देश में त्योहारी सीजन की दस्तक के साथ ही विमानन कंपनियों ने प्रमुख घरेलू रूटों पर हवाई किराये में भारी बढ़ोतरी कर दी है। कई महत्वपूर्ण मार्गों पर टिकटों की कीमतें सामान्य दिनों के मुकाबले दो से तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं। इस अचानक हुई बढ़ोतरी को देखते हुए व्यापारियों और उद्यमियों की शीर्ष संस्था चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने सख्त रुख अपनाया है। सीटीआई ने इस सिलसिले में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक पत्र भेजकर दखल देने की अपील की है। संगठन का कहना है कि आगामी त्योहारी दिनों में आम यात्रियों की जेब पर पड़ रहे इस भारी आर्थिक बोझ को नियंत्रित करने के लिए सरकार को तत्काल कड़े कदम उठाने चाहिए।
प्रमुख उड़ानों के किराये में 50 से 100 प्रतिशत की वृद्धि
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने जानकारी दी कि संस्था के आंतरिक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो टिकट हाल तक बेहद सस्ती दरों पर मिल रही थीं, उनके दाम अब दोगुने से भी अधिक हो चुके हैं। इंडिगो और एयर इंडिया सहित लगभग सभी प्रमुख एयरलाइंस ने बीते कुछ दिनों के भीतर ही अपने किरायों में 50% से 100% तक का भारी इजाफा कर दिया है। गणपति महोत्सव के साथ देश में त्योहारी दौर की शुरुआत हो चुकी है, जो आने वाले समय में दिवाली और छठ पूजा तक लगातार जारी रहेगा। इस पूरे दौरान काम और त्योहारों के सिलसिले में अपने घर जाने वाले यात्रियों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ती है। ऐसे महत्वपूर्ण समय पर किराये में अचानक सौ फीसदी की यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग के बजट को बिगाड़ रही है।
प्रमुख रूटों पर किराये का बदला गणित
विमानन कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए किरायों के आंकड़ों को देखें तो राष्ट्रीय राजधानी से जुड़ने वाले प्रमुख रूटों पर टिकट की दरों में भारी बदलाव आया है
- दिल्ली से मुंबई के बीच आने-जाने का राउंड ट्रिप किराया पहले 10,000 रुपये हुआ करता था, जो अब बढ़कर 18,000 से 25,000 रुपये तक पहुंच गया है।
- दिल्ली से अहमदाबाद मार्ग पर पहले दोनों तरफ की यात्रा का किराया 10,000 से 12,000 रुपये के बीच रहता था, जो वर्तमान में बढ़कर 18,000 से 20,000 रुपये कर दिया गया है।
- दिल्ली से बेंगलुरु की यात्रा के लिए यात्रियों को पहले 12,000 से 15,000 रुपये खर्च करने पड़ते थे, जबकि अब यह खर्च बढ़कर 30,000 से 35,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
- दिल्ली से कोलकाता रूट पर पहले राउंड ट्रिप की लागत लगभग 11,000 रुपये थी, जो अब सीधे 20,000 रुपये हो चुकी है।
शिशुओं के टिकट शुल्क और उड़ानों की क्षमता कटौती पर सवाल
किराये के अलावा एयरलाइंस की अन्य शुल्क नीतियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। इंडिगो ने 3 दिन से लेकर 2 साल तक की उम्र वाले शिशुओं के लिए यात्रा शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 3,000 रुपये कर दिया है, जबकि नियमों के तहत इन नन्हे बच्चों को विमान में अलग से कोई सीट भी आवंटित नहीं की जाती। इसके साथ ही एविएशन डेटा एजेंसी ओएजी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बृजेश गोयल ने स्पष्ट किया कि एयरलाइंस ने सितंबर के महीने में ही घरेलू रूटों पर अपनी कुल सीट क्षमता में 5.6% की कमी कर दी है। इसमें इंडिगो ने अपनी क्षमता में 4.5% और एयर इंडिया ने 8.8% सीटों की कटौती की है। भारतीय घरेलू विमानन बाजार में 90% से अधिक हिस्सेदारी इन्हीं दो बड़ी कंपनियों के पास है। ऐसे में त्योहारों के मौके पर जानबूझकर सीटों की संख्या कम करके किराया बढ़ाना यात्रियों के साथ सरासर अन्याय है। इसी वजह से सीटीआई ने केंद्र सरकार से विमान कंपनियों की इस मनमानी पर रोक लगाने और दरों को नीचे लाने के लिए कड़े निर्देश देने की मांग की है।

















