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सावन के पावन पर्व पर सिरोही में मावा और रबड़ी वाले घेवर की भारी बिक्री, केवल तीन दिनों तक रहता है इसका खास बाजारराजस्थान
28 अग॰ 2026, 8:31 am (1 घंटे पहले)· 3

सावन के पावन पर्व पर सिरोही में मावा और रबड़ी वाले घेवर की भारी बिक्री, केवल तीन दिनों तक रहता है इसका खास बाजार

राजस्थान के सिरोही में रक्षाबंधन के मौके पर पारंपरिक घेवर की खरीदारी के लिए मिठाइयों की दुकानों पर लंबी कतारें लग रही हैं। पूरे साल में सिर्फ तीन दिन तैयार होने वाली इस मिठास को पाने के लिए सुबह से ही लोग उमड़ रहे हैं।

रक्षाबंधन का त्योहार आते ही सिरोही के स्थानीय बाजारों में एक अलग ही रौनक दिखाई देने लगती है। इस खास मौके पर मिठाइयों की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहाँ इस समय पारंपरिक घेवर सबसे अधिक लोकप्रिय बना हुआ है। सिरोही के निवासियों के लिए रक्षाबंधन के दौरान घेवर खरीदना केवल एक स्वाद का मामला नहीं है, बल्कि यह त्योहार के उमंग, आनंद और पारिवारिक मिठास का एक प्रमुख प्रतीक बन चुका है।

मावा और रबड़ी की समृद्ध परतों से सजती है पूजा थाली

खाने में बेहद कुरकुरा और संतुलित मिठास वाला यह घेवर हर आयु वर्ग के लोगों के बीच खूब पसंद किया जाता है। विशेष रूप से मावा और रबड़ी की मोटी परतों से सजाया गया घेवर रक्षाबंधन पर बहनों की पूजा थाली का मुख्य आकर्षण बनता है। सुबह तड़के से ही शहर की प्रमुख मिष्ठान दुकानों के बाहर घेवर खरीदने वालों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग इसे न केवल अपने परिवारों के लिए खरीद रहे हैं, बल्कि अपनी बहनों को त्योहारी उपहार के रूप में देने के लिए भी इसे पहली पसंद मान रहे हैं।

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पूरे साल में केवल तीन दिन मिलता है यह अनूठा स्वाद

स्थानीय मिठाई निर्माताओं के अनुसार, सिरोही में घेवर बनाने की व्यवस्था बेहद अनोखी है। पूरे 12 महीनों के दौरान केवल रक्षाबंधन पर्व के आसपास महज तीन दिनों के समय में ही घेवर का निर्माण किया जाता है। उपलब्धता का यह सीमित दायरा ही बाजार में इसकी मांग को अचानक कई गुना बढ़ा देता है। साल भर में केवल तीन दिन ही मिलने के कारण स्थानीय नागरिक इस खास स्वाद का आनंद लेने का कोई भी अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहते।

सावन और राखी से जुड़ी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर

सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, घेवर का संबंध प्राचीन काल से ही पवित्र सावन मास और रक्षाबंधन के पर्व से गहरा रहा है। सदियों से सावन के मौसम में अपने प्रियजनों को घेवर बनाकर अथवा लाकर खिलाने की एक समृद्ध सामाजिक परंपरा चली आ रही है। सिरोही के निवासियों ने इस पुरानी परंपरा की मूल भावना को आज भी पूरी जीवंतता और उत्साह के साथ सहेज कर रखा हुआ है।

सवाल-जवाब

सिरोही में रक्षाबंधन पर कौन सी मिठाई की सबसे ज्यादा मांग रहती है?
सिरोही में रक्षाबंधन के अवसर पर मावा और रबड़ी की परतों से सजे पारंपरिक घेवर की सबसे अधिक मांग रहती है।
सिरोही में घेवर साल में कितने दिन तैयार किया जाता है?
सिरोही के मिष्ठान विक्रेता पूरे वर्ष में केवल रक्षाबंधन के दौरान महज तीन दिनों के लिए ही घेवर तैयार करते हैं।
घेवर का संबंध किस हिंदी महीने और त्योहार से जोड़ा जाता है?
घेवर का संबंध सदियों से सावन के पवित्र महीने और रक्षाबंधन के त्योहार से जोड़ा जाता रहा है।
रक्षाबंधन पर लोग घेवर का उपयोग किस तरह करते हैं?
लोग घेवर को अपने घर के लिए खरीदने के अलावा बहनों की पूजा थाली में रखने और उन्हें उपहार स्वरूप देने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
सिरोही में घेवर की खास वैरायटी कौन सी पसंद की जाती है?
खाने में क्रंची और मावा तथा रबड़ी की परतों से तैयार किया गया घेवर सिरोही में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।
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