देश की राजधानी में पेयजल की बढ़ती मांग को पूरा करने और हर मौसम में पेश आने वाली किल्लत को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली को हरियाणा से कच्चा पानी उपलब्ध कराने वाली मुनक नहर के साथ अब एक बिल्कुल नई समानांतर पाइपलाइन बिछाने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद शहर के कई रिहायशी इलाकों में पानी की आपूर्ति व्यवस्था काफी हद तक सुधर सकती है।
100 किलोमीटर लंबा नेटवर्क और पंपिंग स्टेशन की योजना
तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के तहत हरियाणा स्थित मुनाक रेगुलेटर से लेकर दिल्ली के हैदरपुर जल शोधन संयंत्र तक लगभग 100 किलोमीटर लंबी भूमिगत या समानांतर पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस पूरे नेटवर्क की जल वहन क्षमता 1,050 क्यूसेक निर्धारित की गई है। पानी के निरंतर प्रवाह को बनाए रखने के लिए रास्ते में आधुनिक पंपिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना भी इसमें शामिल की गई है। पूरी परियोजना के तकनीकी पहलुओं, उपयुक्त मार्ग और व्यावहारिक व्यवहार्यता का बारीकी से अध्ययन करने का जिम्मा आईआईटी-रुड़की को सौंपा गया है।
दो तकनीकी विकल्पों में से किफायती मॉडल को प्राथमिकता
परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करते समय तकनीकी विशेषज्ञों ने दो अलग-अलग इंजीनियरिंग मॉडल पेश किए थे। पहले मॉडल में पूरी तरह ढलान पर आधारित यानी गुरुत्वाकर्षण प्रवाह तंत्र का सुझाव था, जिस पर करीब ₹13,000 करोड़ का भारी खर्च आने का अनुमान लगाया गया था। वहीं दूसरा मॉडल पंपिंग स्टेशनों के जरिए पानी आगे बढ़ाने वाला प्रेशर-फ्लो सिस्टम था, जिसके निर्माण पर लगभग ₹7,240 करोड़ की लागत आंकी गई। जल बोर्ड के योजना प्रकोष्ठ ने लागत और निर्माण की सुगमता को देखते हुए दूसरे यानी प्रेशर-फ्लो सिस्टम को कहीं अधिक व्यावहारिक माना है। इसी वजह से तकनीकी संस्थान को अब ₹7,240 करोड़ वाले विकल्प के विस्तृत डिजाइन पर काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
ऊर्जा की बचत के लिए सौर ऊर्जा का परीक्षण
पंपिंग स्टेशनों के संचालन में आने वाले भारी-भरकम बिजली बिल को नियंत्रित करने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपिंग सिस्टम की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है। आईआईटी-रुड़की को परियोजना का संपूर्ण वित्तीय खाका, इंजीनियरिंग डिजाइन और सटीक रूट मैप नवंबर तक प्रस्तुत करने को कहा गया है। यह विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट मिलते ही वित्तीय मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
पुरानी मुनक नहर का इतिहास और आपूर्ति की सीमाएं
दिल्ली और हरियाणा की सरकारों ने राजधानी तक पानी पहुंचाने के मकसद से वर्ष 1996 में एक संयुक्त समझौता किया था। हालांकि आपसी विवादों और निर्माण संबंधी बाधाओं के चलते इस योजना में काफी विलंब हुआ। मुनक नहर का निर्माण कार्य वर्ष 2003 में शुरू होकर वर्ष 2012 तक चला, जब इसकी आंतरिक पक्की लाइनिंग का काम पूरा हुआ। यह नहर करनाल जिले के मुनाक रेगुलेटर से निकलती है और दो अलग-अलग वाहिकाओं सीएलसी (कैरियर लाइंड चैनल) और डीएसबी (दिल्ली सब-ब्रांच) के जरिए यमुना का 1,000 क्यूसेक से अधिक पानी हैदरपुर तक लाती है। लंबी दूरी, तलछट जमा होने और लगातार बढ़ते शहरीकरण के कारण इस पुरानी नहर की मौजूदा क्षमता दिल्ली की कुल जरूरतें पूरी करने के लिए नाकाफी साबित हो रही है, जिसके चलते इस नई समानांतर पाइपलाइन की आवश्यकता महसूस की गई है।

















