बिहार के छपरा जिले के कई इलाकों में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बस्तियों और मकानों से पानी की पूरी निकासी न होने से ग्रामीणों का सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त बना हुआ है। रिहायशी क्षेत्रों में जलजमाव के कारण बुजुर्ग और छोटे बच्चे हाईवे और नहरों के तटबंधों पर अस्थायी ठिकाना बनाकर दिन-रात काटने को मजबूर हैं। इन ऊंचे रास्तों के इर्द-गिर्द पानी और झाड़ियों का फैलाव होने के चलते सांप, बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं का भारी खतरा बना हुआ है, जिससे तंबू में रह रहे विस्थापितों के मन में लगातार डर समाया रहता है।
मकेर और अमनौर में सबसे गंभीर हालात
इस प्राकृतिक आपदा की सबसे भीषण मार मकेर और अमनौर प्रखंड पर पड़ी है। दोनों प्रखंडों के ग्रामीण इलाकों में अचानक रात के वक्त भारी सैलाब दाखिल हुआ, जिससे पानी तेजी से मकानों की खिड़कियों और जंगलों तक पहुंच गया। पानी की तीव्र गति के चलते कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। रात के अंधेरे में पानी भरने से अफरातफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए घरों की छतों या नजदीकी ऊंचे स्थानों की ओर भागे, जहां घबराहट और बदहवासी के माहौल में कई लोग बेहोश तक हो गए।
मौसम की मार और जहरीले जीवों का खौफ
बाढ़ के पानी से घिरे लोग अब राजमार्गों और नहर के तटबंधों पर तिरपाल और प्लास्टिक के तंबू तानकर गुजर-बसर कर रहे हैं। राजमार्ग के किनारे लगाई गई बैरिकेडिंग में कपड़ा बांधकर बच्चे कड़ी धूप से बचने के लिए छांव की तलाश करते नजर आ रहे हैं। आसमान से कभी चिलचिलाती धूप तो कभी अचानक होने वाली बारिश विस्थापित परिवारों की परेशानी को कई गुना बढ़ा रही है। तटबंध के निचले हिस्से में पानी भरा होने के कारण जहरीले कीट और सरीसृप किनारों पर चढ़ आते हैं, जिससे अंधेरा होते ही खुले आसमान के नीचे रहने वाले परिवारों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
नहर के बांध पर चार दिनों से शरण लिए ग्रामीण रामविचार सिंह के मुताबिक, वे अपने परिवार के साथ खुले में तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं। उन्होंने स्थिति बयां करते हुए बताया, "पिछले चार दिनों से मैं नहर के बांध पर टेंट लगाकर रह रहा हूं।" उनके अनुसार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी इसी बांध पर शरण लिए हुए हैं। हालांकि जलस्तर में कुछ कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन घरों के भीतर और आंगनों में अब भी गहरा पानी जमा होने के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है।
राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा प्रशासन
आपदा के शुरुआती समय से ही जिला प्रशासन स्थिति पर निरंतर नजर रखे हुए है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने दल-बल के साथ जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाला और प्रभावित इलाकों का दौरा किया। राहत पहुंचाने के लिए आपातकालीन बचाव टीमों को तैनात किया गया, जिन्होंने फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। विस्थापित ग्रामीणों की भूख मिटाने के लिए प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोई का प्रबंध किया गया है, जिसके माध्यम से भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में पानी का स्तर घटने लगा है और हालात धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रहे हैं, लेकिन जब तक गांवों से पानी पूरी तरह नहीं निकल जाता, तब तक लोगों की घर वापसी में अड़चन बनी रहेगी।




















