रक्षाबंधन का त्योहार आते ही सिरोही के स्थानीय बाजारों में एक अलग ही रौनक दिखाई देने लगती है। इस खास मौके पर मिठाइयों की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहाँ इस समय पारंपरिक घेवर सबसे अधिक लोकप्रिय बना हुआ है। सिरोही के निवासियों के लिए रक्षाबंधन के दौरान घेवर खरीदना केवल एक स्वाद का मामला नहीं है, बल्कि यह त्योहार के उमंग, आनंद और पारिवारिक मिठास का एक प्रमुख प्रतीक बन चुका है।
मावा और रबड़ी की समृद्ध परतों से सजती है पूजा थाली
खाने में बेहद कुरकुरा और संतुलित मिठास वाला यह घेवर हर आयु वर्ग के लोगों के बीच खूब पसंद किया जाता है। विशेष रूप से मावा और रबड़ी की मोटी परतों से सजाया गया घेवर रक्षाबंधन पर बहनों की पूजा थाली का मुख्य आकर्षण बनता है। सुबह तड़के से ही शहर की प्रमुख मिष्ठान दुकानों के बाहर घेवर खरीदने वालों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग इसे न केवल अपने परिवारों के लिए खरीद रहे हैं, बल्कि अपनी बहनों को त्योहारी उपहार के रूप में देने के लिए भी इसे पहली पसंद मान रहे हैं।
पूरे साल में केवल तीन दिन मिलता है यह अनूठा स्वाद
स्थानीय मिठाई निर्माताओं के अनुसार, सिरोही में घेवर बनाने की व्यवस्था बेहद अनोखी है। पूरे 12 महीनों के दौरान केवल रक्षाबंधन पर्व के आसपास महज तीन दिनों के समय में ही घेवर का निर्माण किया जाता है। उपलब्धता का यह सीमित दायरा ही बाजार में इसकी मांग को अचानक कई गुना बढ़ा देता है। साल भर में केवल तीन दिन ही मिलने के कारण स्थानीय नागरिक इस खास स्वाद का आनंद लेने का कोई भी अवसर हाथ से जाने नहीं देना चाहते।
सावन और राखी से जुड़ी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर
सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, घेवर का संबंध प्राचीन काल से ही पवित्र सावन मास और रक्षाबंधन के पर्व से गहरा रहा है। सदियों से सावन के मौसम में अपने प्रियजनों को घेवर बनाकर अथवा लाकर खिलाने की एक समृद्ध सामाजिक परंपरा चली आ रही है। सिरोही के निवासियों ने इस पुरानी परंपरा की मूल भावना को आज भी पूरी जीवंतता और उत्साह के साथ सहेज कर रखा हुआ है।



















