राजस्थान में मानसूनी गतिविधियों की रफ्तार में गिरावट देखने को मिल रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अगस्त को राज्य के बहुसंख्यक हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ बना रहेगा। हालांकि पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के गिने-चुने इलाकों में स्थानीय मौसमी प्रभाव के कारण हल्की वर्षा या छिटपुट बूंदाबांदी दर्ज की जा सकती है। मौसम विभाग ने राहत की बात यह बताई है कि 29 अगस्त के लिए प्रदेश के किसी भी जिले में मूसलाधार बारिश, तेज अंधड़, वज्रपात या आंधी जैसी किसी भी गंभीर मौसमी आपदा को लेकर कोई चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया गया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में फिलहाल व्यापक वर्षा का कोई बड़ा दौर शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
29 अगस्त को क्षेत्रीय मौसम का मिजाज: कहां होगी बारिश और कहां छाएगी धूप
मौसम केंद्र के अनुसार, 29 अगस्त को प्रदेश के अलग-अलग संभागों में मौसम का रुख भिन्न रहेगा। पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में कहीं-कहीं हल्की वर्षा या बादलों की आवाजाही के बीच हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इसके अलावा दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल और पहाड़ी इलाकों जैसे उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सलूम्बर और प्रतापगढ़ जिलों में स्थानीय स्तर पर बादलों का जमावड़ा बनने से हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। इन क्षेत्रों में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं।
दूसरी ओर, राजधानी जयपुर तथा अजमेर समेत मध्य एवं उत्तरी राजस्थान के विस्तृत इलाकों में फिलहाल भारी या व्यापक मानसूनी बारिश की कोई संभावना नहीं जताई गई है। पश्चिमी राजस्थान के विशाल मरुस्थलीय इलाकों में मौसम पूरी तरह से शुष्क रहने का अनुमान है। बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, नागौर, पाली, फलौदी और जालौर जिलों में बारिश की किसी भी मुख्य गतिविधि के आसार नहीं हैं। इन जिलों में दिन भर आसमान साफ रहेगा और धूप खिली रहने की संभावना है।
मौसम प्रणालियों का तकनीकी विश्लेषण: क्यों कमजोर पड़ा मानसून
आईएमडी के वैज्ञानिकों के अनुसार, राजस्थान में बारिश की कमी का मुख्य कारण उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में बना कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) है। यह कम दबाव का तंत्र वर्तमान में सक्रिय है और इसके प्रभाव से चक्रवाती हवाओं का परिसंचरण समुद्र तल से लगभग 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का आकलन है कि आगामी 24 घंटों के भीतर यह मौसम प्रणाली धीरे-धीरे कमजोर पडक़र कम स्पष्ट हो जाएगी। इस सिस्टम के निष्प्रभावी होने का सीधा असर राजस्थान में मानसूनी हवाओं के प्रवाह पर पडक़र बारिश की गतिविधियों को घटा रहा है।
इसके साथ ही मानसून ट्रफ रेखा वर्तमान में अमृतसर, देहरादून, खीरी, उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थित कम दबाव के क्षेत्र के केंद्र, मधुपुर और बांका से होती हुई उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। वहीं, उत्तर हरियाणा और इसके आसपास के वायुमंडल में 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण भी मौजूद है। इसके अतिरिक्त, एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) मध्य क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं के बीच ट्रफ के रूप में सक्रिय बना हुआ है। इस पश्चिमी विक्षोभ की मुख्य धुरी समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर 75 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास तथा 29 डिग्री उत्तरी अंश के उत्तर में अवस्थित है। इन विभिन्न प्रणालियों के संयोजन के बावजूद राजस्थान में नमी का प्रवाह सीमित बना हुआ है।
तापमान और आर्द्रता का हाल: श्रीगंगानगर में 41.4 डिग्री पहुंचा पारा
पिछले 24 घंटों की मौसमी गतिविधियों पर नजर डालें तो पूर्वी राजस्थान के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा दर्ज की गई है। वहीं दूसरी तरफ, पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती और मैदानी जिलों में बारिश न होने से तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से लेकर 41 डिग्री सेल्सियस के मध्य दर्ज किया गया।
प्रदेश भर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान श्रीगंगानगर जिले में 41.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे वहां दिन के समय तेज गर्मी का असर महसूस किया गया। इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में औसतन हवा में नमी (आर्द्रता) का स्तर 40 प्रतिशत से 90 प्रतिशत के बीच बना रहा। बारिश की गतिविधियों में आई इस कमी के कारण आने वाले दिनों में धूप का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे दिन का तापमान और अधिक बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप लोगों को दोपहर के समय तेज गर्मी और उमस का सामना करना पडक़र परेशानी बढ़ सकती है।
आगामी सप्ताह का पूर्वानुमान और सितंबर में मानसूनी वर्षा की वापसी
मौसम विभाग के मध्यम अवधि के पूर्वानुमान के मुताबिक, आगामी एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी परिस्थितियां कमजोर ही बनी रहेंगी। बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभागों के ज्यादातर जिलों में आने वाले सात दिनों के दौरान मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना व्यक्त की गई है। इस पूरी अवधि में केवल पूर्वी राजस्थान के कुछ सीमित स्थानों पर ही नाममात्र की छिटपुट वर्षा होने की संभावना है।
हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने सितंबर महीने की शुरुआत से मौसम का मिजाज दोबारा बदलने के संकेत दिए हैं। आईएमडी के अनुसार, 3 और 4 सितंबर से पूर्वी राजस्थान तथा उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में एक बार फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। इसके पश्चात, 4 सितंबर से 7 सितंबर के बीच मानसूनी हवाओं के पुनर्सक्रिय होने से पूर्वी राजस्थान के कई भागों में बारिश का दायरा और तीव्रता बढऩे की प्रबल संभावना जताई गई है। तब तक प्रदेशवासियों को उमस और शुष्क मौसम का सामना करना पड़ेगा।




















