ट्रेन यात्रा के दौरान जल्दबाजी या असावधानी से सामान छूट जाना अक्सर यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर देता है। राजस्थान के कोटा रेल मंडल में आने वाले बारां स्टेशन पर ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां प्लेटफॉर्म पर पानी पीने उतरे एक यात्री का महंगा स्मार्टफोन नल के पास छूट गया था। रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए न केवल उस लावारिस फोन को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया, बल्कि तकनीकी पड़ताल के बाद असली मालिक की पहचान कर उसे पूरे नियमों के साथ वापस भी दिलवाया।
सफर के दौरान बारां स्टेशन पर यूं छूटा था स्मार्टफोन
पाली जिले के रहने वाले मानक राम गाड़ी संख्या 18208 अजमेर-दुर्ग एक्सप्रेस में सवार होकर अजमेर से अनूपपुर की यात्रा कर रहे थे। सफर के बीच जब यह ट्रेन कोटा मंडल के बारां रेलवे स्टेशन पहुंची, तो प्यास बुझाने के इरादे से वे बोगी से नीचे उतरे। प्लेटफॉर्म पर लगे पानी के नल के पास उन्होंने अपना 16 हजार रुपये का मोबाइल फोन रख दिया और पानी पीने लगे। इसी बीच ट्रेन के चलने का वक्त हो गया। वे आनन-फानन में अपनी बोगी में सवार हो गए, लेकिन हड़बड़ाहट में उनका ध्यान फोन पर नहीं गया। गाड़ी जब स्टेशन छोड़कर आगे निकल गई, तब उन्हें अपनी इस चूक का अहसास हुआ, जिससे वे खासे चिंतित हो उठे।
गश्त के दौरान जवान की पड़ी नजर, तुरंत पोस्ट में कराया जमा
स्टेशन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे सुरक्षा बल के जवान चौबीसों घंटे निगरानी रखते हैं। घटना के समय आरक्षक विकास कुमार प्लेटफॉर्म क्षेत्र में मुआयना कर रहे थे। नल के नजदीक जब उनकी दृष्टि लावारिस हालत में रखे एक स्मार्टफोन पर पड़ी, तो उन्होंने बिना देर किए उसे अपनी निगरानी में लिया। इसके बाद वे उस हैंडसेट को बारां आरपीएफ थाने लेकर पहुंचे और वहां आधिकारिक रूप से दर्ज कराया। तकनीकी माध्यमों का सहारा लेकर फोन से जुड़े विवरण खंगाले गए, जिससे आखिरकार फोन के स्वामी मानक राम से संपर्क साधना संभव हो सका। उन्हें फोन के महफूज होने की खबर दी गई, जिससे यात्री को बड़ी राहत मिली।
पहचान और टिकट की जांच के बाद मित्र को सौंपा गया हैंडसेट
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने इस पूरे घटनाक्रम का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि मानक राम स्वयं यात्रा में आगे निकल चुके थे, इसलिए उन्होंने फोन प्राप्त करने के लिए अपने एक नजदीकी साथी प्रताप राम को अधिकृत किया। प्रताप राम भी पाली जिले के निवासी हैं और वे सूचना पाकर बारां स्थित सुरक्षा बल कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद सहायक उप निरीक्षक रामराज मीना ने हैंडसेट सुपुर्द करने से पहले निर्धारित कानूनी औपचारिकताओं को पूरी सतर्कता से निभाया।
अधिकारियों ने यात्रा टिकट, पहचान पत्र और फोन के मालिकाना हक से जुड़े सभी आवश्यक प्रमाणों का मिलान किया। यात्री मानक राम से भी दूरभाष पर बात करके उनके साथी को फोन सौंपने की पुष्टि ली गई। इसके बाद दो स्वतंत्र गवाहों को साथ रखकर आवश्यक प्रपत्र तैयार किए गए और 16 हजार रुपये मूल्य का वह फोन प्रताप राम के हवाले कर दिया गया।
क्या है 'ऑपरेशन अमानत' और इसका दायरा
भारतीय रेल में यात्रियों का विश्वास मजबूत करने के मकसद से सुरक्षा बल की ओर से 'ऑपरेशन अमानत' चलाया जा रहा है। इस विशेष मुहिम का प्राथमिक लक्ष्य ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में भूलवश छूटे सामान, बैग, आभूषण, नकदी, आवश्यक प्रपत्रों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खोजकर उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाना है। बारां स्टेशन पर घटित यह घटना दर्शाती है कि सुरक्षा बल के कर्मी किस तरह सजगता से आम नागरिकों की संपत्ति की रक्षा कर रहे हैं। प्रशासन ने यात्रियों से यह आग्रह भी दोहराया है कि आवागमन के दौरान वे अपनी निजी और मूल्यवान वस्तुओं को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें।


















