राजस्थान के ऐतिहासिक पर्यटन केंद्रों में शामिल आमेर में घूमने आने वाले सैलानियों के लिए अचानक मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। जयपुर शहर से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित आमेर महल अपनी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक धरोहर के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। आमतौर पर यहां आने वाले सैलानी पहाड़ी रास्ते से महल के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए स्थानीय स्तर पर चलने वाली टूरिस्ट जीपों का सहारा लेते हैं। इस समय जीप चालकों के बीच छिड़े विवाद और स्थानीय लोगों के विरोध के चलते इस परिवहन व्यवस्था पर अचानक ब्रेक लग गया है। प्रशासन और पुलिस ने महल तक जाने वाले पर्यटक वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे दूर-दराज से पहुंचे पर्यटकों को तेज धूप और गर्मी के बीच पैदल चढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्थानीय विवाद के चलते प्रशासन ने रोकी वाहनों की आवाजाही
आमेर में जीप संचालन को लेकर पैदा हुआ टकराव अचानक गहरा गया, जिसके बाद इलाके में विरोध की स्थिति बन गई। स्थानीय स्तर पर बढ़े असंतोष को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से पुलिस और प्रशासन ने महल की ओर जाने वाले तमाम टूरिस्ट वाहनों के पहिये थाम दिए। बाहर से आने वाले सैलानियों को इस अंदरूनी विवाद और अचानक बदले नियमों की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। जैसे ही वे महल के तलहटी क्षेत्र में पहुंचे, उन्हें पता चला कि ऊपर जाने के लिए कोई भी सवारी गाड़ी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कई परिवारों के पास पैदल रास्ता नापने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।
बुजुर्गों और छोटे बच्चों को उठानी पड़ी भारी परेशानी
परिवहन के साधन अचानक बंद हो जाने का सबसे गंभीर असर बुजुर्ग पर्यटकों और छोटे बच्चों पर पड़ा है। पहाड़ी मार्ग पर तपती गर्मी के दौरान पैदल चढ़ना किसी भी सामान्य यात्री के लिए आसान नहीं होता, खासकर तब जब वे परिवार के साथ सुकून से घूमने का मन बनाकर आए हों। कई उम्रदराज यात्री रास्ते में बार-बार रुककर सुस्ताते हुए दिखाई दिए, वहीं बच्चों को गोद में लेकर चढ़ाई करने वाले माता-पिता खासे बेहाल नजर आए। बाहरी पर्यटकों का कहना था कि स्थानीय विवादों का खामियाजा सीधे तौर पर उन लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका इस पूरे मामले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
पर्यटन सीजन की शुरुआत में कारोबारियों की बढ़ी चिंता
जीप संचालन ठप होने की यह समस्या ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आई है जब इलाके में पर्यटन सीजन की शुरुआत हो रही है। आमेर महल तक जाने वाले पर्यटक केवल खुद ही परेशान नहीं हो रहे हैं, बल्कि इस गतिरोध ने पूरे पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की नींद उड़ा दी है। स्थानीय गाइड, टूर ऑपरेटर और यात्रा प्रबंधकों के दैनिक कामकाज पर इस बंदी का सीधा नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। टूर ऑपरेटरों का मानना है कि यदि सीजन के शुरुआती दिनों में ही परिवहन का यह बुनियादी ढांचा चरमरा जाएगा, तो इससे आमेर की छवि पर गलत असर पड़ेगा और पर्यटकों की आमद भी प्रभावित हो सकती है।
समाधान की तलाश और भविष्य की व्यवस्था पर नजर
आमेर में रोजाना हजारों की तादाद में घरेलू और विदेशी सैलानी पहुंचते हैं, जिनकी यात्रा काफी हद तक यहां के सुगम स्थानीय परिवहन पर टिकी होती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की रोक जारी है और सभी पक्ष इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि जीप चालकों के बीच चल रहे इस विवाद का कोई स्थायी प्रशासनिक समाधान कब निकलता है। जब तक दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती और वाहनों का संचालन दोबारा सुचारू नहीं होता, तब तक महल का दीदार करने आने वाले सैलानियों को इसी तरह पैदल पसीना बहाना पड़ेगा।


















