अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पवित्र तीर्थ पुष्कर में श्रद्धालुओं, व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए लंबे अरसे से सिरदर्द बने बंदरों के झुंडों को नियंत्रित करने के लिए एक सघन मुहिम शुरू की गई है। शहर की संकरी गलियों और मुख्य बाजारों में लोगों को डराने और सामान छीनने वाले इन जानवरों को योजनाबद्ध तरीके से पकड़ने का काम नगर परिषद ने अपने हाथ में लिया है। इस विशेष अभियान की निगरानी राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत के स्तर पर की जा रही है, जिनके स्पष्ट निर्देशों के उपरांत प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ है। शुरुआती चरण के दौरान ही टीम को उल्लेखनीय कामयाबी हाथ लगी है, जहां कुल 92 बंदरों को पूरी हिफाजत के साथ पिंजरों में बंद किया जा चुका है। पकड़े गए इस समूह में 16 छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी देखभाल और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए आफत बने थे झुंड
पुष्कर केवल एक सामान्य कस्बा नहीं बल्कि देश और दुनिया भर के पर्यटकों और आस्थावानों का प्रमुख केंद्र है। यहां रोजाना हजारों की तादाद में लोग पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाने और जगतपिता ब्रह्मा मंदिर में शीश नवाने पहुंचते हैं। हालांकि, बीते कुछ वर्षों के दौरान इस धार्मिक नगरी के आसपास बंदरों की तादाद में अत्यधिक इजाफा हुआ, जिससे पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। बंदरों के आक्रामक दल घरों की छतों, रिहायशी मकानों और दुकानों में घुसपैठ कर खाद्य सामग्री और कीमती सामान झपट लेते थे। स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब बंदरों द्वारा मासूम बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग तीर्थयात्रियों पर जानलेवा हमले करने के मामले सामने आने लगे। इन हमलों ने पूरे बाजार और रिहायशी कॉलोनियों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था, जिसे देखते हुए इस प्रशासनिक कार्रवाई को शुरू किया गया।
सौ किलोमीटर दूर प्राकृतिक पर्यावास में शिफ्ट करने का खाका
अभियान की कार्ययोजना पर रोशनी डालते हुए नगर परिषद के सभापति राजेंद्र बाकोलिया ने स्पष्ट किया कि पकड़े गए इन सभी 92 बंदरों को पुष्कर के सघन आबादी वाले इलाकों से लगभग 100 किलोमीटर दूर एक सुरक्षित वन क्षेत्र में ले जाया जाएगा। इस स्थानांतरण का उद्देश्य इन वन्यजीवों को उनके अनुकूल प्राकृतिक माहौल, स्वच्छ वातावरण और प्रचुर भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि वे दोबारा मानवीय बस्तियों की ओर रुख न करें। सभापति ने कहा कि स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों को सुरक्षित वातावरण देना नगर परिषद की बुनियादी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि यह अभियान केवल एक दिन की औपचारिकता नहीं है, बल्कि जब तक पूरे पुष्कर क्षेत्र को इनके अनियंत्रित हमलों से स्थायी रूप से मुक्त नहीं कर दिया जाता, तब तक यह धरपकड़ निरंतर जारी रखी जाएगी।
पारदर्शिता के लिए तैयार होगी वीडियो रिकॉर्डिंग
वन्यजीवों के स्थानांतरण के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही या प्रक्रियागत गड़बड़ी से बचने के लिए नगर परिषद ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। जब इन बंदरों को 100 किलोमीटर दूर जंगल में खुला छोड़ा जाएगा, तब नगर परिषद के अधिकृत प्रतिनिधियों का एक दल पूरे सफर और रिहाई के दौरान मौके पर मौजूद रहेगा। बंदरों को प्राकृतिक जंगल में मुक्त करने की हर एक गतिविधि की मौके पर ही वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इस प्रामाणिक फुटेज को बाद में मीडिया और आमजन के सामने सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे यह साफ हो सके कि सभी जीवों को बिना किसी नुकसान के उनके प्राकृतिक परिवेश में पहुंचा दिया गया है। पार्षद मुकेश कुमावत और नगर परिषद के कर्मचारी योगेश शर्मा ने इस पूरी कवायद को शहर के हित में बेहद जरूरी और ऐतिहासिक कदम करार दिया है।




















