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टोंक फर्जी रजिस्ट्री: हाईकोर्ट ने कलेक्टर टीना डाबी को लगाई फटकार, एक दिन में रजिस्ट्री-म्यूटेशन पर उठे गंभीर सवालराजस्थान
21 जून 2026, 11:56 am (45 दिन पहले)· 2

टोंक फर्जी रजिस्ट्री: हाईकोर्ट ने कलेक्टर टीना डाबी को लगाई फटकार, एक दिन में रजिस्ट्री-म्यूटेशन पर उठे गंभीर सवाल

राजस्थान हाईकोर्ट ने टोंक के एक फर्जी जमीन रजिस्ट्री मामले में कलेक्टर टीना डाबी को तलब किया और अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। एक ही दिन में रजिस्ट्री और म्यूटेशन होने तथा दो जांच रिपोर्टों में विरोधाभास पर कोर्ट ने कड़े सवाल उठाए।

राजस्थान के टोंक जिले में जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का एक मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। इस केस में प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता पर अदालत ने कड़े सवाल उठाए हैं और जिला कलेक्टर को सीधे जवाबदेह बनाया है।

जस्टिस रवि चिरानिया की अदालत में सुनवाई

यह पूरा मामला जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ के सामने आया। कोतवाली थाने में दर्ज इस फर्जी रजिस्ट्री केस में आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। उसी सुनवाई के दौरान कोर्ट को इस मामले की पूरी गंभीरता का अहसास हुआ। अदालत ने देखा कि जिस तरह से यह फर्जीवाड़ा हुआ, उसमें प्रशासन और पुलिस दोनों की भूमिका संदेह के घेरे में है।

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टीना डाबी को VC पर पेश होना पड़ा, कड़े सवालों का सामना

19 जून को टोंक जिला कलेक्टर टीना डाबी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट में पेश हुईं। कोर्ट ने उनसे सीधे पूछा कि कोतवाली थाने में दर्ज इस फर्जी रजिस्ट्री मामले में प्रशासन ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं। जिन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल खेला गया, उनके खिलाफ विभागीय या कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने साफ कर दिया कि कागजी जवाब नहीं चलेगा, बल्कि उठाए गए ठोस कदमों की रिपोर्ट पेश करनी होगी।

कलेक्टर का खुलासा: एक दिन में रजिस्ट्री और म्यूटेशन दोनों

हाईकोर्ट की सख्त पूछताछ के बाद टीना डाबी ने अदालत को बताया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में स्थानीय सरपंच, पटवारी और सब-रजिस्ट्रार (उप-पंजीयक) तीनों की भूमिका संदिग्ध है। जो बात सबसे ज्यादा चौंकाने वाली रही वो यह थी कि इस मामले में जमीन की रजिस्ट्री और उसका नामांतरण (म्यूटेशन) दोनों महज एक ही दिन के भीतर हो गए। आम तौर पर ये दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग समय में पूरी होती हैं और इनमें कई दिनों से लेकर हफ्तों का वक्त लग सकता है। इस असाधारण तेजी को हाईकोर्ट ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और सुनियोजित मिलीभगत का साफ सबूत बताया।

दो जांच रिपोर्टें, दो अलग कहानियां

सुनवाई के दौरान एक और परेशान करने वाला तथ्य सामने आया। एडीएम (बीसलपुर) ने जो प्रशासनिक जांच रिपोर्ट तैयार की और पुलिस ने जो रिपोर्ट दाखिल की, उन दोनों में जमीन-आसमान का फर्क था। एक ही घटना पर दो सरकारी विभाग बिल्कुल अलग-अलग बातें कह रहे थे। हाईकोर्ट ने इस विरोधाभास पर कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्टीकरण की मांग की। यह साफ था कि कोर्ट इस मामले की तह तक पहुंचना चाहता है।

भू-माफिया की साठगांठ के सबूत पेश

परिवादी रामधन चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवेंद्र कुंतल ने पैरवी की। उन्होंने हाईकोर्ट के सामने ऐसे दस्तावेज और सबूत पेश किए जो भू-माफियाओं और सरकारी अधिकारियों के बीच की गहरी साठगांठ को उजागर करते हैं। इन सबूतों ने मामले को और गंभीर बना दिया। हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है और यह आदेश 22 जून को सुनाया जाएगा। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद टोंक के राजस्व विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

सवाल-जवाब

टोंक फर्जी रजिस्ट्री मामला क्या है?
टोंक के कोतवाली थाने में एक फर्जी जमीन रजिस्ट्री का मामला दर्ज है जिसमें सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप है, और यह मामला आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के सामने आया।
हाईकोर्ट ने कलेक्टर टीना डाबी को क्यों तलब किया?
हाईकोर्ट ने टीना डाबी को 19 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बुलाकर पूछा कि फर्जी रजिस्ट्री में शामिल सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक क्या विभागीय या कानूनी कार्रवाई की गई है।
एक ही दिन में रजिस्ट्री और म्यूटेशन होना इतना गंभीर क्यों है?
जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण (म्यूटेशन) आम तौर पर अलग-अलग समय पर होती हैं और इनमें काफी वक्त लगता है, इसलिए दोनों का एक ही दिन में होना बड़ी मिलीभगत और भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है।
कलेक्टर ने किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी?
कलेक्टर टीना डाबी ने अदालत में स्वीकार किया कि इस फर्जीवाड़े में स्थानीय सरपंच, पटवारी और सब-रजिस्ट्रार (उप-पंजीयक) तीनों की भूमिका संदिग्ध है।
दो जांच रिपोर्टों में क्या विरोधाभास था?
एडीएम (बीसलपुर) की प्रशासनिक जांच रिपोर्ट और पुलिस की रिपोर्ट एक ही मामले में बिल्कुल अलग-अलग बातें कह रही थीं, जिस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्टीकरण मांगा।
परिवादी की ओर से कौन पेश हुए और क्या सबूत दिए?
परिवादी रामधन चौधरी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रवेंद्र कुंतल ने अदालत में भू-माफियाओं और सरकारी अधिकारियों के बीच की साठगांठ के सबूत पेश किए।
आरोपियों की अग्रिम जमानत पर फैसला कब आएगा?
हाईकोर्ट ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है और 22 जून को आदेश सुनाया जाएगा।
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