राजस्थान के बहरोड़ स्थित तहसील कार्यालय में आयोजित शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान अचानक भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया. नगर पालिका बर्डोद के नवनिर्वाचित दो कांग्रेस पार्षदों को पद की शपथ दिलाने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर उन्हें रोकने के आरोप लगे. इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस विधायक ललित यादव, विधानसभा प्रभारी संजय यादव और पार्टी के अनेक कार्यकर्ता आक्रोशित होकर मौके पर पहुंच गए, जिससे पूरे प्रशासनिक परिसर में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई.
शपथ कक्ष में रोके जाने का दावा और तीखी बहस
प्राप्त विवरण के अनुसार, दोनों निर्वाचित पार्षद औपचारिक प्रक्रिया के तहत सहायक रिटर्निंग अधिकारी (एआरओ) नेहा राठी के समक्ष शपथ ग्रहण करने के लिए पहुंचे थे. कांग्रेस पक्ष का कहना है कि कक्ष में पहले से मौजूद प्रशासनिक तंत्र और पुलिस दल ने पार्षदों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया. आरोप है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को वहां से जबरन हटाने और निर्धारित शपथ प्रक्रिया में सीधा व्यवधान डालने की कोशिश की गई. जनप्रतिनिधियों को उनके वैधानिक अधिकार से वंचित करने की सूचना मिलते ही कांग्रेस विधायक ललित यादव ने तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रशासनिक कार्यशैली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए.
पुलिस अधिकारी पर धक्का-मुक्की का आरोप
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और अधिक गरमा गई जब कांग्रेस विधायक ललित यादव और विधानसभा प्रभारी संजय यादव ने पुलिस अधिकारियों पर बदसलूकी का आरोप जड़ा. दोनों नेताओं ने कहा कि जब वे प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करा रहे थे, तब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुरेश खींची ने उनके साथ धक्का-मुक्की की. नेताओं का कहना था कि चुनी हुई सरकार के दबाव में पुलिस बल गैरकानूनी तरीके से काम कर रहा है. इस पूरे विवाद और लगाए गए आरोपों के संबंध में स्थानीय पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों का आधिकारिक बयान आना अभी शेष है.
परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई, प्रदेश स्तर पर राजनीतिक तकरार
घटना के तुरंत बाद बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थकों ने तहसील परिसर में जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस जाब्ता बुलाकर पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया गया. इस पूरे विवाद पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि पूरे राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की उपेक्षा की जा रही है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विपक्षी पार्षदों को उनके दायित्वों से रोका जा रहा है. फिलहाल पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर व्यवस्था सामान्य करने में जुटे हैं.



















