पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसूनी वर्षा की तीखी लहर ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से 29 अगस्त को राज्य के बहुतांश हिस्सों में अति तीव्र वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। मौसम केंद्र के अद्यतन बुलेटिन के अनुसार, प्रदेश के पांच पर्वतीय जनपदों यानी पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, चमोली और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी तेरह जनपदों के लिए बादलों की भीषण गर्जना, आकाशीय बिजली गिरने और कम समय में अत्यधिक पानी बरसने के तीव्र स्पेल आने का अलर्ट जारी हुआ है। प्रांतीय राजधानी देहरादून सहित पर्वतीय अंचलों में लगातार हो रही वर्षा की वजह से बरसाती नाले और नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। विभिन्न स्थानों पर पहाड़ियों से टूटकर गिरे मलबे और भूस्खलन के कारण प्रमुख आवाजाही मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों का संपर्क कट चुका है।
देहरादून में दो घंटे की मूसलाधार वर्षा से जलभराव और यातायात ठप
प्रदेश की राजधानी देहरादून में मानसून के कड़े तेवर देखने को मिल रहे हैं। बीते शुक्रवार की अपराह्न अचानक मौसम का मिजाज बदला और लगातार दो घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने समूचे शहर को पानी-पानी कर दिया। दून घाटी के प्रमुख रास्तों पर घुटनों से ऊपर तक पानी भर जाने की वजह से यातायात व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई। ऐतिहासिक घंटाघर, दून अस्पताल चौक, ISBT टर्मिनल के समीपवर्ती क्षेत्र और सहारनपुर रोड पर भीषण जलभराव हो गया, जिसके परिणाम स्वरूप वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही। दफ्तरों से लौटने वाले कर्मचारियों, वाहन चालकों तथा राहगीरों को इस जलभराव के बीच खासी परेशानियां झेलनी पड़ीं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि देहरादून घाटी और उससे सटे मैदानी इलाकों में आगामी 24 से 48 घंटों के दौरान बिजली कड़कने तथा बादलों की कड़क के साथ रुक-रुक कर बारिश के तेज दौर जारी रहेंगे।
बागेश्वर के कपकोट में भूस्खलन की तबाही: 9 सड़कें ठप और भद्रतुंगा मार्ग ध्वस्त
कुमाऊं अंचल के बागेश्वर जिले में अनवरत हो रही बारिश की वजह से हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। खास तौर पर कपकोट क्षेत्र में पहाड़ियों से विशालकाय मलबा गिरने के कारण ग्रामीण इलाकों की 9 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद पड़ी हैं। सीमांत क्षेत्र को जोड़ने वाला अत्यधिक महत्वपूर्ण भद्रतुंगा मार्ग कई स्थानों पर पहाड़ी दरकने की वजह से बह गया है। इस मुख्य संपर्क पथ के ध्वस्त हो जाने से एक दर्जन से अधिक दूरस्थ गांवों का संबंध जिला मुख्यालय से पूरी तरह टूट गया है। रास्तों पर भारी पत्थर और दलदल जमा रहने के कारण ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर एक-दूसरे का हाथ थामे खतरे भरे रास्तों को पार करने पर विवश हैं। हालांकि स्थानीय प्रशासन की ओर से JCB मशीनें मार्ग खोलने के कार्य में लगाई गई हैं, परंतु ऊपर से लगातार गिर रहे पत्थरों और बारिश की रुकावट के कारण राहत कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।
चमोली और रुद्रप्रयाग में नदियां खतरे के निशान के पास, हाईवे बाधित
गढ़वाल के सीमांत जनपदों चमोली और रुद्रप्रयाग में देर रात से बिना रुके वर्षा का दौर बना हुआ है। लगातार गिरते पानी के कारण मंदाकिनी और अलकनंदा जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से उछाल मार रहा है और नदियां खतरे के लाल निशान के समीप बह रही हैं। पर्वतीय ढलानों से अनवरत चट्टानें और मलबा नीचे खिसकने के चलते केदारनाथ तथा बदरीनाथ को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के कई संवेदनशील हिस्सों पर वाहनों की आवाजाही बार-बार रुक रही है। स्थानीय प्रशासन ने नदी घाटियों में निवास करने वाले लोगों और चारधाम यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की कड़ी हिदायत दी है। चमोली के ग्रामीण इलाकों में उफान पर आए बरसाती नालों ने पैदल पुलियों तथा वैकल्पिक रास्तों को क्षति पहुंचाई है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और आम ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है।
कुमाऊं मंडल का हाल: पिथौरागढ़ में भू-धंसाव और नैनीताल में जलभराव का संकट
कुमाऊं मंडल के पर्वतीय तथा मैदानी दोनों क्षेत्रों में बारिश ने दोहरी आफत खड़ी कर दी है। सीमांत जिले पिथौरागढ़ की मुनस्यारी और धारचूला तहसीलों में सतत वर्षा से जमीनों में दरारें पड़ने और भू-धंसाव की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे कई रिहाइशी बस्तियों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं नैनीताल जिले के ऊपरी हिस्सों में बोल्डर गिरने से आंतरिक रास्ते ठप पड़े हैं, जबकि हल्द्वानी समेत तराई के इलाकों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बस्तियों में पानी भर गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने कुमाऊं के सभी पर्वतीय जिलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर स्थानीय निवासियों को उफनते नालों, नदियों तथा कमजोर चट्टानी ढलानों से दूर रहने की सलाह दी है।
30 अगस्त से 3 सितंबर तक उत्तराखंड के मौसम का विस्तृत पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने 30 अगस्त से 3 सितंबर तक की अवधि के लिए विस्तृत मौसम बुलेटिन जारी किया है, जिसके अनुसार राज्य में मानसून की यह उग्रता आगे भी बनी रहेगी
- 30 अगस्त: कुमाऊं अंचल के बहुतांश स्थानों और गढ़वाल अंचल के अनेक इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज होगी। इस दौरान रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, पौड़ी, देहरादून, चम्पावत तथा उधम सिंह नगर सहित 9 जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। सभी जिलों में बिजली कड़कने और तीव्र वर्षा के स्पेल आने का अनुमान है।
- 31 अगस्त: बागेश्वर, नैनीताल और देहरादून जनपदों में मूसलाधार से अति भारी वर्षा का दौर आ सकता है, जिसके चलते इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, चम्पावत तथा उधम सिंह नगर जनपदों में भी भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।
- 01 सितंबर: टिहरी तथा देहरादून जिलों में बादलों की गर्जना के साथ अत्यंत तीव्र बारिश के दौर चलने की पूरी आशंका है। इसके साथ ही चमोली, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल एवं हरिद्वार जिलों में कई स्थानों पर भारी वर्षा देखने को मिलेगी।
- 02 और 03 सितंबर: उत्तराखंड के सभी तेरह जनपदों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और बादलों की चमक-गर्जना के साथ बौछारों का दौर जारी रहेगा, जिससे मानसून राज्य में पूरी तरह प्रभावी बना रहेगा।
प्रशासनिक सतर्कता और चारधाम यात्रियों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग ने पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं तथा संवेदनशील बस्तियों के निवासियों के लिए सुरक्षा परामर्श जारी किया है। पहाड़ों पर लगातार गिरते बोल्डर और मलबे की वजह से सफर करना अत्यधिक जोखिमभरा हो चुका है। प्रशासन ने अपील की है कि चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालु मौसम का मिजाज देखकर ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाएं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे रात के समय पहाड़ी रास्तों पर सफर करने से बचें और सुरक्षित पड़ावों पर ही ठहरें। मैदानी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को जलभराव की समस्या से निपटने के लिए त्वरित उपाय करने और आपदा टीमों को मुस्तैद रखने के निर्देश दिए गए हैं।




















