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चाय के ठेले पर हाथ बंटाने वाले रांची के अंकित मिश्रा बने गजेटेड अफसर, यूपीएससी सीएपीएफ में पाई 236वीं रैंकझारखंड
10 अक्तू॰ 2026, 4:06 pm (1 घंटे पहले)· 0

चाय के ठेले पर हाथ बंटाने वाले रांची के अंकित मिश्रा बने गजेटेड अफसर, यूपीएससी सीएपीएफ में पाई 236वीं रैंक

रांची के रहने वाले 23 वर्षीय अंकित मिश्रा ने पारिवारिक गरीबी, पिता की नौकरी जाने के बाद चाय का ठेला लगाने और रिश्तेदारों की उपेक्षा को अपनी ताकत बनाकर यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा 2025 में 236वीं रैंक हासिल की है.

कठिन परिस्थितियों और सीमित साधनों के बावजूद अगर मन में दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है. झारखंड के रांची के रहने वाले 23 साल के अंकित मिश्रा ने इस बात को पूरी तरह साबित कर दिखाया है. आर्थिक तंगी, कच्चे मकान में गुजर-बसर, पिता की नौकरी छूटने के बाद चाय की दुकान लगाने की मजबूरी और रिश्तेदारों के तीखे व्यवहार के बीच उन्होंने अपनी लगन को कमजोर नहीं पड़ने दिया. संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 236वीं रैंक लाकर अंकित ने क्लास-1 गजेटेड अफसर बनने की उपलब्धि हासिल की है.

गरीबी के बीच बीता बचपन और स्कूली शिक्षा की चुनौती

अंकित मिश्रा का बचपन बेहद साधारण और अभावों से घिरे माहौल में बीता. उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि उनके पास रहने के लिए अपना पक्का मकान तक नहीं था. उनके पिता एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक के तौर पर पढ़ाते थे, जिससे मिलने वाली मामूली आमदनी से किसी तरह घर का खर्च चलता था. इन तमाम मुश्किलों के बीच भी अंकित ने कभी अपनी पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया. वे शुरू से ही मेधावी छात्र रहे और 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में पूरे जिले में अव्वल आए. इसके बाद जब उनका दाखिला अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में हुआ, तो भाषा और नए माहौल के साथ सामंजस्य बिठाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया. हालांकि, अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने 11वीं और 12वीं में भी शानदार अंक हासिल किए और यह दिखा दिया कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती.

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रिश्तेदार की शादी का बहिष्कार बना जीवन का निर्णायक मोड़

हर सफल व्यक्ति के जीवन में कोई ऐसा अनुभव जरूर आता है जो उसकी दिशा बदल देता है. अंकित के साथ भी ऐसा ही एक वाकया पेश आया. परिवार की कमजोर माली हालत और चाय बेचने के काम को देखकर एक रिश्तेदार ने उन्हें और उनके माता-पिता को शादी के समारोह में आमंत्रित तक नहीं किया. इस उपेक्षा और अपमानजनक व्यवहार ने अंकित के मन को भीतर तक झकझोर दिया. उसी दिन उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे समाज के इस संकीर्ण नजरिए को अपनी मेहनत और सफलता से बदलकर दिखाएंगे. यह टीस उनके भीतर एक गहरी जिद बन गई, जिसने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की कठिन राह पर आगे बढ़ने का अटूट हौसला दिया.

कोविड काल का संकट और जिम्मेदारियों का बोझ

साल 2020 में जब कोरोना महामारी का दौर शुरू हुआ, तो देश भर के कई परिवारों की तरह अंकित के परिवार पर भी बड़ा आर्थिक संकट टूट पड़ा. उनके पिता की प्राइवेट स्कूल वाली नौकरी छूट गई, जिससे घर का चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया. ऐसे नाजुक मोड़ पर अंकित ने खुद को बिखरने नहीं दिया. उन्होंने घर-घर जाकर छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया ताकि परिवार को सहारा मिल सके. ट्यूशन से होने वाली छोटी-छोटी बचत से उन्होंने अपने पिता को चाय का ठेला लगाने में भी मदद की. वे खुद भी दुकान के कामकाज में हाथ बंटाते और बचे हुए समय में अपनी पढ़ाई को पूरी निष्ठा से जारी रखते. एक तरफ घर चलाने की फिक्र और दूसरी तरफ अपनी पढ़ाई का तालमेल बिठाना बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन वे पीछे नहीं हटे.

दिल्ली का सफर, नाकामी से सीख और अंतिम सफलता

कालेज की पढ़ाई पूरी करने के दौरान जहां अधिकांश युवा मौज-मस्ती और दोस्तों के साथ समय बिताने में व्यस्त रहते हैं, वहीं अंकित ने अनुशासन और संयम की राह चुनी. उन्होंने बाहरी दुनिया से दूरी बनाकर अपना पूरा ध्यान लक्ष्य पर केंद्रित कर दिया. इसके बाद वे आगे की तैयारी के लिए दिल्ली पहुंचे. बड़े और महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस भरने की क्षमता न होने के कारण उन्होंने पुराने नोट्स और चुनिंदा किताबों की मदद से अपनी रणनीति तैयार की. अपने पहले प्रयास में वे अंतिम चयन से महज 7 अंकों से चूक गए थे. इस नाकामी से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा. आखिरकार, अपनी शारीरिक और मानसिक चुनौतियों पर विजय पाते हुए उन्होंने 2025 की सीएपीएफ परीक्षा में ऑल इंडिया 236वीं रैंक हासिल की और महज 23 साल की आयु में राजपत्रित अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया.

सवाल-जवाब

अंकित मिश्रा ने कौन सी परीक्षा पास की है और उनकी रैंक क्या रही?
अंकित मिश्रा ने यूपीएससी सीएपीएफ 2025 परीक्षा में ऑल इंडिया 236वीं रैंक हासिल की है.
अंकित मिश्रा किस शहर के रहने वाले हैं?
अंकित मिश्रा झारखंड के रांची के रहने वाले हैं.
अंकित मिश्रा के जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट क्या था?
एक रिश्तेदार ने आर्थिक तंगी और चाय बेचने के कारण उनके परिवार को शादी में नहीं बुलाया था, जिसके अपमान ने उन्हें अफसर बनने की प्रेरणा दी.
कोविड-19 के दौरान अंकित के परिवार पर क्या संकट आया था?
साल 2020 में उनके पिता की प्राइवेट स्कूल शिक्षक की नौकरी चली गई थी, जिसके बाद अंकित ने ट्यूशन पढ़ाकर और चाय का ठेला लगाने में पिता की मदद की.
क्या अंकित मिश्रा ने पहले प्रयास में ही यह परीक्षा पास कर ली थी?
नहीं, वे अपने पहले प्रयास में फाइनल सिलेक्शन से महज 7 अंकों से चूक गए थे और बाद में 2025 की परीक्षा में सफल हुए.
अंकित मिश्रा ने परीक्षा की तैयारी के लिए किन साधनों का इस्तेमाल किया?
उन्होंने महंगे कोचिंग संस्थानों के बजाय पुराने नोट्स और सीमित किताबों के सहारे दिल्ली में रहकर अपनी रणनीति बनाई थी.
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 मिनट पहले

अंकित की मेहनत पर कोई शक नहीं है, लेकिन हर चीज़ के पीछे रिश्तेदारों के ताने या अपमान को ही वजह बताना थोड़ा फिल्मी लगता है। कभी-कभी इंसान सिर्फ अपने हालात बदलने के लिए भी पढ़ता है, हर बार किसी को गलत साबित करने की जिद जरूरी नहीं होती।

Ravikash Gupta@ravikash·16 मिनट पहले

अर्जुन जी, बात फिल्मी लग सकती है पर जब अपनों का व्यवहार ऐसा हो तो वह दिल पर लग ही जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 मिनट पहले

अपमान और गरीबी से लड़कर इस लड़के ने जो मुकाम हासिल किया है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। चाय के ठेले से लेकर गजेटेड अफसर बनने तक का सफर आसान नहीं रहा होगा, जिगर चाहिए ऐसे हालात बदलने के लिए।

Rohan Verma@rohan-verma·40 मिनट पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। हमारे मोहल्ले में भी एक लड़का चाय की दुकान पर बैठकर यूपीएससी की तैयारी करता था, आज वो भी डीएसपी है।

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