त्योहारी सीजन दस्तक देते ही बिलासपुर के आभूषण दुकानों में ग्राहकों की भारी आवाजाही शुरू हो चुकी है। हाल के दिनों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में दर्ज की गई नरमी ने खरीदारों के मनोबल को काफी मजबूत किया है। आभूषण प्रेमी और निवेशक सुबह के समय से ही दुकानों का रुख कर रहे हैं, ताकि त्योहारी मांग बढ़ने से पहले अपने पसंदीदा जेवर, सिक्के और बर्तन चुन सकें। बाजार में इस वक्त दस ग्राम सोने का लेनदेन 1,41,800 रुपये पर दर्ज किया गया, जबकि चांदी प्रति दस ग्राम 1,850 रुपये के स्तर पर बिक रही है। हालिया गिरावट से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो शादियों अथवा त्योहारों के लिए जेवरात खरीदने की योजना बना रहे थे।
हालिया मंदी से ग्राहकों के लिए बना बेहतरीन अवसर
कीमती धातुओं के बाजार में आई तेज गिरावट ने आम खरीदारों के चेहरे पर चमक ला दी है। छत्तीसगढ़ सराफा संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी के अनुसार, हाल के दिनों में सोने की कीमत में लगभग दस हजार रुपये की कमी देखी गई है, जबकि चांदी के दामों में तीस से चालीस हजार रुपये तक का बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। इस भारी गिरावट के चलते ग्राहकों के लिए अपनी जरूरत के आभूषण और पूजन सामग्री खरीदने का एक अनुकूल माहौल तैयार हुआ है।
पुष्य नक्षत्र के शुभ अवसर पर भी बाजार में ग्राहकों की जोरदार मौजूदगी देखी गई थी। व्यापारियों का मानना है कि अब धनतेरस और दीपावली के मुख्य दिनों तक यह हलचल लगातार बढ़ती जाएगी। जिन लोगों ने कीमतों के आसमान छूने के डर से अपनी खरीदारी रोक रखी थी, वे अब इस मंदी का पूरा लाभ उठाने के लिए दुकानों में पहुंच रहे हैं।
वैश्विक समीकरणों पर टिकी है कीमतों की भावी दिशा
बाजार में आने वाले ग्राहकों के जेहन में यह सवाल सबसे आम है कि क्या उन्हें अभी खरीदारी पूरी कर लेनी चाहिए या आने वाले दिनों में दामों में और कटौती देखने को मिलेगी। इस असमंजस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कमल सोनी ने समझाया कि दोनों बहुमूल्य धातुओं की दरें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात, भू-राजनीतिक उठापटक और वैश्विक मांग पर आधारित होती हैं। इन वैश्विक परिस्थितियों के लगातार बदलते रहने की वजह से किसी भी व्यक्ति के लिए भविष्य की दरों का सटीक पूर्वानुमान लगाना बेहद कठिन है।
बाजार का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जब दरें गिरती हैं, तो लोग इसे बचत का मौका समझकर आभूषण खरीदते हैं। वहीं दूसरी तरफ, जब कीमतों में तेज उछाल आता है, तब आगे और महंगे होने के डर से ग्राहक बाजार का रुख करते हैं। इस तरह त्योहारी उमंग में खरीदारी का यह क्रम दोनों ही स्थितियों में सक्रिय रहता है।
धनतेरस की भीड़ से बचने के लिए अग्रिम बुकिंग का सहारा
परंपरागत रूप से धनतेरस के दिन नए आभूषण और सिक्के खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसके कारण सराफा प्रतिष्ठानों पर उस दिन अत्यधिक भीड़ उमड़ती है। इस असुविधा से बचने के लिए कई जागरूक परिवार पहले से ही अपनी पसंद के जेवरात चुनकर बुकिंग करवा रहे हैं।
कमल सोनी ने स्पष्ट किया कि ग्राहक वर्तमान भाव पर अग्रिम बुकिंग कराकर अपनी पसंद सुरक्षित कर सकते हैं और धनतेरस के पावन दिन सिर्फ डिलीवरी ले सकते हैं। इससे उन्हें मौजूदा मंदी का पूरा वित्तीय लाभ भी मिल जाता है और त्योहारी दिन की आपाधापी से भी छुटकारा मिल जाता है। हालांकि, कई परिवार ऐसे भी हैं जो परंपरा के अनुसार शुभ मुहूर्त के समय ही प्रत्यक्ष खरीदारी करना पसंद करते हैं, जिसके चलते व्यापारियों ने दोनों ही तरह के ग्राहकों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने कारोबार का अनुमान
बीते साल सोने और चांदी के रिकॉर्ड स्तर छूने के बावजूद ग्राहकों ने जमकर खरीदारी की थी, क्योंकि लोगों को आशंका थी कि भविष्य में दरें और अधिक बढ़ सकती हैं। इस बार स्थिति काफी अलग और अनुकूल है, क्योंकि कीमतों में दर्ज की गई उल्लेखनीय राहत के बाद त्योहारी उल्लास चरम पर है।
व्यापारिक प्रतिनिधियों का आंकलन है कि बिलासपुर के सराफा बाजार में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में करीब दोगुनी रौनक और व्यापारिक लेन-देन देखने को मिल सकता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से आ रहे खरीदार अपनी बचत को सोने के कंगन, चेन, अंगूठियों और चांदी के देवी-देवताओं की मूर्तियों में लगा रहे हैं।
आभूषणों की प्रामाणिकता और बिलिंग के आवश्यक नियम
जेवर खरीदते समय केवल डिजाइन और छूट पर ध्यान देने के बजाय उनकी शुद्धता और वैधानिक प्रमाणों को जांचना अत्यंत जरूरी है। आभूषणों की खरीदारी को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ बुनियादी मानकों की पड़ताल करना हर ग्राहक के लिए अनिवार्य होना चाहिए।
- हॉलमार्क और HUID की जांच: सोने के प्रत्येक जेवर पर भारतीय मानक ब्यूरो का हॉलमार्क और छह अंकों का विशिष्ट पहचान कोड यानी HUID अंकित होना चाहिए, जो धातु की शत-प्रतिशत शुद्धता की गारंटी देता है।
- पक्का चालान अथवा इनवॉइस: लेनदेन पूरा होने पर विक्रेता से हमेशा विधिवत मुद्रित पक्का बिल प्राप्त करें, जो भविष्य में आभूषण बदलने या बेचने के समय सबसे पुख्ता प्रमाण बनता है।
- मेकिंग चार्ज और कुल भार का विवरण: बिल में आभूषण का कुल वजन, उस दिन लागू सोने की सटीक दर और जेवर गढ़ाई पर लगने वाले शुल्क का अलग-अलग और स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक है।
- जीएसटी का स्पष्ट लेखा-जोखा: बिल पर वस्तु एवं सेवा कर की गणना नियमानुसार दर्शाई गई हो, ताकि लेन-देन पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी दायरे में रहे।
कमल सोनी ने जोर देकर कहा कि जिस तरह दीपावली के अवसर पर आतिशबाजी चलाते समय सावधानी बरती जाती है, ठीक उसी तरह अपनी गाढ़ी कमाई को सोने-चांदी में निवेश करते समय भी पूरी सतर्कता रखनी चाहिए।



















