सपनों को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत के साथ-साथ परिवार का सहयोग और मार्गदर्शन भी बेहद अहम भूमिका निभाता है। राजस्थान के अलवर जिले से ताल्लुक रखने वाले सांगवान परिवार ने इस बात को साबित कर दिखाया है। देश की सीमा पर तैनात सेना के जवान राजेश सांगवान के बच्चों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। बड़ी बहन अनुजा सांगवान के बनाए रास्ते पर चलते हुए छोटे भाई गौरव सांगवान ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में देशभर में 9वीं ऑल इंडिया रैंक प्राप्त कर दिल्ली एम्स में एडमिशन हासिल किया है। यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि बहन के अधूरे सपने को भाई द्वारा साकार करने की प्रेरणादायक यात्रा है।
2019 में कोटा से शुरू हुआ मेडिकल तैयारी का सफर
गौरव और अनुजा की सफलता की नींव वर्ष 2019 में रखी गई थी। जब बड़ी बहन अनुजा ने डॉक्टरी की पढ़ाई का सपना देखा, तो वह तैयारी के लिए राजस्थान के कोचिंग हब कोटा चली गईं। अनुजा के साथ उनकी माता सीमा देवी और छोटे भाई गौरव भी कोटा शिफ्ट हो गए ताकि बच्चों को घर जैसा माहौल मिल सके। उस दौरान उनके पिता राजेश सांगवान भारतीय सेना में देश की सरहद की सुरक्षा में तैनात थे। दोनों भाई-बहन कोटा में एक ही कमरे में रहकर दिन-रात पढ़ाई में जुटे रहते थे। अनुजा की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर छोटे भाई गौरव के मन में भी शीर्ष रैंक हासिल करने की ललक पैदा हुई। दोनों बच्चों का स्कूली प्रदर्शन भी उत्कृष्ट रहा था। अनुजा ने 10वीं कक्षा में 95% और 12वीं में 97% अंक हासिल किए थे, वहीं गौरव ने 10वीं में 92% तथा 12वीं परीक्षा में 90% अंक अर्जित किए थे।
बहन का अधूरा सपना बना भाई की सबसे बड़ी प्रेरणा
वर्ष 2023 में अनुजा सांगवान ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा में 640 अंक हासिल किए। हालांकि इस बेहतरीन स्कोर के बावजूद उनकी रैंक दिल्ली एम्स में सीट पाने के लिए थोड़ी कम रह गई और उनका दाखिला अलवर के ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज में हुआ। अपने पसंदीदा संस्थान में प्रवेश न मिल पाने की टीस अनुजा के मन में थी, लेकिन उन्होंने निराश होने के बजाय इस लक्ष्य को अपने भाई गौरव के कंधों पर रख दिया। अनुजा ने तय किया कि जो सपना वह खुद पूरा नहीं कर सकीं, उसे गौरव के जरिए हासिल कराएँगी। एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने के साथ ही अनुजा ने गौरव को एक प्रतियोगी छात्र के रूप में तैयार करना शुरू किया। उन्होंने गौरव को अनुशासन, सही दिशा और प्रतिस्पर्धात्मक सोच की बारीकियाँ सिखाईं।
एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ फोन पर दी रोजाना कोचिंग
अलवर में एमबीबीएस की बेहद व्यस्त और कठिन पढ़ाई के बावजूद अनुजा ने गौरव की तैयारी में कोई ढील नहीं आने दी। वह हर दिन फोन के जरिए कोटा में मौजूद गौरव से पढ़ाई का पूरा लेखा-जोखा लेती थीं। गौरव ने दिनभर में कौन-कौन से विषय पढ़े, किस टॉपिक में संशय रहा और कितना रिवीजन पूरा हुआ, अनुजा इन सब पर बारीक नजर रखती थीं। जब भी कॉलेज से छुट्टियाँ मिलतीं, अनुजा सीधे कोटा पहुँच जाती थीं ताकि गौरव की शैक्षणिक कमजोरियों को दूर किया जा सके। अनुजा ने गौरव के लिए एक विशेष टाइमलाइन और स्टडी प्लान तैयार किया था, जिसे गौरव ने पूरी निष्ठा के साथ फॉलो किया। एक ही कमरे में बैठकर देर रात तक पढ़ाई करने की पुरानी आदत ने दोनों के बीच एक मजबूत समझ पैदा कर दी थी।
रक्षाबंधन से ठीक पहले मिला ऐतिहासिक तोहफा और आगे का लक्ष्य
कड़ी तपस्या और बहन के मार्गदर्शन का परिणाम यह निकला कि गौरव सांगवान ने नीट परीक्षा में ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल की। जिस दिल्ली एम्स परिसर में प्रवेश का सपना अनुजा ने देखा था, आज उसी प्रतिष्ठित संस्थान के एमबीबीएस कोर्स में गौरव का एडमिशन हो चुका है। रक्षाबंधन पर्व से ठीक पहले मिली यह उपलब्धि अनुजा के लिए दुनिया का सबसे अनमोल उपहार बन गई। वर्तमान में अनुजा एमबीबीएस के चौथे वर्ष में हैं, जबकि गौरव दिल्ली एम्स से अपने पहले साल की पढ़ाई शुरू कर रहे हैं। अनुजा का मानना है कि मेडिकल की पढ़ाई काफी कठिन होती है, इसलिए वह आगे भी गौरव का मार्गदर्शन जारी रखेंगी ताकि वह नीट पीजी (NEET PG) जैसी उच्च स्तरीय परीक्षाओं में भी सफलता का परचम लहरा सके।



















