राजस्थान के धौलपुर शहर स्थित हुंडावाल रोड इलाके में बुनियादी नागरिक सुविधाओं की बदहाली ने स्थानीय बाशिंदों का जीना दूभर कर दिया है। सीवर लाइनों के पूरी तरह चोक हो जाने और निकासी नालों के अवरुद्ध होने से गंदा, दुर्गंधयुक्त पानी मुख्य रास्ते पर लगातार जमा रहता है। इस गंभीर समस्या का सबसे गहरा असर वार्ड नंबर 7, वार्ड नंबर 8 और वार्ड नंबर 9 की घनी आबादी वाली कॉलोनियों पर पड़ रहा है। यहां रहने वाले हजारों नागरिक पिछले कई वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बेहद दयनीय हालात में रहने को विवश हैं। रास्ते में फैले गंदे पानी की वजह से राहगीरों, बुजुर्गों और स्कूली छात्र-छात्राओं को आने-जाने में भारी दिक्कतों से जूझना पड़ता है। कई मौकों पर तो बच्चों को इसी संक्रामक पानी के बीच से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जबकि जलस्तर अधिक बढ़ जाने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है और वे घरों में ही कैद रहने को मजबूर हो जाते हैं।
खुले और धंसे हुए नाले बढ़ा रहे हादसों का जोखिम
सड़क के बीचों-बीच जमा यह गंदा पानी केवल आवागमन में बाधा ही नहीं बना है, बल्कि रोजमर्रा के आवागमन में गंभीर दुर्घटनाओं की वजह भी बन रहा है। क्षेत्र के निवासी कल्याण सिंह के अनुसार हुंडावाल रोड पर बने नाले के फेरो कवर टूटकर नीचे धंस चुके हैं, जिससे सड़क पर खतरनाक गड्ढे बन गए हैं। इसी अनदेखी के चलते वे स्वयं अपनी स्कूटी सहित इस गड्ढे में गिरकर घायल हो चुके हैं। वर्तमान में यह मार्ग पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए अत्यधिक जोखिम भरा बन चुका है।
इलाके के एक अन्य निवासी बंटी बघेल ने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर कई स्थानों पर नाले का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। सीवर और निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ठप रहने से नाले का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर लगातार सड़क पर बह रहा है। इन आधे-अधूरे और धंसे हुए नालों के कारण रोजाना मोटरसाइकिल और स्कूटी सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। इसके साथ ही स्कूली वैन और ऑटो रिक्शा जैसे वाहनों को भी इस दलदल भरे रास्ते से निकलने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ता है।
घरों की बुनियाद पर खतरा और संक्रमण की आशंका
जलभराव की यह भीषण समस्या अब केवल रास्तों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि लोगों के घरों के भीतर तक पैर पसार चुकी है। स्थानीय निवासी रामेश्वर का कहना है कि उनके पूरे मकान के चारों ओर गंदे पानी का स्थायी भराव रहता है। मानसून और बारिश के दिनों में तो स्थिति और ज्यादा विकराल हो जाती है, जब घर के ठीक सामने लगभग 4 फीट तक गंदा पानी भर जाता है। लगातार चार साल से पानी जमा रहने के कारण अब मकानों की नींव कमजोर पड़ने लगी है, जिससे इमारत ढहने और जान-माल के बड़े नुकसान का निरंतर डर सता रहा है।
स्थानीय परिवारों के अनुसार गंदे और ठहरे हुए पानी के कारण इलाके में गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। बदबूदार वातावरण में दिन-रात बिताने के कारण लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से घिर रहे हैं। रामेश्वर ने अपनी व्यथा बताते हुए स्पष्ट किया कि उनका परिवार पिछले चार साल से इस असहनीय परेशानी को झेल रहा है और बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
नगर परिषद की कार्यशैली से लोगों में गुस्सा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने हुंडावाल रोड की इस बदहाली को लेकर नगर परिषद और जिला प्रशासन के अधिकारियों को बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से इस दिशा में कोई ठोस अथवा स्थायी कदम नहीं उठाया गया। अधिकारियों की अनदेखी के चलते अधूरे पड़े नाले हर रोज मासूमों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। हाल ही में एक दर्दनाक वाकया सामने आया जब एक छोटी बच्ची खेलते समय अचानक खुले नाले में गिर गई। उस दौरान गनीमत रही कि परिवार के सदस्य वहीं पास में मौजूद थे, जिन्होंने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को तुरंत बाहर खींच लिया, जिससे उसकी जान बच सकी।
हुंडावाल रोड तथा प्रभावित तीनों वार्डों के लोगों ने नगर परिषद और जिला प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि सबसे पहले पूरी सीवर लाइन और नालों की तलीझार सफाई कराई जाए। इसके साथ ही नाले के सभी अधूरे निर्माण कार्यों को अविलंब पूरा किया जाए, टूटे हुए फेरो कवर बदले जाएं और पानी की निकासी के लिए वैज्ञानिक व स्थायी बंदोबस्त सुनिश्चित किया जाए, ताकि हजारों लोगों को इस नारकीय जीवन से स्थायी मुक्ति मिल सके।


















