गुजरात के एकता नगर में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी निवासी राधेश्याम पीपलवा को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वर्ष 2024 की फिल्मों की श्रेणी में उनकी कोंकणी भाषा की फीचर फिल्म ‘मोग आसुम’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कोंकणी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। लेखक, निर्माता और निर्देशक के रूप में लंबे समय से सिनेमा जगत में सक्रिय पीपलवा के लिए यह उपलब्धि उनके रचनात्मक सफर का एक नया शिखर साबित हुई है।
राजस्थान से पांच राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
राधेश्याम पीपलवा की इस सफलता को सिनेमाई जगत में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि वह राजस्थान से पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अपने नाम करने वाले एकमात्र फिल्मकार बन गए हैं। उन्होंने केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक पटल पर भी भारतीय सिनेमा की सशक्त छाप छोड़ी है। उनके निर्देशन और निर्माण में बनी विभिन्न कृतियों को देश और दुनिया के अलग-अलग प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में अब तक 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, वह पूर्व में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की राष्ट्रपति जूरी के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
‘मोग आसुम’: मानवीय संवेदनाओं और विरह की मार्मिक अभिव्यक्ति
राष्ट्रीय मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली फिल्म ‘मोग आसुम’ का शाब्दिक अर्थ ‘प्यार बना रहे’ होता है। यह कृति मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों के ताने-बाने, प्रेम और विरह की नाजुक परतों को बड़ी ही संजीदगी से पर्दे पर उकेरती है। फिल्म की पटकथा एक ऐसे वैवाहिक जोड़े के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां जीवनसाथी की असमय मृत्यु के बाद पति और पूरे परिवार के जीवन में गंभीर भावनात्मक उथल-पुथल शुरू हो जाती है। बिछोह के बाद भी रिश्तों में बनी रहने वाली आत्मीयता और शोक के बीच आगे बढ़ने के मानसिक संघर्ष को इसमें बहुत गहराई से दर्शाया गया है।
प्रवासी जीवन और पारिवारिक दूरियों का सजीव चित्रण
यह फिल्म केवल एक गृहस्थ परिवार के दुख तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन अनगिनत लोगों की आंतरिक व्यथा को भी आवाज देती है जो रोजगार या अन्य विवशताओं के कारण अपनी मातृभूमि और परिवार से मीलों दूर रहने के लिए बाध्य हैं। दूर देश में रह रहे व्यक्तियों और घर पर राह देख रहे परिजनों के बीच की यादों, भावनात्मक जुड़ाव तथा कठिन परिस्थितियों में जीवन को नए सिरे से अपनाने की यात्रा इस कहानी का मूल आधार है। संवेदनाओं से लबरेज यही भावनात्मक धरातल इस सिनेमाई प्रयास को आम दर्शकों के दिलों के करीब ले जाता है।
फतेहपुर शेखावाटी से राष्ट्रीय पटल तक का प्रेरक सफर
एक छोटे ग्रामीण और कस्बाई परिवेश से निकलकर फिल्म निर्माण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में लगातार उत्कृष्टता हासिल करना युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। फतेहपुर शेखावाटी की पृष्ठभूमि से आने वाले राधेश्याम पीपलवा ने यह प्रमाणित किया है कि संसाधनों की सीमाओं के बावजूद निष्ठा, लगन और अथक परिश्रम से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। उनकी यह उपलब्धि स्थानीय कलाकारों और स्वतंत्र फिल्मकारों में नई उम्मीद जगाती है।
आगामी परियोजना: राजस्थानी और हिंदी में संस्कृति को समर्पित फिल्म
पीपलवा वर्तमान समय में राजस्थान और हिंदी भाषा में बनने वाली एक महत्वाकांक्षी फिल्म के निर्माण और निर्देशन पर काम कर रहे हैं। यह आगामी परियोजना राजस्थान और पूरे देश की लोक कला, समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक संगीत और खेल परंपराओं को समर्पित होगी। इस फिल्म के जरिए राजस्थान की गौरवशाली विरासत और समूचे भारत की सांस्कृतिक विविधता को बड़े पर्दे पर पेश करने की तैयारी है। उनके अनुसार, यह नई फिल्म अगले दो से तीन महीनों के भीतर दर्शकों के बीच रिलीज की जा सकती है।




















