कृषि क्षेत्र में आधुनिक तौर-तरीकों, नई तकनीकों और सतत पद्धतियों को अपनाने वाले अन्नदाताओं को सम्मानित करने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। राजस्थान में पारंपारिक खेती से आगे बढ़कर डेयरी, बागवानी, जैविक उत्पादकता और नए अनुसंधानों के जरिए मिसाल कायम करने वाले काश्तकारों को आत्मा योजना 2026-27 के जरिए नकद राशि और सम्मान प्रदान किया जाएगा। इस पुरस्कार कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसका दायरा केवल राज्य मुख्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर की पंचायत समितियों से लेकर जिले और अंततः प्रदेश स्तर तक चयन की त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है।
पांच प्रमुख श्रेणियों में परखा जाएगा किसानों का प्रदर्शन
इस प्रोत्साहन योजना में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पांच अलग-अलग कार्यक्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। इन श्रेणियों में मुख्य फसल कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन, प्राकृतिक व जैविक खेती तथा कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार शामिल हैं। जो किसान पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों को आधुनिक वैज्ञानिक सोच के साथ जोड़ रहे हैं अथवा कम लागत में अधिक उत्पादकता देने वाले नए प्रयोग सफलतापूर्वक लागू कर चुके हैं, वे अपनी वास्तविक उपलब्धियों के प्रमाण के साथ इन श्रेणियों में अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।
पंचायत समिति से राज्य स्तर तक चयन का पूरा प्रारूप
प्रोत्साहन चयन की शुरुआत सबसे पहले जमीनी स्तर पर पंचायत समितियों के माध्यम से होगी। प्रत्येक पंचायत समिति क्षेत्र से सभी पांचों निर्धारित गतिविधियों में से एक-एक उत्कृष्ट किसान को चुना जाएगा, जिसका अर्थ है कि एक समिति से कुल 5 प्रतिभागियों का चयन होगा। इसके पश्चात इन पंचायत स्तरीय विजेताओं की उपलब्धियों का मूल्यांकन जिला स्तर पर किया जाएगा। प्रत्येक जिले में पांचों गतिविधियों के अंतर्गत दो-दो किसानों को चुना जाएगा, जिससे जिला स्तर पर कुल 10 सफल कृषकों का सम्मान तय होगा।
राज्य स्तर पर भी यही पारदर्शी व्यवस्था लागू रहेगी। सभी जिलों से चयनित उत्कृष्ट काश्तकारों में से प्रत्येक गतिविधि में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों का चयन होगा। इस प्रकार प्रदेश भर से कुल 10 किसानों को सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना जाएगा। इस त्रिस्तरीय रूपरेखा का सीधा लाभ यह है कि दूरदराज के गांवों में काम करने वाले मेहनती किसानों को भी क्रमशः विकास खंड से लेकर राज्य की राजधानी तक पहचान बनाने का सीधा अवसर मिलता है।
तीन स्तरों पर तय की गई पुरस्कार राशि
चयनित किसानों को मिलने वाली सम्मान राशि भी प्रशासनिक स्तर के अनुसार विभाजित की गई है। विकास खंड यानी पंचायत समिति स्तर पर चयनित होने वाले प्रत्येक किसान को 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके बाद जिला स्तर पर उत्कृष्ट पाए जाने वाले किसानों को 25 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। सर्वोच्च स्तर यानी राज्य स्तर पर चुने जाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये के नकद इनाम और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। यह वित्तीय प्रोत्साहन किसानों को खेती की नई पद्धतियों में आगे निवेश करने और अन्य ग्रामीणों को प्रेरित करने का संबल देता है।
पात्रता नियम और पूर्व पुरस्कार विजेताओं के लिए शर्तें
योजना के नियमों के तहत सभी किसान इस पुरस्कार के लिए आवेदन करने के हकदार नहीं होंगे। कृषि विभाग द्वारा तय किए गए मापदंडों के मुताबिक, वर्ष 2009-10 से लेकर वर्ष 2025-26 के दौरान किसी भी सरकारी योजना के तहत पंचायत, जिला या राज्य स्तर पर पहले पुरस्कार प्राप्त कर चुके किसान इस वर्ष आवेदन नहीं कर सकते। विभाग का उद्देश्य नए और अब तक अनदेखे रहे परिश्रमी किसानों को मंच प्रदान करना है। इसलिए कृषकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी पूर्व प्राप्तियों और पात्रता शर्तों की भली-भांति पुष्टि करने के बाद ही फार्म भरें, ताकि बाद में छंटनी प्रक्रिया के दौरान आवेदन निरस्त न हो।
आवेदन की समय सीमा और फार्म जमा करने का स्थान
इस पूरी चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए 30 अक्टूबर की तारीख अंतिम समय सीमा के रूप में तय की गई है। इच्छुक काश्तकारों के लिए आवेदन पत्र पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसान अपने भरे हुए आवेदन आवश्यक दस्तावेजों के साथ नजदीकी कृषि पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी अथवा संबंधित ब्लॉक व जिला स्तर के सहायक निदेशक कृषि कार्यालय में सीधे जमा करवा सकते हैं। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक शिवाजी राम कटारिया ने काश्तकारों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी प्रविष्टियां जमा करें, ताकि नवाचार और विशेष उपलब्धियों का उचित मूल्यांकन हो सके।



















