राजस्थान के आगामी पंचायती राज संग्राम को लेकर मुख्य विपक्षी दल ने जमीनी स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। राजधानी जयपुर स्थित पार्टी के वॉर रूम में बुधवार की सुबह एक उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस मैराथन चर्चा में प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत करीब 20 वरिष्ठ चेहरे शामिल हुए। इस गहन विचार-विमर्श का मुख्य केंद्र बिंदु पंचायत स्तर तक कार्यकर्ताओं को लामबंद करना, पारदर्शी टिकट वितरण प्रणाली तैयार करना और गांव स्तर पर आक्रामक प्रचार की रूपरेखा तय करना रहा।
जमीनी मुद्दों और तीन साल के रिकॉर्ड पर भाजपा को घेरने की योजना
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी ग्रामीण अंचल के हर कोने तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी। प्रदेश की मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार के लगभग तीन साल के कार्यकाल को विपक्ष अपने प्रचार अभियान का मुख्य आधार बनाने जा रहा है। नेताओं ने सहमति जताई कि सत्ता पक्ष की कमियों को उजागर करने के साथ-साथ पूर्ववर्ती सरकार की लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाओं की भी जनता के बीच याद दिलाई जाएगी। इसके लिए पंचायतों की विशिष्ट समस्याओं को चिन्हित किया जा रहा है ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार चुनावी संवाद स्थापित किया जा सके। संगठन से मिलने वाले आंतरिक फीडबैक को उम्मीदवारी तय करने में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रचार के लिए विशेष अभियान समिति और एकजुटता का संदेश
बैठक के समापन के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि पूरे राज्य में एक संगठित अभियान समिति का गठन किया गया है। यह समिति सुदूर ढाणियों और गांवों में जाकर जनता से सीधा संवाद साधेगी। डोटासरा ने पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि सभी नेता पूरी एकजुटता के साथ मुकाबले के लिए तैयार हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी अपने पिछले शासनकाल की उपलब्धियों के बलबूते और वर्तमान शासन की विफलताओं का कच्चा चिट्ठा लेकर चौपालों में उतरेगी।
किसानों की परेशानी और खाद की किल्लत बनेगा केंद्रीय विषय
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने चुनावी प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उम्मीदवार चयन में साफ छवि और मजबूत जनाधार वाले चेहरों को आगे लाया जाएगा। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राज्य भर में किसानों को झेलनी पड़ रही खाद की भारी किल्लत चुनाव का सबसे बड़ा विमर्श बनेगी। पायलट के अनुसार कृषि संकट, खाद की अनुपलब्धता और काश्तकारों की अनसुनी जैसे विषयों को पार्टी अपनी जनसभाओं में प्रमुखता से उठाएगी ताकि अन्नदाता की आवाज बुलंद हो सके।
संवैधानिक संस्थाओं और राष्ट्रीय घटनाक्रम पर तीखे तेवर
पायलट ने नई दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रति हुए व्यवहार पर भी कड़ा रोष जताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान होना चाहिए और नेता प्रतिपक्ष के साथ ऐसा आचरण कतई उचित नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि जब भी आयोग से जवाब मांगा जाता है, तो सफाई देने के लिए भाजपा के प्रवक्ता सामने आ जाते हैं।
स्थानीय निकाय नतीजों का विश्लेषण और धांधली के आरोप
हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए पायलट ने दावा किया कि विपक्षी दल ने भाजपा से अधिक मत प्रतिशत हासिल किया है, जिससे यह साबित होता है कि जनादेश किसके पक्ष में झुका हुआ था। वहीं गोविंद सिंह डोटासरा ने तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में सत्ता पक्ष द्वारा की गई कथित गड़बड़ियां जनता के सामने उजागर हो चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पंचायती राज के इस चुनाव में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक मनमानी या बेईमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पीसीसी में अब जिलेवार समीक्षा और टिकटों पर अंतिम मंथन
वॉर रूम में वरिष्ठ नेताओं के बीच सहमति बनने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी जिला स्तर पर विस्तृत फीडबैक जुटाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। विभिन्न जिलों से आने वाली रिपोर्टों और क्षेत्रीय समीकरणों की गहन समीक्षा के बाद ही प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। बैठकों का यह लगातार चलता दौर संकेत देता है कि पार्टी ग्रामीण सत्ता के इस इम्तिहान को पूरी संजीदगी और आक्रामक तेवरों के साथ लड़ने के लिए अपनी बिसात बिछा चुकी है।




















