पूर्वी यूरोप में जारी भीषण संघर्ष की लपटों ने यूक्रेन में काम कर रहे भारतीय औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी अपनी गिरफ्त में ले लिया है। रूस की सीमा से महज 23 किलोमीटर दूर स्थित सूमी शहर में संचालित कुसुम फार्मा की प्रमुख विनिर्माण इकाई पर 4 अक्टूबर को एक घातक हवाई हमला हुआ। करीब आठ मानव रहित विमानों यानी ड्रोन के जरिए इस संयंत्र को निशाना बनाया गया, जिसके धमाकों से दवा कारखाने का मुख्य ढांचा मलबे में तब्दील हो गया और पूरे इलाके में धुएं के घने बादल छा गए। इस त्रासद घटना के दौरान संयंत्र के एक इंजीनियर ने दम तोड़ दिया, जबकि कई अन्य कर्मी जख्मी हो गए। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, संयंत्र में हुई भीषण तबाही से लगभग 500 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हुई है।
रविवार का अवकाश होने से टला और बड़ा हादसा
इस दवा संयंत्र के मालिक मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले 57 वर्षीय उद्योगपति राजीव गुप्ता हैं। घटना के समय वह खुद देश की राजधानी कीव में मौजूद थे, जिस वजह से वह पूरी तरह सुरक्षित रहे। उनके रिश्तेदार राजकुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि हमला रविवार के दिन हुआ, जो राहत की बात साबित हुआ। आम कार्यदिवसों के मुकाबले सप्ताहांत पर परिसर के भीतर कर्मचारियों की तादाद काफी सीमित थी। यदि यह बमबारी सामान्य कामकाजी दिन पर हुई होती, तो हताहतों का आंकड़ा बेहद भयावह हो सकता था। इस हमले के फौरन बाद कारखाने में दवाइयों का सारा कामकाज ठप पड़ गया है और स्थानीय दल नुकसान के आकलन के साथ राहत कार्यों में जुटे हैं।
सीमा से नजदीक होने के बावजूद जारी था उत्पादन
यह औद्योगिक इकाई भौगोलिक रूप से रूसी सीमा के बेहद करीब स्थापित है। दो साल से अधिक समय से चल रहे भारी सैन्य संघर्ष और गंभीर सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद इस संयंत्र में निरंतर जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जा रहा था। लगभग एक वर्ष पूर्व भी इस ठिकाने पर एक हमला हुआ था, जिसमें कंपनी को भारी आर्थिक आघात झेलना पड़ा था। उस घटना के बाद भी प्रबंधन ने हौसला नहीं खोया और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत को देखते हुए कामकाज चालू रखा। हालांकि, इस ताजा और बड़े हमले ने पूरी विनिर्माण प्रणाली को ध्वस्त कर दिया है, जिससे युद्धक्षेत्र में कार्यरत अन्य भारतीय प्रवासियों और उद्यमियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं।
आयात से लेकर बहुराष्ट्रीय समूह तक का सफर
राजीव गुप्ता ने अपनी व्यावसायिक यात्रा की शुरुआत वर्ष 1994 में भारत से यूक्रेन के लिए दवाओं के वितरण और निर्यात के साथ की थी। स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने बाद में स्थानीय स्तर पर ही दवाओं को तैयार करने की योजना बनाई। इसी क्रम में वर्ष 2009 के दौरान सूमी शहर में कुसुम हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के तहत इस विशाल दवा कारखाने की नींव रखी गई। धीरे-धीरे यह उपक्रम एक प्रतिष्ठित फार्मास्युटिकल ब्रांड बन गया, जो वर्तमान में 50 से अधिक किस्म की जेनेरिक औषधियों का निर्माण करता है।
नौ से अधिक राष्ट्रों में फैला है व्यावसायिक संजाल
कुसुम समूह का मुख्य प्रबंधकीय मुख्यालय कीव में सक्रिय है, जबकि विनिर्माण की प्राथमिक बागडोर सूमी स्थित कारखाने के पास थी। कंपनी का अंतरराष्ट्रीय व्यापार यूक्रेन की सीमाओं से परे नौ से ज्यादा देशों तक फैला हुआ है। इनमें उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, फिलीपींस, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, दुबई, ब्रिटेन और इटली जैसे प्रमुख वैश्विक बाजार शामिल हैं। भारत के घरेलू बाजार में भी इस समूह की दो बड़ी विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से एक राजस्थान के औद्योगिक नगर भिवाड़ी में और दूसरी मध्य प्रदेश के पीथमपुर में स्थित है। उद्योगपति राजीव गुप्ता का परिवार इस समय लंदन में रहता है। सूमी स्थित मुख्य इमारत के पूरी तरह जमींदोज होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।


















