भरतपुर के जड़खोड़ गोधाम में सजता है संतों का मेला, ब्रज की इस अनूठी गौशाला की है खास पहचानझारखंड के गांवों में मेहमाननवाजी का अनोखा अंदाज, सिर्फ दो सौ रुपये में हो जाता है दर्जनों लोगों के नाश्ते का इंतजाममूलांक 3 राशिफल 16 अक्टूबर: रिश्तों में आएगी मधुरता और करियर में बढ़ेगा आपसी तालमेलजींद के तलोंडा गांव में जमीन विवाद के चलते पूर्व सरपंच ने की बेटे की हत्या, मौके से सात कारतूस बरामदमूलांक 1 राशिफल 16 अक्टूबर 2026: व्यक्तिगत और व्यावसायिक मोर्चे पर बढ़ेंगी जिम्मेदारियां, टीम के सहयोग से मिलेगी सफलतावृश्चिक राशिफल 16 अक्टूबर 2026: कार्यशैली में बदलाव से सुलझेंगे काम और संतुलित रहेगा बजटमाउंट आबू नगरपालिका कैसे बनी राजस्थान की सबसे अमीर स्थानीय संस्था, जानिए इसकी जबरदस्त कमाई के जरिएवर्ष 2026 में शनि की सीधी चाल: मेष, वृषभ समेत इन 4 राशियों के खुलेंगे किस्मत के द्वारजिम कॉर्बेट की बिजरानी रेंज में पहली बार देखा गया लकड़बग्घा, वन विभाग ने शुरू की निगरानीराष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में साइट इंजीनियरों को हर माह मिलेंगे 1.5 लाख रुपये, नई भर्ती नीति लागू
अरावली की वादियों में स्थित हनुमान टेकरी धाम, जहां 150 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं बाल स्वरूप बालाजी के दर्शनराजस्थान
16 अक्तू॰ 2026, 8:19 am (1 घंटे पहले)· 0

अरावली की वादियों में स्थित हनुमान टेकरी धाम, जहां 150 सीढ़ियां चढ़कर होते हैं बाल स्वरूप बालाजी के दर्शन

राजस्थान के सिरोही में नेशनल हाईवे 27 के पास स्थित हनुमान टेकरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां लगातार पांच मंगलवार व्रत रखने की अनूठी परंपरा है।

राजस्थान के सिरोही जिले में आबूरोड और पालनपुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 27 पर स्थित खड़ा गांव के समीप हनुमान टेकरी एक अत्यंत पावन और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के रूप में विख्यात है। अरावली पर्वत श्रृंखला की सुरम्य और हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बसा यह धार्मिक स्थल हर दिन हजारों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पवनपुत्र भगवान हनुमान अपने बाल स्वरूप में विराजमान हैं। गर्भगृह में स्थापित यह मनोहारी और दिव्य प्रतिमा लगभग चार फीट ऊंची है, जिसके दर्शन पाकर भक्त अभिभूत हो जाते हैं। पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने की वजह से इस पवित्र धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। प्राकृतिक वातावरण और शांत माहौल के बीच की जाने वाली यह छोटी सी चढ़ाई भक्तों के मन से तनाव और नकारात्मक विचारों को दूर कर देती है।

पांच मंगलवार व्रत रखने की अनूठी धार्मिक मान्यता

स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं में इस धाम को लेकर अगाध विश्वास है। जनमानस में यह दृढ़ मान्यता प्रचलित है कि यदि कोई भक्त सच्चे हृदय और पूर्ण निष्ठा के साथ लगातार पांच मंगलवार तक व्रत रखे और यहां पहुंचकर बालाजी महाराज के दर्शन करे, तो उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इसी अटूट आस्था के चलते हर मंगलवार को पहाड़ी पर भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को पारंपरिक रूप से तैयार किया जाने वाला प्रसिद्ध लापसी का प्रसाद वितरित किया जाता है। देशी अंदाज में बना यह मीठा प्रसाद भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है और लोग इसे बड़े आदर व श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं।

ये भी पढ़ें

महंत कस्तूरनाथ महाराज की कठोर तपस्या से जुड़ा इतिहास

इस पावन धाम की स्थापना और विकास के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक इतिहास जुड़ा हुआ है। मंदिर व्यवस्थापक प्रेमनाथ महाराज ने बताया कि आज जिस भव्य रूप में यह धाम नजर आता है, उसकी नींव पूज्य महंत योगी कस्तूरी नाथ महाराज ने रखी थी। लगभग सात दशक पहले जब महंत कस्तूरनाथ महाराज की उम्र महज 14 से 15 वर्ष थी, तब वे इस बीहड़, पथरीले और घने जंगलों वाले निर्जन इलाके में आए थे। उन्होंने यहां पहाड़ी पर मौजूद एक प्राकृतिक पाषाण शिला में मारुति नंदन की स्थापना कर नित्य पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी।

शुरुआती आध्यात्मिक साधना के बाद उन्होंने भारतीय रेलवे में भी अपनी सेवाएं दीं। रेलवे की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग दिया और संन्यास मार्ग चुन लिया। संन्यासी बनने के उपरांत वे दोबारा इसी पहाड़ी पर लौटे और अपने जीवन का संपूर्ण समय घोर तपस्या और ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दिया। मंदिर में वर्तमान समय में प्रतिष्ठित बाल स्वरूप प्रतिमा की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा भी उन्हीं के कर-कमलों द्वारा संपन्न कराई गई थी। आज भी उनके इस अतुलनीय त्याग और तप को सम्मान देते हुए मंदिर परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित है, जहां आने वाले सभी श्रद्धालु नतमस्तक होकर उनका आशीर्वाद लेते हैं।

हनुमान जयंती पर जुटते हैं राजस्थान और गुजरात के श्रद्धालु

प्रत्येक वर्ष चैत्र मास में हनुमान जयंती के पावन पर्व पर यहां अत्यंत भव्य और विशाल वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है। इस विशेष अवसर पर पूरे मंदिर परिसर और पहाड़ी को आकर्षक रोशनी, रंग-बिरंगे फूलों और ध्वजाओं से सजाया जाता है। मेले के दौरान न केवल सिरोही और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से, बल्कि सीमा से सटे गुजरात राज्य से भी भारी तादाद में श्रद्धालु, संत-महात्मा और तपस्वी बाल हनुमान के दर्शन करने पहुंचते हैं।

वार्षिक मेले की पूर्व संध्या तथा गुरु पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों पर यहां विशाल भजन संध्या आयोजित की जाती है। इन रात्रिकालीन भजनों में दूर-दूर से आमंत्रित सुप्रसिद्ध भजन गायक अपनी प्रस्तुतियां देते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब जाता है। पहाड़ी पर फैले सघन वृक्ष और नैसर्गिक छटा यहां आने वाले हर व्यक्ति को अलौकिक शांति और मानसिक सुकून प्रदान करती है।

सवाल-जवाब

हनुमान टेकरी मंदिर राजस्थान में कहां स्थित है?
यह मंदिर सिरोही जिले में आबूरोड और पालनपुर के बीच नेशनल हाईवे 27 पर स्थित खड़ा गांव के पास अरावली की पहाड़ियों में बना हुआ है।
इस मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा की क्या विशेषता है?
मंदिर में हनुमानजी की बाल स्वरूप में लगभग चार फीट ऊंची मनोहारी प्रतिमा स्थापित है, जिसके दर्शन के लिए 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
हनुमान टेकरी मंदिर में पांच मंगलवार व्रत को लेकर क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो श्रद्धालु लगातार पांच मंगलवार तक सच्चे मन से व्रत रखकर बालाजी के दर्शन करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
इस धाम की स्थापना में महंत कस्तूरनाथ महाराज का क्या योगदान था?
महंत कस्तूरनाथ महाराज ने लगभग 70 वर्ष पूर्व किशोरावस्था में यहां पूजा शुरू की थी और रेलवे से सेवानिवृत्ति के बाद संन्यास लेकर वर्तमान बाल स्वरूप प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी।
मंदिर में कौन सा विशेष प्रसाद मिलता है और मुख्य मेला कब लगता है?
मंदिर परिसर में शुद्ध लापसी का प्रसिद्ध प्रसाद वितरित किया जाता है, तथा हर वर्ष हनुमान जयंती के अवसर पर यहां एक विशाल मेले और भजन संध्या का आयोजन होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

अरावली की पहाड़ियों और सिरोही का यह मंदिर वाकई सुंदर है, लेकिन पांच मंगलवार व्रत रखने से ही हर मनोकामना पूरी हो जाती है, इस बात पर थोड़ा शक होता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

रोहन, बात आस्था की है तो शक कैसा! वैसे हैरानी ये है कि इतनी घनी और बीहड़ झाड़ियों के बीच उस चौदह साल के लड़के को रेलवे की नौकरी कैसे मिली होगी?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp