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पाली के ऐतिहासिक लोर्डिया तालाब को बचाने पानी में उतरे पंडित जीवराज श्रीमाली, युवाओं संग निकाला भारी कचराराजस्थान
7 अक्तू॰ 2026, 2:55 pm (55 मिनट पहले)· 0

पाली के ऐतिहासिक लोर्डिया तालाब को बचाने पानी में उतरे पंडित जीवराज श्रीमाली, युवाओं संग निकाला भारी कचरा

दशकों तक पूरे पाली शहर की प्यास बुझाने वाला लोर्डिया तालाब गंदगी और प्लास्टिक के चलते संकट में था, जिसे स्वच्छ बनाने के लिए पंडित जीवराज श्रीमाली की अगुवाई में युवाओं ने बड़ा सफाई अभियान चलाया।

राजस्थान के मारवाड़ अंचल में स्थित पाली शहर की प्यास बुझाने वाले प्राचीन जल स्रोतों में लोर्डिया तालाब का स्थान बेहद खास रहा है। दशकों तक पूरे नगर के निवासियों के लिए जीवनदायिनी रहे इस ऐतिहासिक जलाशय की पहचान समय के थपेड़ों और देखरेख की भारी कमी के कारण कचराघर में तब्दील हो चुकी थी। जब पानी जहरीला होने लगा और जलीय जीवों के अस्तित्व पर सीधा संकट मंडराने लगा, तब राजस्थान के जाने-माने सोशल मीडिया एक्टिविस्ट पंडित जीवराज श्रीमाली ने इस धरोहर को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। अपनी ढलती उम्र की परवाह किए बिना वे युवाओं के समूह को साथ लेकर खुद तालाब की गंदगी और दलदल में उतर गए।

गंदगी और प्लास्टिक से घुट रहा था ऐतिहासिक जलाशय

मारवाड़ के पारंपरिक जल प्रबंधन का नायाब नमूना रहा लोर्डिया तालाब कभी पाली शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का अहम केंद्र हुआ करता था। लेकिन बदलते दौर और लंबे समय से जारी प्रशासनिक उपेक्षा ने इस जल स्रोत की सूरत बिगाड़ दी थी। तालाब के भीतर हजारों टन प्लास्टिक कचरा, गंदगी और सीवेज लगातार जमा होने लगा था। इस भयानक प्रदूषण के चलते पानी पूरी तरह विषैला हो चुका था। हालात इतने बदतर हो गए थे कि जहरीले पानी के कारण सैकड़ों मछलियां और अन्य जलीय जीव तड़पकर दम तोड़ने लगे थे, वहीं तालाब के किनारे पानी पीने आने वाले बेजुबान पशु भी गंभीर रूप से बीमार पड़ने लगे थे।

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युवाओं की टीम के साथ मिलकर निकाला सैकड़ों टन कचरा

शहर के इस गौरवशाली जल स्रोत को बर्बादी की कगार पर देख पंडित जीवराज श्रीमाली मूकदर्शक बनकर नहीं रह सके। उन्होंने स्थानीय नौजवानों को संगठित किया और एक जोशीली टीम बनाकर तालाब की सफाई की जमीनी मुहिम छेड़ दी। श्रीमाली खुद तालाब के गंदे पानी और कीचड़ में उतरे, जिसके बाद देखते ही देखते स्थानीय लोगों के सैकड़ों हाथ भी इस कारवां में शामिल होते चले गए। इस साझा प्रयास से लोर्डिया तालाब के गर्भ से कई टन और सैकड़ों टन कचरा बाहर निकालकर किनारे किया गया, जिससे तालाब को नया जीवन मिलने की राह तैयार हुई।

प्रदेश भर में चल रहा जल स्रोतों के संरक्षण का अभियान

पंडित जीवराज श्रीमाली राजस्थान भर में 'क्लीन रिवर और वॉटर बॉडीज' अभियान संचालित कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर अपनी विशेष पहचान बनाने वाले श्रीमाली उम्र के इस पड़ाव में भी नदियों, पोखरों और प्राचीन जल संरचनाओं की दशा सुधारने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उनके इस भागीरथ प्रयास का सबसे ताजा गवाह पाली का यही लोर्डिया तालाब बना है। तालाब से कचरे के बड़े ढेरों को साफ करने के साथ ही उन्होंने आम जनता से भी एक मार्मिक अपील की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि जलाशयों में पॉलीथिन और अन्य कचरा कतई न फेंके, ताकि पानी साफ रहे और बेजुबान पशु-पक्षियों के साथ-साथ जलीय जीवों की जिंदगी को बचाया जा सके।

रियासत कालीन जल प्रबंधन की मिसाल है लोर्डिया तालाब

पाली शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित लोर्डिया तालाब रियासत काल के दौरान वर्षा जल संचयन की अद्भुत व्यवस्था का प्रतीक है। उस दौर में जब आधुनिक पाइपलाइन नेटवर्क और नल जल योजनाएं मौजूद नहीं थीं, तब बारिश की हर बूंद को सहेजने वाला यह विशाल तालाब ही पूरे शहर और इसके आस-पास के इलाकों में पेयजल आपूर्ति का प्रमुख साधन था। तालाब के किनारे आज भी मौजूद पक्के घाट, प्राचीन बुर्ज और इसकी ऐतिहासिक बनावट इसकी पुरानी भव्यता को बयां करते हैं। इसके अलावा पूरे इलाके के भूजल स्तर को रिचार्ज करने और उसे बनाए रखने में भी इस जलाशय की भूमिका हमेशा से बेहद निर्णायक रही है।

सवाल-जवाब

लोर्डिया तालाब किस शहर में स्थित है?
लोर्डिया तालाब राजस्थान के पाली शहर के मध्य में स्थित एक ऐतिहासिक जल स्रोत है।
इस तालाब की सफाई की अगुवाई किसने की?
इस तालाब की सफाई की अगुवाई राजस्थान के जाने-माने सोशल मीडिया एक्टिविस्ट पंडित जीवराज श्रीमाली ने युवाओं की टीम के साथ की।
लोर्डिया तालाब के प्रदूषण से किस तरह का नुकसान हो रहा था?
हजारों टन प्लास्टिक और सीवेज से पानी जहरीला हो गया था, जिससे सैकड़ों मछलियां मर रही थीं और पानी पीने वाले बेजुबान मवेशी बीमार पड़ रहे थे।
रियासत काल में लोर्डिया तालाब का क्या महत्व था?
रियासत काल में आधुनिक पाइपलाइन न होने के कारण यह तालाब वर्षा जल संचयन का मुख्य साधन था और पूरे पाली शहर की प्यास बुझाता था।
पंडित जीवराज श्रीमाली राजस्थान में कौन सा अभियान चला रहे हैं?
पंडित जीवराज श्रीमाली पूरे राजस्थान में 'क्लीन रिवर और वॉटर बॉडीज' अभियान चला रहे हैं।
पंडित जीवराज श्रीमाली ने आम लोगों से क्या अपील की है?
उन्होंने लोगों से जलाशयों में पॉलीथिन और कचरा न फेंकने की अपील की है ताकि जलीय जीवों और बेजुबान पशुओं की जान बचाई जा सके।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·7 मिनट पहले

उम्र की परवाह किए बिना खुद कीचड़ में उतरकर सफाई करना गजब की प्रेरणा है। प्रशासन अगर समय रहते ध्यान देता तो यह हालत ही न होती।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो सही है आपकी। पर ये बताइए कि ऐसे अभियानों के बाद क्या प्रशासन ने कचरा फेंकने वालों पर कोई जुर्माना लगाने का फैसला किया है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 मिनट पहले

तालाबों में कचरा फेंकना और सीवेज मिलाना सीधा पर्यावरण अपराध है, प्रशासन और स्थानीय लोगों को मिलकर इस पर रोक लगानी चाहिए। पंडित जी ने उम्र की परवाह किए बिना जो कदम उठाया है, वह सराहनीय है।

Rohan Verma@rohan-verma·26 मिनट पहले

करण भाई, एकदम सही कहा आपने। प्रशासन सोता रहता है और जब तक कोई खुद कीचड़ में न उतरे, किसी को फर्क नहीं पड़ता।

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