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46 साल से लापता है कालीघाट की देवी के जेवरों वाले लॉकर की चाबी, सबर्ण रॉय चौधरी परिवार पहुंचा अदालतधर्म
8 सित॰ 2026, 11:19 am (48 मिनट पहले)· 2

46 साल से लापता है कालीघाट की देवी के जेवरों वाले लॉकर की चाबी, सबर्ण रॉय चौधरी परिवार पहुंचा अदालत

कोलकाता के कालीघाट मंदिर में देवी के गहनों वाले बैंक लॉकर की चाबी 1980 से गायब बताई जा रही है। पुराने जमींदार सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने खजाने की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए अदालत में अर्जी दी है।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर के खजाने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के प्रबंधन पर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित घोटाले और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे हैं, जिसके बाद कोलकाता के पुराने जमींदार परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने जताई चिंता

कोलकाता के पूर्व जमींदार सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने मंदिर में रखे देवी के गहनों और कीमती सामान की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। परिवार का दावा है कि मंदिर के जेवरात और बहुमूल्य वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए एक सरकारी बैंक में खास लॉकर बनाया गया था, लेकिन उसकी चाबी बीते 46 साल से किसी को नहीं मिल रही। यह चाबी साल 1980 से गायब बताई जा रही है। आरोप के मुताबिक मंदिर का यह खजाना करीब 100 करोड़ रुपये का आंका जाता है, जिसकी सुरक्षा को लेकर परिवार बेहद चिंतित है। इन्हीं आरोपों के आधार पर परिवार ने अदालत में कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की है।

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परिवार परिषद के सचिव का दावा

सबर्ण रॉय चौधरी फैमिली काउंसिल के सचिव देवर्षि रॉय चौधरी ने बताया कि यह लॉकर खासतौर पर मंदिर की संपत्ति और देवी के गहनों को सुरक्षित रखने के मकसद से बनवाया गया था। लेकिन पिछले करीब चार दशकों से इस लॉकर की चाबी का कहीं कोई पता नहीं चल पाया है। उन्होंने अदालत के सामने सीधा सवाल रखा है कि आखिर देवी के ये कीमती जेवर और सामान इस वक्त कहां रखे हैं और क्या वे वाकई सुरक्षित हालत में हैं। परिवार ने इस पूरे मसले पर लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है।

संपत्ति की निगरानी करने वाली समिति पर भी सवाल

परिवार ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मंदिर की संपत्तियों और खजाने का हिसाब-किताब रखने के लिए बनी समिति का कार्यकाल भी अब खत्म हो चुका है। इसके बावजूद मंदिर के कामकाज और संपत्ति प्रबंधन को लेकर कोई नई व्यवस्था सामने नहीं आई है। सबर्ण रॉय चौधरी परिवार लंबे समय से कालीघाट मंदिर की संपत्तियों और खजाने की स्थिति को लेकर सवाल उठाता आ रहा है, और अब उन्होंने इसे औपचारिक रूप से अदालत के सामने रखा है कि आखिर इतने वर्षों से गहनों का कोई हिसाब क्यों नहीं दिया गया।

कालीघाट मंदिर का धार्मिक महत्व

कालीघाट मंदिर पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में आदि गंगा नदी के किनारे स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र हिंदू मंदिर है। इसे माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहीं माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा और उंगलियां गिरी थीं। मंदिर में मौजूद मां काली की प्रतिमा भी अनोखी है, जिसमें उनकी लंबी सोने की जीभ बनी हुई है। यही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व इस मंदिर के खजाने को और भी अनमोल बना देता है, जिससे उसकी सुरक्षा को लेकर उठे सवाल और गंभीर हो जाते हैं।

अब आगे क्या

फिलहाल इस पूरे विवाद में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह पूरी तरह अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा। सबर्ण रॉय चौधरी परिवार की मांग है कि गायब चाबी, देवी के गहनों की मौजूदा स्थिति और समिति के कार्यकाल को लेकर जल्द से जल्द स्पष्ट जवाब दिए जाएं।

सवाल-जवाब

कालीघाट मंदिर के लॉकर की चाबी कब से गायब है?
आरोप के मुताबिक यह चाबी साल 1980 से गायब है, यानी 46 साल से ज्यादा समय से इसका पता नहीं चल पाया है।
यह मामला अदालत तक कैसे पहुंचा?
कोलकाता के पुराने जमींदार सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने मंदिर के खजाने की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में अर्जी और लिखित शिकायत दी है।
परिवार का मुख्य आरोप क्या है?
परिवार का आरोप है कि देवी के गहनों के लिए बने बैंक लॉकर की चाबी दशकों से गायब है और मंदिर प्रबंधन में 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितता की आशंका है।
सबर्ण रॉय चौधरी फैमिली काउंसिल के सचिव कौन हैं?
देवर्षि रॉय चौधरी सबर्ण रॉय चौधरी फैमिली काउंसिल के सचिव हैं, जिन्होंने यह दावा किया है।
मंदिर की संपत्ति की निगरानी करने वाली समिति को लेकर क्या आरोप है?
परिवार का कहना है कि मंदिर की संपत्तियों का हिसाब रखने वाली समिति का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है।
कालीघाट मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?
यह मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और यहां मां काली की प्रतिमा में लंबी सोने की जीभ है।
आगे क्या होगा?
आगे की कार्रवाई पूरी तरह अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी।
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