रक्षाबंधन के पावन पर्व को देखते हुए राजस्थान के बीकानेर जिले में महिलाओं, छात्राओं और भामाशाहों ने सीमा सुरक्षा में तैनात देश के जवानों के प्रति अनोखा सम्मान और आत्मीयता प्रकट की है। भारतीय डाक विभाग द्वारा चलाए जा रहे 'राखी से रक्षा' नामक विशेष अभियान के अंतर्गत शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की बहनों ने हजारों की संख्या में राखियां डाक के माध्यम से फौजी भाइयों के लिए भेजी हैं। इन सभी राखियों को सेना के विभिन्न मुख्यालयों के पते पर स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा जा रहा है, ताकि सीमा पर तैनात जवानों को समय रहते यह रक्षा सूत्र मिल सकें। बीकानेर की बहनों की इस दूरदर्शी पहल ने साबित कर दिया है कि देश की सीमा पर खड़े प्रहरी केवल अपने परिवार के ही नहीं, बल्कि हर भारतीय नागरिक के भाई हैं।
डाकघरों में विशेष काउंटर और प्राथमिकता से बुकिंग की सुविधा
सैनिकों तक बहनों का प्रेम समय पर पहुंचे, इसके लिए डाक विभाग ने बीकानेर मंडल के सभी प्रमुख डाकघरों में व्यापक और सुदृढ़ प्रबंध किए हैं। इस अभियान के तहत डाकघरों में विशेष राखी कवर उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें राखियां सुरक्षित रखकर स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी जा रही हैं। महिलाओं और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए डाकघरों में अलग से विशेष काउंटर स्थापित किए गए हैं। इन काउंटरों पर राखी पोस्ट करने आने वाली बहनों की बुकिंग प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है।
राखियों की खेप को बिना किसी देरी के गंतव्य तक पहुंचाने के लिए डाक विभाग की ओर से विशेष लॉजिस्टिक्स और समयबद्ध डिलीवरी की व्यवस्था की गई है। त्यौहार के मुख्य दिन से पहले सभी राखियां संबंधित गंतव्यों तक पहुंच जाएं, इसे सुनिश्चित करने के लिए सभी डाक कर्मचारी प्राथमिकता के साथ काम में जुटे हुए हैं। स्थानीय महिलाओं और छात्राओं में इस अभियान को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
लक्ष्य के करीब पहुंचा बीकानेर डाक मंडल का राजस्व संग्रह
बीकानेर डाक मंडल के अधीक्षक रामावतार सोनी के अनुसार 'राखी से रक्षा' अभियान को आम जनता, सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग की ओर से बीकानेर मंडल को इस विशेष मौसम के दौरान कुल 30 हजार स्पीड पोस्ट बुक करने तथा लगभग 15 लाख रुपये का राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य सौंपा गया था।
अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए अधीक्षक रामावतार सोनी ने बताया कि मंडल अब तक 13 लाख रुपये से अधिक का राजस्व सफलतापूर्वक अर्जित कर चुका है। राखी के पावन अवसर को ध्यान में रखते हुए डाक छांटने से लेकर उनके परिवहन तक की पूरी प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। विभाग की पूरी कोशिश है कि कोई भी राखी रास्ते में अटकी न रहे और हर जवान की कलाई पर समय से रक्षा सूत्र सज सके।
सेना मुख्यालयों के माध्यम से होगा राखियों का वितरण
भारतीय डाक विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आम नागरिकों और बहनों की ओर से भेजी जा रही राखियों को सीधे सेना के संबंधित मुख्यालयों के पते पर डिलीवर किया जा रहा है। सैन्य मुख्यालयों में राखियों की खेप पहुंचने के बाद वहां का प्रशासन इन्हें सीमावर्ती अग्रिम चौकियों और कठिन दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवानों के बीच वितरित करने की जिम्मेदारी संभालेगा।
इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सबसे सुदूर और संवेदनशील इलाकों में देश की सेवा कर रहे जवान त्यौहार के दिन खुद को अपनों से दूर या अकेला महसूस न करें। डाक विभाग का यह समन्वित प्रयास बहनों के अटूट स्नेह और ढेरों शुभकामनाओं को सरहद के आखिरी कोने तक सुरक्षित पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बन गया है।
जवान खुद को अकेला न समझें, पूरा देश उनके साथ खड़ा है
इस अभियान से जुड़कर समाज सेवा में सक्रिय संस्थाएं भी अपनी सहभागिता दर्ज करा रही हैं। जोड़बीड़ भैरूनाथ इस्माइल फाउंडेशन से जुड़ी अलका पारीक ने इस संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए 'राखी से रक्षा' अभियान को पूरे देश के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात बताया। उन्होंने कहा कि उनकी चारों बहनें मिलकर अपने फौजी भाइयों के लिए डाक विभाग के माध्यम से राखियां भेज रही हैं।
अलका पारीक ने कहा कि सीमा पर दिन-रात देश की सुरक्षा में तैनात जवान इस बात को हमेशा याद रखें कि वे कभी अकेले नहीं हैं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों का प्यार और आशीर्वाद हर पल उनके साथ खड़ा है। हर मौसम और विषम परिस्थितियों में देश की ढाल बनकर खड़े रहने वाले जांबाज सैनिकों को राखी का धागा भेजना हर नागरिक के लिए अत्यंत सौभाग्य और गर्व का विषय है। बीकानेर की बहनों की यह भावुक पहल भाई-बहन के इस पावन पर्व को सीमाओं से परे एक राष्ट्रीय भावनात्मक एकता का रूप दे रही है।



















