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जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान की इकलौती शेरनी की मौत, 14 वर्ष की आयु में तोड़ा दमराजस्थान
19 सित॰ 2026, 12:35 pm (23 मिनट पहले)· 0

जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान की इकलौती शेरनी की मौत, 14 वर्ष की आयु में तोड़ा दम

माचिया जैविक उद्यान में 14 साल की इकलौती शेरनी ने शुक्रवार सुबह अंतिम सांस ली। चिकित्सकों के दल द्वारा पोस्टमार्टम के बाद वन खंड में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

जोधपुर स्थित माचिया जैविक उद्यान से एक दुखद खबर सामने आई है, जहाँ पार्क की एकमात्र चौदह वर्षीय शेरनी ने शुक्रवार की सुबह दम तोड़ दिया। इस शेरनी के चले जाने से समूचे जैविक उद्यान परिसर में सन्नाटा पसर गया है। घटना के तुरंत बाद प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मेडिकल बोर्ड की देखरेख में शव परीक्षण कराया गया और तत्पश्चात माचिया के वन क्षेत्र में ही उसका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उप वन संरक्षक (वन्यजीव) उदाराम सियोल ने बताया कि 18 मार्च 2016 को इस मादा शेर को गुजरात के जूनागढ़ स्थित विख्यात शक्करबाग चिड़ियाघर से यहाँ लाया गया था।

कुनबा बढ़ाने में निभाई थी अहम भूमिका

राजस्थान में एशियाई शेरों की वंशवृद्धि और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से इस शेरनी का योगदान बेहद ऐतिहासिक रहा है। अपने जीवनकाल के दौरान इसने तीन तंदुरुस्त बच्चों को जन्म दिया था, जिनके नाम रियाज, कैलाश और लक्ष्मी रखे गए थे। उद्यान के इतिहास में इन नन्हे शावकों की मौजूदगी ने पर्यटकों के बीच भारी उत्साह पैदा किया था। गौरतलब है कि इस समय माचिया जैविक उद्यान के भीतर जो अकेला नर शेर मौजूद है, वह वास्तव में इसी दिवंगत शेरनी की संतान है।

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प्रशासन और डॉक्टरों की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार

शेरनी की मृत्यु के उपरांत नियमानुसार पशु चिकित्सकों के विशेष बोर्ड का गठन किया गया, जिसने बारीकी से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान वन्यजीव प्रभाग के उप वन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक और क्षेत्रीय वन अधिकारी मौके पर मुस्तैद रहे। इसके अलावा पारदर्शी विधिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग के सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) और राजस्व विभाग के राजस्व निरीक्षक (आरआई) सहित कई अन्य कर्मचारी भी संपूर्ण कार्रवाई के साक्षी बने। विधि-विधान और नियमों के तहत वन क्षेत्र में ही देह को पंचतत्व में विलीन किया गया।

पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों में छाई उदासी

लंबे अरसे से माचिया सफारी और जैविक उद्यान का मुख्य आकर्षण रही इस शेरनी के संसार से विदा लेने से वन्यजीव प्रेमियों में भारी निराशा है। यहाँ घूमने आने वाले सैलानियों के लिए यह बाड़ा हमेशा से सबसे पसंदीदा पड़ाव हुआ करता था। उसके न रहने से पार्क का एक बड़ा आकर्षण अब थम सा गया है। जब तक वन प्रशासन किसी अन्य चिड़ियाघर से नई मादा शेरनी लाने की व्यवस्था नहीं कर लेता, तब तक यहाँ नन्हे शावकों की हलचल दोबारा देखने को नहीं मिल सकेगी। अब सभी की निगाहें विभाग की आगामी योजनाओं पर टिकी हैं ताकि यहाँ शेरों की नस्ल को फिर से फलने-फूलने का अवसर मिल सके।

सवाल-जवाब

माचिया जैविक उद्यान में शेरनी की मौत कब हुई?
शेरनी ने शुक्रवार की सुबह माचिया जैविक उद्यान में अंतिम सांस ली।
मृतक शेरनी की उम्र कितनी थी?
मृत्यु के समय शेरनी की उम्र 14 वर्ष थी।
इस शेरनी को जोधपुर कब और कहाँ से लाया गया था?
उसे 18 मार्च 2016 को गुजरात के जूनागढ़ स्थित शक्करबाग जंतुआलय से लाया गया था।
शेरनी ने अपने जीवनकाल में कितने शावकों को जन्म दिया था?
उसने तीन शावकों को जन्म दिया था, जिनके नाम रियाज, कैलाश और लक्ष्मी थे।
वर्तमान में माचिया जैविक उद्यान में कितने शेर बचे हैं?
वर्तमान में वहाँ केवल एक नर शेर मौजूद है, जो इसी शेरनी का पुत्र है।
पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के समय कौन से अधिकारी मौजूद थे?
पशु चिकित्सकों के दल के साथ उप वन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक, क्षेत्रीय वन अधिकारी, पुलिस के एएसआई और राजस्व विभाग के आरआई उपस्थित रहे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 मिनट पहले

माचिया जैविक उद्यान की इस इकलौता शेरनी की मृत्यु के बाद प्रशासनिक और विधिक प्रक्रियाओं का बहु-एजेंसी समन्वय सराहनीय रहा है, जिसमें पुलिस और राजस्व विभाग की उपस्थिति ने पारदर्शिता सुनिश्चित की। हालांकि, पार्क में अब कोई प्रजननक्षम मादा शेर न होने से वन्यजीव प्रबंधन के समक्ष एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग को कानूनन और प्रक्रियागत औपचारिकताओं को पूरा करते हुए जल्द से जल्द किसी अन्य अधिकृत चिड़ियाघर से नई मादा शेरनी लाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि यहाँ एशियाई शेरों के संरक्षण और वंशवृद्धि का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके।

Rohan Verma@rohan-verma·1 मिनट पहले

माचिया जैविक उद्यान में इकलौती शेरनी के निधन के बाद अब यहाँ एशियाई शेरों के कुनबे को सहेजने के लिए अंतर-राज्यीय एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम पर तेजी से काम करने की आवश्यकता है। जूनागढ़ या अन्य अधिकृत चिड़ियाघरों से नई मादा शेरनी लाने की प्रक्रिया में केंद्रीय जू प्राधिकरण की औपचारिकताओं के कारण देरी हो सकती है, जिससे पर्यटकों की संख्या और स्थानीय पर्यटन पर असर पड़ना तय है। वन विभाग को प्रशासनिक समन्वय दिखाते हुए इस संकट से पार पाना होगा।

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