अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो और जापानी येन की जोड़ी (EUR/JPY) में पिछले सात कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर आखिरकार ब्रेक लग गया है। मंगलवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान यह विनिमय दर 177.40 के आसपास दर्ज की गई, जबकि ताजा लाइव बाजार आंकड़ों में भाव 177.39 पर देखा गया जो पिछले बंद स्तर 177.52 के मुकाबले 0.07 प्रतिशत नीचे है। दैनिक तकनीकी चार्ट का गहन विश्लेषण बताता है कि यह मुद्रा जोड़ी अपने लगातार नीचे की ओर खिसकते चैनल (डिसेंडिंग चैनल) की निचली सीमा के बेहद करीब टिकी हुई है। इस तकनीकी आधार से बाजार को फिलहाल सहारा मिला है और बिकवाली के दबाव के बीच एक अल्पकालिक उछाल देखने को मिल रहा है। हालांकि विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर यह जोड़ी इस समानांतर चैनल के निचले स्तर को तोड़कर नीचे फिसलती है, तो मंदी की गति और तेज हो सकती है तथा गिरावट का दौर गहरा सकता है।
तकनीकी संकेतकों पर मंदी का दबाव और ओवरसोल्ड स्थिति
दैनिक समय-सीमा पर व्यापक तकनीकी संरचना को देखें तो यह मुद्रा जोड़ी अभी भी मंदी के दायरे में बनी हुई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि मौजूदा विनिमय भाव नौ-दिवसीय और पचास-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) दोनों के नीचे बना हुआ है। हालिया कारोबारी सत्रों में यह जोड़ी 175.70 के निकटवर्ती संरचनात्मक स्तर से नीचे फिसल गई थी, जिससे बाजार में सुधारात्मक चरण सक्रिय हुआ। लाइव तकनीकी संकेतकों के अनुसार, नौ-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 178.18 पर प्राथमिक प्रतिरोध के रूप में खड़ा है, जबकि बीस-दिवसीय EMA 179.42, पचास-दिवसीय EMA 181.35 और दो सौ-दिवसीय EMA 182.63 पर स्थित है। पचास-दिवसीय EMA का दो सौ-दिवसीय EMA से नीचे जाना यानी डेथ क्रॉस भी लंबी अवधि के मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। पचास-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (SMA) 181.99 और दो सौ-दिवसीय SMA 183.94 पर दर्ज है।
वहीं दूसरी ओर, बिकवाली की रफ्तार में थोड़ी थकावट के संकेत भी मिल रहे हैं। चौदह-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 29.78 पर आ गया है, जबकि लाइव डेटा में यह 30 के आसपास दर्ज है। आरएसआई का 30 या उससे नीचे जाना तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड स्थिति मानी जाती है। यह स्तर दर्शाता है कि विक्रेताओं का दबाव काफी चरम पर पहुंच चुका है और निकट भविष्य में आक्रामक बिकवाली थोड़ी धीमी पड़ सकती है, जिससे कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बनती है। एमएसीडी (MACD) संकेतक -1.22 पर है जबकि सिग्नल लाइन -1.15 और हिस्टोग्राम -0.07 पर नकारात्मक क्षेत्र में है। चौदह-दिवसीय एडीएक्स (ADX) 31 पर है, जो मौजूदा ट्रेंड की मजबूती को दर्शाता है। स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 22 और सिग्नल लाइन 23 पर है। चौदह-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 1.45 पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है और स्टॉप-लॉस बफर तय करने में उपयोगी है। बोलिंगर बैंड्स (20,2) की निचली सीमा 177.03 और ऊपरी सीमा 180.89 के बीच है, जिसका मध्य स्तर 178.96 पर है और मौजूदा भाव इन बैंड्स के भीतर गति कर रहा है। पिछले 52 हफ्तों का दायरा 174.83 से 187.93 के बीच रहा है।
चार्ट पर समर्थन और प्रतिरोध के प्रमुख स्तर
कारोबारियों के लिए इस मुद्रा क्रॉस में दोनों दिशाओं के प्रमुख स्तर काफी अहम हो चुके हैं। नीचे की तरफ, प्रारंभिक तकनीकी समर्थन डिसेंडिंग चैनल की निचली रेखा के पास लगभग 176.60 पर मौजूद है। लाइव आंकड़ों के अनुसार धुरी स्तर यानी पिवट 177.30 पर है, जिसके निकटवर्ती सपोर्ट स्तर एस1 (S1) 177.12 और एस2 (S2) 176.85 पर दर्ज हैं, जबकि बीस दिनों का मजबूत आधार लगभग 176.21 पर आंका गया है। यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है और 176.60 का स्तर टूटता है, तो अगला महत्वपूर्ण निचला स्तर नवंबर 2025 में बना ग्यारह महीने का निचला स्तर 175.70 होगा। इसके बाद बाजार की नजर चौदह महीने के सबसे निचले स्तर 169.72 पर टिकेगी, जो मंदी के गहराने की स्थिति में परीक्षण के दायरे में आ सकता है।
ऊपर की ओर किसी भी सुधार की स्थिति में, यूरो और येन की जोड़ी को सबसे पहले नौ-दिवसीय EMA यानी 178.18 के स्तर पर कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जिसके पहले दैनिक रेजिस्टेंस आर1 (R1) 177.57 और आर2 (R2) 177.75 पर स्थित हैं। यदि बाजार इस बाधा को पार करने में सफल रहता है, तो पचास-दिवसीय EMA 181.20 का स्तर परीक्षण के दायरे में आएगा, जो बीस-दिवसीय प्रतिरोध 181.48 के करीब है। इससे आगे की तेजी में उतरते हुए चैनल की ऊपरी सीमा लगभग 184.20 पर बड़ा तकनीकी अवरोध पेश करेगी। लंबी अवधि के ऐतिहासिक संदर्भ में, इस जोड़ी का सर्वकालिक उच्च स्तर 187.95 है, जो 17 अप्रैल को स्थापित हुआ था। वर्तमान सत्र में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले यूरो की तुलना करें तो यह जापानी येन के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन करता नजर आया है।
वैश्विक मुद्रा और बॉन्ड बाजार का व्यापक परिदृश्य
मुद्रा बाजार के व्यापक माहौल में केवल यूरो और येन ही हलचल में नहीं हैं, बल्कि अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी महत्वपूर्ण तकनीकी और नीतिगत बदलाव देखे जा रहे हैं। मंगलवार के एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले सप्ताह छुए गए दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय रिकवरी की रफ्तार थम गई। फिक्स्ड इनकम बाजार में जारी बिकवाली के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तरों के पास टिकी हुई है। इस ऊंचे प्रतिफल और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं कम होने के बावजूद अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती बनाए रखने में सफल रहा है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक यानी रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा इसी महीने ब्याज दरों में एक और वृद्धि किए जाने की अटकलें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के लिए सहायक साबित हो सकती हैं।
इसी तरह अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी मंगलवार तड़के यूरोपीय सत्र में उछलकर 158.00 के स्तर से ऊपर निकल गई। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीतिगत सख्ती के संकेतों और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी येन अपनी बढ़त बनाए रखने में असमर्थ रहा है। ऊंचे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर को उसके इस साल के उच्चतम स्तर के करीब टिकाए रखा है, जिससे इस जोड़ी को निरंतर समर्थन मिल रहा है। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का रुख दोबारा लौट आया है और मंगलवार की सुबह यह 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर की तरफ खिसक गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में आई रिकवरी के दम पर अमेरिकी डॉलर 17 महीने के उच्च स्तर के करीब स्थिर है, जिससे तकनीकी तौर पर सोने का सबसे कम प्रतिरोध वाला रास्ता नीचे की ओर दिखाई दे रहा है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने नीतिगत असमंजस
यूरोपीय मुद्रा के बुनियादी ढांचे की बात करें तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) इस समय एक अत्यंत जटिल आर्थिक पहेली से जूझ रहा है। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो इसका सीधा और तय उपाय ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन वर्तमान आर्थिक हालात सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले से ही उधारी लागत को बढ़ाकर वित्तीय सख्ती का एक हिस्सा खुद ही अंजाम दे चुका है। सरकारी बॉन्ड की बढ़ी हुई प्रतिफल दरों के कारण बाजार में वित्तीय स्थितियां पहले ही सख्त हो चुकी हैं, जिससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने यह कठिन असमंजस पैदा हो गया है कि वह मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए दरों में और इजाफा करे या फिर पहले से सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालने से बचे। यही नीतिगत अनिर्णय यूरो की व्यापक चाल पर असर डाल रहा है।





















