आरपीएससी में बड़ा बदलाव, राज्यपाल ने जारी किए आदेश
राजस्थान की प्रमुख भर्ती संस्था, राजस्थान लोक सेवा आयोग में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए आयोग के वरिष्ठ सदस्य कर्नल केसरी सिंह को RPSC के नए अध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया है। यह नियुक्ति निवर्तमान अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का कार्यकाल समाप्त होने और उनके सेवानिवृत्त होने के बाद तत्काल प्रभाव से की गई है। इस बदलाव के बाद से अजमेर स्थित आयोग के मुख्यालय में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
सफल कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त हुए उत्कल रंजन साहू
आयोग के पूर्व अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का कार्यकाल 19 जून को पूरा हो गया था। राजस्थान के पूर्व DGP के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर इस प्रतिष्ठित आयोग की कमान संभालने वाले साहू लगभग एक साल तक इसके प्रमुख रहे। अपने एक वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक कदम उठाए। उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों की कई लंबित और बड़ी भर्तियों को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया गया, जिससे नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच आयोग की साख फिर से मजबूत हुई। उनके हटने के बाद से ही नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जिन पर अब विराम लग गया है।
प्रोफेसर संतोष आनंद और डॉ दीपक कुमार शर्मा बने नए सदस्य
अध्यक्ष पद का प्रभार सौंपने के साथ-साथ राज्य सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल ने आयोग में दो नए सदस्यों की स्थाई नियुक्ति भी की है। अकादमिक और प्रशासनिक क्षेत्र के जाने-माने चेहरों, प्रोफेसर संतोष आनंद और डॉ दीपक कुमार शर्मा को राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य बनाया गया है। इन दोनों सदस्यों के शामिल होने से आयोग के रुके हुए प्रशासनिक कार्यों और आगामी परीक्षाओं से जुड़े बड़े निर्णयों में तेजी आने की उम्मीद है।
कार्यकाल के नियम और आगे की चुनौतियां
नियमों के अनुसार, RPSC के इन नए सदस्यों का कार्यकाल उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से अगले 6 वर्षों के लिए या अधिकतम 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक रहेगा। अजमेर मुख्यालय में हुई इन नई नियुक्तियों से प्रदेश में आगामी RAS और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारियों को नई गति मिलने की संभावना है। नए नेतृत्व के सामने इन बड़ी भर्ती परीक्षाओं को समय पर और बिना किसी पेपर लीक के पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आयोजित कराने की एक बेहद गंभीर और बड़ी चुनौती होगी।













