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साइबर ठगी थामने अब निजी एक्सपर्ट्स का सहारा लेगी राजस्थान पुलिस, जिला स्तर तक बनेगी विशेषज्ञों की टीमराजस्थान
20 जुल॰ 2026, 1:41 pm (47 दिन पहले)· 0

साइबर ठगी थामने अब निजी एक्सपर्ट्स का सहारा लेगी राजस्थान पुलिस, जिला स्तर तक बनेगी विशेषज्ञों की टीम

राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए निजी क्षेत्र के साइबर विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है, जो जिला स्तर तक उपलब्ध होंगे।

जयपुर में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने एक अहम बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। अब जांच और रोकथाम में सरकारी अमले के साथ निजी क्षेत्र के साइबर विशेषज्ञ भी हाथ बंटाएंगे, और यह सुविधा सिर्फ जयपुर मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर जिले तक पहुंचाई जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञों का एक अलग पैनल तैयार किया जा रहा है, जिसमें जरूरत पड़ने पर बाहरी तकनीकी जानकारों को जोड़ा जाएगा ताकि जिला स्तर की पुलिस को भी तुरंत मदद मिल सके।

गृह मंत्री के निर्देश के बाद बदली रणनीति

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीकानेर दौरे के दौरान साइबर अपराध से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए थे। इसी निर्देश के बाद राजस्थान पुलिस ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया और शिकायत मिलते ही फौरन एक्शन लेने का तरीका अपनाया है। शिकायत दर्ज होने के शुरुआती घंटों में ही पीड़ित को राहत देने की कोशिश की जा रही है, ताकि ठगों के खाते से रकम निकल जाने से पहले ही उसे रोका जा सके। जहां भी जांच या रोकथाम के लिए खास तकनीकी जानकारी की दरकार होगी, वहां निजी क्षेत्र के साइबर विशेषज्ञों को भी मौका दिया जाएगा।

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हेल्पलाइन नंबर 1930 पर बढ़ेंगी लाइनें

डीजीपी ने बताया कि शिकायतों की सुनवाई के लिए बनी हेल्पलाइन 1930 को पहले से ज्यादा दमदार बनाया जा रहा है। फोन कॉल संभालने की क्षमता बढ़ाने के मकसद से कॉल सेंटर की लाइनों की गिनती लगातार बढ़ाई जा रही है। इस वक्त 53 लाइनें काम कर रही हैं, जिन्हें जल्द ही 60 तक पहुंचाया जाएगा। इसी वजह से हेल्पलाइन पर आने वाली 90 प्रतिशत से ज्यादा कॉल्स का जवाब समय पर दिया जा रहा है। साथ ही पुलिस ने साइबर ठगों की जेब पर चोट पहुंचाने वाली आर्थिक कार्रवाई को भी तेज कर दिया है।

98 करोड़ रुपये बैंक खातों में रोके गए

हाल के दिनों की बात करें तो साइबर ठगी से जुड़े मामलों में 98 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अलग-अलग बैंक खातों में सीज कराई जा चुकी है। इसके अलावा ठगी में इस्तेमाल हो रहे बड़ी तादाद में सिम कार्ड भी बंद कराए जा चुके हैं। साइबर अपराध करने का तरीका लगातार बदल रहा है, इसलिए पुलिस नई तकनीक, बाहरी विशेषज्ञों के सहयोग और फौरन कार्रवाई करने वाले सिस्टम को और पुख्ता बनाने में जुटी है, ताकि आम लोग ऑनलाइन ठगी की चपेट में आने से बचे रहें।

बदलाव क्यों जरूरी बना

राजस्थान में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ने के बीच पुलिस के सामने चुनौती यह रही कि हर जिले में तकनीकी जानकारों की कमी पूरी नहीं हो पा रही थी। निजी विशेषज्ञों को साथ लेने से जांच में तेजी आएगी और जिला पुलिस को भी बड़े शहरों जैसी मदद मिल सकेगी। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ मामलों का निपटारा जल्दी होगा, बल्कि ठगी की रकम भी समय रहते बचाई जा सकेगी।

सवाल-जवाब

राजस्थान पुलिस निजी साइबर एक्सपर्ट्स की मदद क्यों ले रही है?
साइबर ठगी की जांच और रोकथाम में तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ाने और जिला स्तर तक मदद पहुंचाने के लिए पुलिस निजी क्षेत्र के साइबर विशेषज्ञों का पैनल बना रही है।
यह फैसला किसके निर्देश पर लिया गया?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने बीकानेर दौरे के दौरान साइबर अपराधों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिसके बाद यह रणनीति अपनाई गई।
साइबर हेल्पलाइन 1930 की लाइनें कितनी बढ़ाई जा रही हैं?
फिलहाल 53 लाइनें चल रही हैं, जिन्हें बढ़ाकर 60 किया जा रहा है ताकि ज्यादा कॉल्स का जवाब समय पर दिया जा सके।
अभी हेल्पलाइन पर कितने प्रतिशत कॉल का समय पर जवाब मिल रहा है?
डीजीपी के मुताबिक हेल्पलाइन पर आने वाली 90 प्रतिशत से ज्यादा कॉल का समय पर जवाब दिया जा रहा है।
साइबर ठगी के मामलों में अब तक कितनी रकम सीज कराई गई है?
हाल के दिनों में साइबर ठगी से जुड़े मामलों में 98 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अलग-अलग बैंक खातों में सीज कराई जा चुकी है।
क्या सिम कार्ड पर भी कार्रवाई हुई है?
हां, साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे बड़ी तादाद में सिम कार्ड भी बंद कराए गए हैं।
यह नई व्यवस्था कहां-कहां उपलब्ध होगी?
यह व्यवस्था सिर्फ पुलिस मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला मुख्यालय स्तर तक भी साइबर विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध कराई जाएगी।
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