जिंदगी में अचानक होने वाली गंभीर दुर्घटनाएं इंसान की पूरी दुनिया उलट-पुलट कर सकती हैं, मगर मजबूत इरादे हों तो इंसान हर बाधा को पार कर जाता है. उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले सुमित का सफर इसी जज्बे को दिखाता है. एक भयानक हादसे के दौरान कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह सुन्न और दोनों पैर पैरालाइज्ड हो जाने के बावजूद उन्होंने किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय अपनी मेहनत की राह चुनी. सुमित पिछले करीब 10 महीने से शहर भर में घूम-घूम कर ऑनलाइन फूड डिलीवरी का काम कर रहे हैं और अपनी रोजमर्रा की कमाई से परिवार का सहारा बने हुए हैं.
दो मंजिला इमारत से गिरने के बाद बदल गई थी दुनिया
कुछ समय पहले सुमित के साथ एक अप्रत्याशित और गंभीर हादसा हुआ था, जिसने उनके पूरे जीवन की दिशा ही बदल कर रख दी. वह एक दो मंजिला इमारत से अचानक नीचे गिर पड़े थे. इस गंभीर चोट के कारण उनकी रीढ़ और कमर के निचले हिस्से पर बेहद बुरा असर पड़ा. अस्पताल में इलाज के बाद भी उनके दोनों पैरों में हरकत नहीं लौटी और वे स्थायी रूप से पैरालाइज्ड हो गए. इस घटना के बाद उनके लिए बिना सहारे के चलना-फिरना नामुमकिन हो गया और आम लोगों की तरह सामान्य दिनचर्या जीना बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया. अचानक आई इस शारीरिक अक्षमता ने उनके सामने अनगिनत सवाल खड़े कर दिए थे.
इंटरमीडिएट की पढ़ाई और रोजगार का संकट
सुमित ने अपनी पढ़ाई इंटर तक पूरी की थी. हादसे से पहले वे अपने भविष्य को संवारने की योजना बना रहे थे, लेकिन दुर्घटना के बाद गंभीर शारीरिक सीमाओं के चलते उनके लिए सामान्य नौकरी पाना असंभव जैसा लगने लगा. एक तरफ शरीर की लाचारी थी, तो दूसरी तरफ अपने निजी खर्चे और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने का भारी दबाव. किसी भी आम इंसान का हौसला ऐसे मोड़ पर टूट सकता था, लेकिन सुमित ने खाली बैठने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुकूल काम की तलाश शुरू कर दी.
रंजीत का साथ और फूड डिलीवरी की शुरुआत
आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के इस मुश्किल दौर में सुमित की मुलाकात रंजीत से हुई, जिनकी मदद उनके जीवन में नया मोड़ साबित हुई. रंजीत ने सुमित की लगन को देखते हुए उन्हें फूड एग्रीगेटर कंपनी जोमैटो से जोड़ा और फूड डिलीवरी का काम शुरू करने में हर संभव सहायता की. शुरुआत में शारीरिक दिक्कतों के कारण डिलीवरी का काम संभालना बेहद मुश्किल था, लेकिन सुमित ने धीरे-धीरे इसे अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में ढाल लिया. पिछले 10 महीने से वह सुल्तानपुर शहर में नियमित रूप से ग्राहकों के ऑर्डर पहुंचा रहे हैं और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर सम्मानपूर्वक आजीविका कमा रहे हैं.
परेशानियों को मात देकर दूसरों के लिए बने मिसाल
सुमित का यह संघर्ष सिर्फ पेट भरने की मजबूरी नहीं, बल्कि मुश्किलों के आगे घुटने न टेकने की एक शानदार दास्तान है. उन्होंने अपनी शारीरिक मजबूरी को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया. सुमित का कहना है कि जीवन में संकट चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, अगर इंसान हिम्मत न हारे और लगातार प्रयास करता रहे, तो अंधेरे से बाहर निकलने का रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है. आज वह पूरे इलाके में मेहनत और आत्मसम्मान की जीती-जागती मिसाल बनकर दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं.



















