दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के बीच नितिन नवीन का विपक्ष पर बड़ा हमला, विदेशी ताकतों के इशारे पर अशांति फैलाने का लगाया आरोपबस्तर के जगदलपुर में कांतारा फिल्म की तर्ज पर सजा अनोखा दुर्गा पंडाल, बांस की कारीगरी बनी मुख्य आकर्षणगुजरात पुलिस भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को लिखित परीक्षा से राहत, डिप्टी सीएम हर्ष संघवी की घोषणाअहमदाबाद में नवरात्र उत्सव पर सख्त पहरा, 14,000 जवान और आधुनिक निगरानी तकनीक तैनातउपवास के दिनों में कमजोरी दूर भगाएंगे मेवों से बने चूरमा लड्डू, जानिए आसान विधि और फायदेबीकानेर की पुगल रोड पर सजीं मां दुर्गा की मनमोहक मूर्तियां, बालोतरा के कारीगरों को मिल रहे अच्छे दामपुलिस हिरासत में बंद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके की दादी का पैतृक गांव में देहांतचाय के ठेले पर हाथ बंटाने वाले रांची के अंकित मिश्रा बने गजेटेड अफसर, यूपीएससी सीएपीएफ में पाई 236वीं रैंकवैश्विक बाजार में छा रहा मिथिला मखाना, पांच वर्षों में 30 हजार मीट्रिक टन विदेशी बिक्री की तैयारीदीदारगंज में युवक की गोली मारकर हत्या के बाद भड़का गुस्सा, शव रखकर राष्ट्रीय राजमार्ग किया जाम
वेतन न मिलने से अलवर के तीन सरकारी अस्पतालों में सफाईकर्मियों का कार्य बहिष्कार, गंदगी से मरीज परेशानराजस्थान
10 अक्तू॰ 2026, 2:09 pm (2 घंटे पहले)· 0

वेतन न मिलने से अलवर के तीन सरकारी अस्पतालों में सफाईकर्मियों का कार्य बहिष्कार, गंदगी से मरीज परेशान

अलवर के तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मानदेय भुगतान में देरी के विरोध में सफाई कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे चिकित्सा परिसरों में स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है।

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित तीन प्रमुख सरकारी चिकित्सालयों में सफाई व्यवस्था शनिवार से पूरी तरह ठप हो गई है। पारिश्रमिक के समय पर भुगतान न होने से आक्रोशित संविदा सफाई कर्मचारियों ने काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुन लिया है। इस कार्य बहिष्कार का सीधा असर राजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय तथा गीतानंद शिशु चिकित्सालय में देखने को मिल रहा है। वार्डों, गलियारों और परिसर में कचरा जमा होने लगा है, जिसके कारण वहां भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी असुविधा व संक्रमण के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, वे अपने काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

वेतन में लगातार देरी और आर्थिक संकट

आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि तय व्यवस्था और नियमों के मुताबिक प्रत्येक माह की 7 तारीख तक उनके बैंक खातों में वेतन जमा हो जाना चाहिए। इसके विपरीत, लंबे समय से भुगतान में निरंतर विलंब किया जा रहा है। कई बार महीने की 10 तारीख बीत जाने के बाद भी पैसा नहीं आता और कई दफा कर्मचारियों को इससे भी अधिक दिनों तक अपने पारिश्रमिक की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें प्रतिमाह केवल 6 से 7 हजार रुपये का अल्प वेतन मिलता है। आज की महंगाई में इतनी सीमित राशि से पूरे परिवार का भरण-पोषण करना पहले से ही एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। जब इस मामूली रकम के मिलने में भी अनिश्चितता बनी रहती है, तो उनके घरों में राशन, बच्चों की पढ़ाई और अन्य आवश्यक खर्चों का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। अस्पतालों के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों को स्वच्छ रखने की कठिन जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उन्हें अपने पसीने की कमाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

ये भी पढ़ें

ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल और स्थायी समाधान की मांग

सफाई कर्मियों ने इस पूरी अव्यवस्था के लिए संबंधित ठेकेदार की मनमानी कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया है। कर्मचारियों का आरोप है कि समय पर भुगतान न मिलने का मुद्दा बार-बार अधिकारियों और प्रबंधन के संज्ञान में लाया गया, मगर हर बार केवल अस्थायी दिलासा देकर मामले को टाल दिया जाता है और कोई दीर्घकालिक व्यवस्था नहीं बनाई जाती। प्रदर्शनकारी कर्मियों ने मांग रखी है कि मासिक भुगतान चक्र को पारदर्शी और नियमित किया जाए तथा ठेकेदार की मनमानी पर सख्त प्रशासनिक नियंत्रण लगाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लिखित आश्वासन और पुख्ता व्यवस्था नहीं मिलती, कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य केंद्रों के हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।

पहले भी हो चुका है आंदोलन, संवेदनशील वार्डों पर मंडराया संकट

अलवर के इन सरकारी अस्पतालों में वेतन भुगतान की विसंगतियों को लेकर सफाई कर्मचारियों द्वारा काम रोके जाने की यह पहली घटना नहीं है। पूर्व में भी कर्मचारियों ने ऐसे ही हालातों के चलते प्रदर्शन और हड़ताल का सहारा लिया था। उस समय भी प्रशासन ने नियमित भुगतान का वादा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां नहीं बदलीं। एक बार फिर काम बंद होने से सामान्य अस्पताल के साथ-साथ महिला चिकित्सालय और शिशु चिकित्सालय जैसे बेहद संवेदनशील केंद्रों में स्वच्छता व्यवस्था संकट में आ गई है। नवजात बच्चों और प्रसूताओं के वार्डों में निरंतर साफ-सफाई अत्यंत जरूरी होती है, ऐसे में वहां गंदगी फैलने से संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। अब स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं कि वे इस समस्या का निस्तारण कब तक करते हैं।

सवाल-जवाब

अलवर के किन अस्पतालों में सफाईकर्मियों ने हड़ताल की है?
राजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय, महिला चिकित्सालय और गीतानंद शिशु चिकित्सालय में सफाई कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया है।
सफाई कर्मचारी हड़ताल पर क्यों गए हैं?
कर्मचारियों को निर्धारित 7 तारीख तक मासिक वेतन नहीं मिल रहा है और भुगतान में लगातार देरी हो रही है।
सफाई कर्मचारियों को प्रतिमाह कितना वेतन मिलता है?
सफाई कर्मचारियों को हर महीने केवल 6 से 7 हजार रुपये का वेतन मिलता है।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
कर्मचारियों की मांग है कि वेतन भुगतान में हो रही देरी तुरंत रोकी जाए और ठेकेदार की मनमानी पर स्थायी रोक लगाई जाए।
हड़ताल से अस्पतालों की व्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है?
अस्पतालों के वार्डों में कचरा और गंदगी जमा होने लगी है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी और संक्रमण का खतरा हो रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp