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सांभर में बनेगा देश का नया हाई स्पीड रेल टेस्ट ट्रैक, 250 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनेंराजस्थान
25 अग॰ 2026, 9:59 pm (1 घंटे पहले)· 2

सांभर में बनेगा देश का नया हाई स्पीड रेल टेस्ट ट्रैक, 250 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें

सांभर झील के पास करीब 820 करोड़ रुपए की लागत से एक हाई स्पीड रेल टेस्ट ट्रैक तैयार किया जा रहा है, जहां दिवाली के बाद 250 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेनों का परीक्षण होगा।

सांभर की पहचान अब केवल अपनी पुरानी ऐतिहासिक विरासत और विशाल झील तक ही सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह बहुत जल्द देश में हाई स्पीड रेल परीक्षण के एक बड़े केंद्र के रूप में भी अपनी नई पहचान दर्ज कराने जा रहा है। सांभर झील के किनारे एक आधुनिक टेस्ट ट्रैक का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो आने वाले दिनों में भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता और बुनियादी ढांचे को एक नया मुकाम देने का काम करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस नए और विशेष ट्रैक पर आगामी दिवाली के बाद लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटे की अद्भुत रफ्तार से अत्याधुनिक ट्रेनों का परीक्षण करने की पूरी तैयारी चल रही है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के शीर्ष अधिकारियों ने किया निरीक्षण

इस महत्वपूर्ण परियोजना की प्रगति का जायजा लेने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक पंकज शर्मा ने जोधपुर मंडल के डीआरएम और अन्य वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने फुलेरा जंक्शन, सांभर रेलवे स्टेशन और विशेष रूप से गुढ़ा-ठठाना-मीठड़ी के बीच विकसित किए जा रहे इस हाई स्पीड टेस्ट ट्रैक का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निर्माण स्थल पर चल रहे कार्यों की वर्तमान स्थिति को देखा और संबंधित इंजीनियरों व ठेकेदारों के साथ विचार-विमर्श किया ताकि कार्य की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो सके।

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64 किलोमीटर लंबे ट्रैक की विशेषताएं

गुढ़ा-ठठाना-मीठड़ी क्षेत्र के बीच बनाए जा रहे इस अत्याधुनिक टेस्ट ट्रैक की कुल लंबाई करीब 64 किलोमीटर है, जो पारंपरिक रेलवे लाइनों से काफी अलग और उन्नत तकनीकों से लैस होगा। इस ट्रैक पर न केवल अत्यधिक तेज गति से दौड़ने वाली ट्रेनों का सुचारू संचालन किया जाएगा, बल्कि उनकी तकनीकी क्षमता, सुरक्षा मानकों, स्थिरता और तमाम तरह की आधुनिक टेस्टिंग को भी अंजाम दिया जाएगा। सामान्य पटरियों के मुकाबले इस खास ट्रैक पर विशेष कर्व और त्वरित परीक्षण यानी क्विक टेस्टिंग के लिए अलग से हिस्से विकसित किए जा रहे हैं ताकि रोलिंग स्टॉक और रेलवे उपकरणों की हर बारीकी को परखा जा सके।

निर्माण कार्य और गुणवत्ता पर विशेष जोर

रेलवे महकमे से मिली जानकारी के अनुसार इस परियोजना के तहत ट्रैक का बुनियादी निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसके साथ ही पटरियों को जमीन पर बिछाने का काम भी शुरू किया जा चुका है। इसके अलावा सिगनलिंग और अन्य तकनीकी संरचनाओं को स्थापित करने का काम भी निर्धारित योजनाओं के मुताबिक आगे बढ़ रहा है। निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक पंकज शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी बचे हुए कार्यों को तयशुदा मानकों के अनुसार समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए, जिसमें निर्माण की उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा के नियमों का विशेष ध्यान रखा जाना अनिवार्य है।

लगभग 820 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा प्रोजेक्ट

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल खर्च करीब 820 करोड़ रुपए आ रहा है और यह लगभग 63.56 किलोमीटर लंबे ट्रायल ट्रैक के रूप में आकार ले रहा है। इस विशाल सेटअप पर भविष्य की हाई स्पीड रोलिंग स्टॉक और तमाम आधुनिक रेलवे तकनीकों को परखा जाएगा। जब ट्रेनों को इस विशेष ट्रैक पर 250 किलोमीटर प्रति घंटे की शीर्ष रफ्तार से दौड़ाया जाएगा, तब उनकी ब्रेकिंग सिस्टम, वाइब्रेशन, एयरोडाइनामिक्स और विभिन्न सुरक्षा पहलुओं का सटीक आकलन करना संभव हो पाएगा।

पर्यटन के साथ रेलवे तकनीक का अनूठा संगम

सांभर क्षेत्र पहले से ही अपनी प्राकृतिक सांभर झील, बड़े पैमाने पर होने वाले नमक उत्पादन और सर्दियों में आने वाले विदेशी प्रवासी पक्षियों की वजह से देश और दुनिया के पर्यटकों के बीच अपनी एक खास जगह रखता है। अब रेलवे के इस अत्याधुनिक प्रोजेक्ट के जुड़ जाने से इस इलाके की ख्याति में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को इस बात की प्रबल उम्मीद है कि इस हाई स्पीड रेल टेस्ट ट्रैक के शुरू होने से न सिर्फ क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बेहतर रेल संपर्क, अधिक ट्रेनों के ठहराव और पर्यटन के नए अवसरों के कारण इस ऐतिहासिक कस्बे को एक पूरी तरह से नई पहचान मिलेगी।

जल्द शुरू होंगी ट्रायल गतिविधियां

आने वाले कुछ ही महीनों में जब सांभर की धरती पर एक तरफ झील और पक्षियों का प्राकृतिक सौंदर्य होगा, तो दूसरी तरफ उसी क्षेत्र में अत्याधुनिक रेलवे तकनीक की कड़ी परीक्षाएं होती हुई दिखाई देंगी। रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा किया जा चुका है और बाकी बचे हुए तकनीकी कार्यों को भी बहुत तेजी से पूरा किया जा रहा है, जिसके चलते आने वाले कुछ महीनों के भीतर ही यहां परीक्षण गतिविधियां आरंभ होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

सांभर में बनने वाले हाई स्पीड रेल टेस्ट ट्रैक की लंबाई कितनी है?
सांभर में बनाए जा रहे इस अत्याधुनिक ट्रायल ट्रैक की लंबाई लगभग 63.56 से 64 किलोमीटर है।
इस टेस्ट ट्रैक पर ट्रेनों का परीक्षण किस रफ्तार से किया जाएगा?
इस ट्रैक पर ट्रेनों को करीब 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाकर उनकी क्षमता और सुरक्षा को परखा जाएगा।
इस रेल परीक्षण परियोजना पर कुल कितनी लागत आ रही है?
इस हाई स्पीड रेल टेस्ट ट्रैक के निर्माण पर लगभग 820 करोड़ रुपए की लागत आ रही है।
ट्रेनों के परीक्षण की शुरुआत कब तक होने की उम्मीद है?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस ट्रैक पर आगामी दिवाली के बाद परीक्षण गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
इस ट्रैक का निर्माण किन स्टेशनों और क्षेत्रों के बीच किया जा रहा है?
यह टेस्ट ट्रैक फुलेरा जंक्शन, सांभर रेलवे स्टेशन और गुढ़ा-ठठाना-मीठड़ी के बीच विकसित किया जा रहा है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·43 मिनट पहले

सांभर झील के पास 820 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा यह 64 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक भारतीय रेलवे के तकनीकी बुनियादी ढांचे को एक नया आयाम देगा। दिवाली के बाद 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से होने वाले इन परीक्षणों से रोलिंग स्टॉक की क्षमता और सुरक्षा मानकों को परखने में मदद मिलेगी। इस परियोजना के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण पूरा होने से देश में अत्याधुनिक रेल तकनीक के विकास को गति मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

चूँकि इस 64 किलोमीटर लंबे और 820 करोड़ रुपए की इस महत्वूपूर्ण परियोजना में 250 किमी प्रति घंटे की अत्यधिक तीव्र गति से परीक्षण होने हैं, इसलिए इतनी हाई-स्पीड पर पटरियों, रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग प्रणालियों की सुरक्षा व तकनीकी दक्षता का जमीनी स्तर पर सख्त परीक्षण होना अनिवार्य है। रेलवे अधिकारियों द्वारा गुणवत्ता और समयसीमा पर दिए जा रहे जोर से यह स्पष्ट है कि इस अत्याधुनिक परीक्षण केंद्र के जरिए भविष्य के तीव्र रेल संचालन के सुरक्षा मानकों को बेहद बारीकी से परखा जाएगा।

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