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भीलवाड़ा में पशुपालकों को मिली राहत, यूरिया उपचार से सूखे चारे में ही बढ़ेगी प्रोटीन की ताकतराजस्थान
11 अक्तू॰ 2026, 3:52 pm (2 घंटे पहले)· 0

भीलवाड़ा में पशुपालकों को मिली राहत, यूरिया उपचार से सूखे चारे में ही बढ़ेगी प्रोटीन की ताकत

ग्रामीण इलाकों में चारे की किल्लत के बीच किसान वैज्ञानिक विधि से सूखे चारे को पौष्टिक बना सकते हैं। यूरिया के संतुलित घोल से नाइट्रोजन बढ़ाकर चारे का पोषण मूल्य सुधारा जा सकता है।

गांवों में पशुपालन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अनगिनत किसान परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार है। मवेशी स्वस्थ, हट्टे-कट्टे और ताकतवर बने रहें, यह हर पशुपालक की पहली प्राथमिकता होती है। जब मौसम या अन्य वजहों से हरे चारे की भारी कमी हो जाती है, तब मवेशियों के शरीर में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना एक गंभीर चुनौती बन जाता है। ऐसी स्थिति में किसान अक्सर बाजार में मिलने वाले महंगे वाणिज्यिक पशु आहार पर भारी रकम खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि खेतों में उपलब्ध साधारण सूखे चारे को ही पोषण से भरपूर बनाकर इस अतिरिक्त खर्च को रोका जा सकता है।

साधारण सूखे चारे में पोषण की कमी

खेतों से मिलने वाले आम सूखे चारे में कुदरती रूप से प्रोटीन की मात्रा काफी कम पाई जाती है। जब पशु लगातार केवल सूखा चारा खाते हैं, तो उन्हें जरूरी शारीरिक विकास और ताकत के लिए पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। इसी वजह से मवेशियों की सेहत कमजोर पड़ने लगती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार किया गया चारा इस कमी को दूर करने में बेहद कारगर सिद्ध होता है। विशेष रूप से तैयार यूरिया उपचार की मदद से सूखे भूसे या चारे की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है, जिससे पशुओं को जरूरी तत्वों की आपूर्ति आसानी से हो जाती है।

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यूरिया घोल तैयार करने का सटीक अनुपात

पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ए के सिंह के अनुसार सूखे चारे में प्रोटीन का स्तर कम होने पर यूरिया प्रक्रिया के जरिए आवश्यक नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाई जाती है। इस वैज्ञानिक विधि में सूखे चारे के कुल वजन का लगभग 4 प्रतिशत यूरिया इस्तेमाल किया जाता है। एक मानक प्रक्रिया के तहत 40 लीटर पानी लेकर उसमें 4 किलोग्राम यूरिया को पूरी तरह घोला जाता है। जब यह तरल मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाता है, तब इसे सूखे चारे पर हर तरफ बराबर मात्रा में छिड़क दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य सूखे चारे में प्रोटीन रहित नाइट्रोजन के अनुपात को सुरक्षित रूप से बढ़ाना है।

पाचन तंत्र में नाइट्रोजन कैसे बनता है प्रोटीन

मवेशियों के पेट और पाचन तंत्र के भीतर कई तरह के सूक्ष्मजीव यानी माइक्रोब्स मौजूद रहते हैं। जब उपचारित चारा पशु के पेट में पहुंचता है, तो ये सूक्ष्मजीव चारे में मौजूद नाइट्रोजन का इस्तेमाल करके प्रोटीन संश्लेषण का काम तेज कर देते हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया से चारे का संपूर्ण पोषण मूल्य काफी बढ़ जाता है और पशु का शरीर प्रोटीन का बेहतर उपयोग करने में सक्षम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, रासायनिक प्रक्रिया के असर से कड़ा सूखा चारा काफी नरम और मुलायम हो जाता है। मुलायम होने की वजह से जानवर इसे बेहद चाव से खाते हैं और उनका हाजमा भी दुरुस्त रहता है।

लापरवाही बन सकती है जानलेवा जोखिम

यूरिया से चारे का उपचार करते समय अत्यधिक सावधानी, सही नाप-तौल और निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी ठोस जानकारी अथवा गलत अनुपात में यूरिया का अंधाधुंध इस्तेमाल पशुओं के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विषैले प्रभाव से बचाव के लिए पशुपालकों को अपनी मर्जी से कोई प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस विधि को आजमाने से पहले किसी योग्य पशु चिकित्सक अथवा मान्यता प्राप्त पशुपालन विशेषज्ञ से पूरी प्रक्रिया समझकर उनकी देखरेख में ही काम शुरू करना चाहिए।

सवाल-जवाब

सूखे चारे के उपचार में कितना यूरिया इस्तेमाल किया जाता है?
इस प्रक्रिया में सूखे चारे के कुल वजन का लगभग 4 प्रतिशत यूरिया उपयोग में लाया जाता है।
यूरिया का घोल तैयार करने के लिए पानी और यूरिया का क्या अनुपात होना चाहिए?
आमतौर पर 40 लीटर साफ पानी में 4 किलोग्राम यूरिया को अच्छी तरह घोला जाता है।
चारे में मौजूद नाइट्रोजन पशु के शरीर में प्रोटीन कैसे बनता है?
पशु के पाचन तंत्र में मौजूद सूक्ष्मजीव इस नाइट्रोजन का उपयोग करके प्रोटीन का संश्लेषण करते हैं।
यूरिया उपचार के बाद सूखे चारे में क्या बदलाव आता है?
इस प्रक्रिया से चारे का पोषण मूल्य बढ़ जाता है और वह नरम हो जाता है, जिससे पशु उसे आसानी से पचा लेते हैं।
क्या किसान बिना विशेषज्ञ सलाह के यह प्रक्रिया अपना सकते हैं?
नहीं, सही जानकारी के बिना यूरिया का इस्तेमाल पशुओं के लिए जानलेवा हो सकता है, इसलिए पशु चिकित्सक की सलाह जरूरी है।
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टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·19 मिनट पहले

40 लीटर पानी में 4 किलो यूरिया मिलाने का यह गणित थोड़ा संभलकर करना होगा, ज़रा सी भी लापरवाही सीधे जानलेवा हो सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 मिनट पहले

भीलवाड़ा के पशुपालकों के लिए चारे का खर्च कम करने का यह तरीका बहुत काम का है, बस यूरिया की मात्रा में जरा सी भी गड़बड़ी से जानलेवा खतरा हो सकता है। कोई ऐसा आसान तरीका है क्या जिससे किसान घर पर ही यूरिया की सही मात्रा बिल्कुल सटीक नाप सकें?

Ravikash Gupta@ravikash·35 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बात तो सही है कि खर्च घटेगा, पर यूरिया मापने के लिए रसोई वाले डिजिटल कांटे का इस्तेमाल कर सकते हैं क्या ताकि गलती न हो?

Karan Malhotra@karan-malhotra·55 मिनट पहले

भीलवाड़ा के किसानों के लिए ये तरीका वाकई काम का है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग यूरिया का गलत इस्तेमाल कर बैठते हैं, जिससे मवेशियों की जान तक खतरे में पड़ जाती है। डॉक्टर साहब की बताई मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, वरना थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। थोड़ी सी भी लापरवाही मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

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