पश्चिमी सीमा के पास अनूपगढ़ से सूरतगढ़ जाने वाली रेलवे लाइन पर 50 जीबी गांव के समीप मंगलवार, 3 नवंबर को हुए एक जोरदार धमाके ने सुरक्षा तंत्र में खलबली मचा दी है। भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती इलाके में स्थित इस ट्रैक पर हुआ यह विस्फोट कोई छिटपुट घटना नहीं मानी जा रही है, क्योंकि राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में पहले भी पटरियों को उड़ाने और ट्रेनों को बेपटरी करने के कई संगीन प्रयास दर्ज किए जा चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस ताजा मामले की तहकीकात में जुटी हैं, जिसके बाद राज्य में रेल पटरियों और पुलों की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से समीक्षा शुरू हो गई है।
अनूपगढ़ रेल लाइन पर विस्फोट और सुरक्षा एजेंसियों की पड़ताल
सीमांत क्षेत्र में अनूपगढ़ से सूरतगढ़ रेल खंड पर 50 जीबी गांव के निकट मंगलवार, 3 नवंबर को हुए भीषण विस्फोट ने अचानक खतरे की घंटी बजा दी। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की कमान संभाल ली। फिलहाल इस विस्फोट के वास्तविक कारणों, प्रयुक्त विस्फोटक सामग्री और इसके पीछे किसी संगठित साजिश की संभावनाओं को लेकर पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों के निष्कर्ष आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी कि इस वारदात को किस मकसद से अंजाम दिया गया था।
उदयपुर-अहमदाबाद रेल पुल पर बारूद से हुआ था हमला
पटरियों पर हुए इस ताजा विस्फोट ने ठीक दो साल पहले की उस खौफनाक वारदात की यादें ताजा कर दी हैं, जब 12 नवंबर 2022 की रात उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे लाइन के एक पुल को उड़ाने की कोशिश की गई थी। अज्ञात उपद्रवियों ने पुल पर जोरदार धमाका किया था, जिससे पटरी कई स्थानों से बुरी तरह टूट गई थी। घटना स्थल से बारूद के अवशेष बरामद हुए थे और शुरुआती पड़ताल में यह स्पष्ट हो गया था कि पूरे पुल को ढहाने तथा पूरी लाइन को बर्बाद करने की सोची-समझी योजना बनाई गई थी।
उस समय की स्थिति इसलिए भी बेहद नाजुक थी क्योंकि धमाके से महज चार घंटे पहले ही उस पुल से एक ट्रेन गुजरी थी। यदि धमाका ट्रेन गुजरते समय होता तो भीषण जनहानि हो सकती थी। घटना की जानकारी मिलते ही अहमदाबाद से उदयपुर आ रही ट्रेन को डूंगरपुर में आपातकालीन रूप से रोकना पड़ा था। जांच पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया था कि पुल पर लगी पटरियों के नट-बोल्ट तक गायब कर दिए गए थे।
तत्कालीन जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा ने उस समय आशंका जताई थी कि पुल को ध्वस्त करने के लिए डेटोनेटर का इस्तेमाल किया गया था। वहीं उदयपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने बताया था कि शुरुआती छानबीन से यह हमला पूरी तरह सुनियोजित प्रतीत हो रहा था। मौके पर बम निरोधक दस्ते और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने पहुंचकर साक्ष्य जुटाए थे, जबकि राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने भी जांच में हिस्सा लिया था। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना से महज 12 दिन पहले, यानी 31 अक्टूबर 2022 को ही इस रेल खंड का लोकार्पण किया था। इस गंभीर मामले पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि एटीएस, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और रेलवे पुलिस संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
अजमेर में सीमेंट ब्लॉक रखकर मालगाड़ी पलटाने का प्रयास
उदयपुर की घटना के बाद साजिशकर्ताओं ने माल ढुलाई रूट को निशाना बनाया। 8 सितंबर 2024 को अजमेर जिले में एक मालगाड़ी को पटरी से उतारने की खतरनाक साजिश उजागर हुई। शरारती तत्वों ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर फुलेरा-अहमदाबाद ट्रैक के बीच, सरधना और बांगड़ स्टेशनों के मध्य पटरियों के ठीक बीचोबीच सीमेंट के दो भारी ब्लॉक रख दिए थे। उसी दौरान वहां से गुजर रही तेज रफ्तार मालगाड़ी इन पत्थरों से सीधे टकरा गई। गनीमत यह रही कि बड़ा हादसा टल गया और ट्रेन डिरेल होने से बच गई। रेलवे अधिकारियों ने इस संबंध में तुरंत कानूनी मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की थी।
चलती ट्रेनों पर पथराव और सुरक्षा की चुनौतियां
पटरियों पर विस्फोट और रुकावटें डालने के अलावा चलती ट्रेनों पर पथराव की घटनाएं भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं। हाल ही में 26 अक्टूबर की शाम फुलेरा रेलवे स्टेशन से रवाना हुई जयपुर इंटरसिटी ट्रेन को निशाना बनाया गया। किसी अज्ञात व्यक्ति ने ट्रेन के डी-8 कोच पर अचानक भारी पत्थर फेंक दिया। पत्थर इतनी तेजी से लगा कि खिड़की का मजबूत शीशा चकनाचूर हो गया और टूटे हुए कांच के साथ पत्थर अंदर बैठे एक यात्री के सिर पर जा लगा, जिससे वह घायल हो गया। चलती रेलगाड़ी पर इस तरह अचानक हमले होने से मुसाफिरों की जान को गंभीर जोखिम पैदा हो गया है। इस वारदात में भी पत्थर फेंकने वाले की पहचान और कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है।
सीमावर्ती अनूपगढ़ के ताजा धमाके से लेकर उदयपुर में पुल उड़ाने की साजिश, अजमेर में मालगाड़ी को बेपटरी करने की कोशिश और फुलेरा के पास पथराव तक, ये तमाम कड़ियां सुरक्षा तंत्र के सामने गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अब जांच दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की है कि क्या इन वारदातों के पीछे किसी एक गिरोह या साजिश का हाथ है अथवा ये अलग-अलग उपद्रवी तत्वों द्वारा की गई हरकतें हैं।



















