओ दीपक शाह ने तुरंत मौके का दौरा किया और स्कूल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने दुर्घटनाग्रस्त कमरों का बारीकी से निरीक्षण किया और स्कूल प्रबंधन से पूरी घटना की विस्तृत जानकारी जुटाई।
मरम्मत के लिए भेजे गए हैं प्रस्ताव
मामले की जानकारी देते हुए सीबीईओ दीपक शाह ने बताया कि स्कूल भवन में एक अन्य कमरा भी है जिसकी छत जर्जर हालत में है। इस दूसरे जर्जर कमरे की नई छत डलवाने के लिए सक्षम अधिकारियों को पहले ही प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। जैसे ही इन प्रस्तावों को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिल जाएगी, वैसे ही कमरों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू करवा दिया जाएगा। फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर इन सभी जर्जर कमरों का उपयोग पूरी तरह से बंद रखा गया है ताकि विद्यार्थियों की जान और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो। इस दुर्घटना के टल जाने के बाद स्कूल में मौजूद बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों ने ने राहत की सांस ली है। हालांकि इस प्रकार की घटना ने सरकारी स्कूलों के पुराने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था और समय पर उनकी मरम्मत किए जाने की आवश्यकता को एक बार फिर गंभीर सवाल के रूप में सामने ला दिया है।





















