कठिन परिश्रम और अटूट लगन से जब वर्षों का देखा हुआ सपना सच होता है, तो वह पूरे परिवार और समाज के लिए गर्व का क्षण बन जाता है। राजस्थान के टोंक में ऐसा ही एक भावुक अवसर सामने आया जब डॉ. नीलोत्पल सिंगोदिया अपनी उच्च चिकित्सा शिक्षा पूरी करके जनरल सर्जन के रूप में अपने गृहनगर पहुंचे। अपने बेटे के इस मुकाम पर पहुंचने से उत्साहित पिता कमलेश सिंगोदिया, परिवार के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने उनका बेहद आत्मीय और गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इस मौके पर ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच उन्हें साफा बांधा गया तथा माला पहनाकर शुभकामनाएं दी गईं।
13 वर्षों की तपस्या और निरंतर संघर्ष की दास्तान
डॉ. नीलोत्पल की यह उपलब्धि किसी रातों-रात मिली कामयाबी का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे पूरे 13 साल का अनवरत अध्ययन और समर्पण छुपा हुआ है। टोंक जैसे छोटे शहर से ताल्लुक रखते हुए मेडिकल के इस विशिष्ट और चुनौतीपूर्ण मुकाम तक पहुंचना उनकी असाधारण इच्छाशक्ति को दर्शाता है। बेटे की इस कामयाबी ने न केवल सिंगोदिया परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे टोंक जिले को भी गौरवान्वित किया है। उनकी वापसी पर शहर के अनेक प्रबुद्धजनों और रिश्तेदारों ने पहुंचकर उन्हें भविष्य की नई जिम्मेदारियों के लिए बधाई दी।
विदेश में बुनियादी मेडिकल डिग्री से लेकर स्पेशलाइजेशन तक की यात्रा
चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ अलग करने का संकल्प डॉ. नीलोत्पल ने वर्ष 2013 में लिया था। अपने लक्ष्य को साधने के लिए उन्होंने देश से बाहर जाकर चीन स्थित चोंगकिंग यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और वहां से सफलतापूर्वक एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। भारत लौटने के बाद उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता को साबित करते हुए पहले ही प्रयास में प्रतिष्ठित एमसीआई स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। इसके उपरांत उन्होंने वर्ष 2022 में जयपुर के प्रसिद्ध एसडीएमएच अस्पताल से अपनी अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी की। विशेषज्ञता हासिल करने की दिशा में अगला कदम बढ़ाते हुए उन्होंने वर्ष 2023 से 2026 के शैक्षणिक सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित टीएमयू से जनरल सर्जरी में एमएस की उपाधि अर्जित की। इस तरह पूरे 13 सालों के शैक्षिक सफर के बाद वे औपचारिक तौर पर जनरल सर्जन बन गए।
चिकित्सा सेवा में जरूरतमंदों की मदद का संकल्प
बेटे की इस लंबी और सफल यात्रा पर पिता कमलेश सिंगोदिया ने बेहद भावुक होकर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने साझा किया कि उनके बेटे ने दिन-रात एक करके इस चुनौतीपूर्ण पेशे में अपनी जगह बनाई है। पिता ने विश्वास जताया कि डॉ. नीलोत्पल अपने कौशल और ज्ञान का उपयोग समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों की स्वास्थ्य रक्षा के लिए करेंगे। उनकी यह उपलब्धि छोटे कस्बों में रहकर बड़े सपने देखने वाले और कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद न खोने वाले अनगिनत युवा छात्रों के लिए एक जीवंत मिसाल बनकर उभरी है।























