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बरसाना नहीं, मथुरा के इस गांव में जन्मी थीं राधा रानी, कमल कुंड आज भी गवाह हैधर्म
6 जुल॰ 2026, 10:15 am (41 दिन पहले)· 2

बरसाना नहीं, मथुरा के इस गांव में जन्मी थीं राधा रानी, कमल कुंड आज भी गवाह है

राधा रानी को सदियों से बरसाने वाली के नाम से जाना जाता है, लेकिन मान्यता है कि उनका असली जन्म मथुरा के रावल गांव के कमल कुंड में हुआ था, जो आज भी मौजूद है।

राधा रानी का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के ज़ेहन में बरसाना गांव उभर आता है, क्योंकि उन्हें सदियों से बरसाने वाली के नाम से पुकारा जाता रहा है। लेकिन ब्रज क्षेत्र में एक अलग मान्यता प्रचलित है, जिसके मुताबिक राधा रानी का असली जन्म बरसाना में नहीं बल्कि मथुरा के रावल गांव में हुआ था। भगवान श्री कृष्ण के मथुरा में जन्म को लेकर तो कोई विवाद नहीं है, लेकिन राधा रानी की जन्मस्थली को लेकर वर्षों से अलग अलग दावे किए जाते रहे हैं। रावल गांव में मौजूद कमल कुंड इसी मान्यता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है और यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

कमल कुंड आज भी मौजूद, हुआ जीर्णोद्धार

जिस कुंड और कमल के फूल से राधा रानी के जन्म की कथा जुड़ी है, वह कुंड आज भी रावल गांव में मौजूद है। समय के साथ इस कुंड का जीर्णोद्धार कराया गया और इसे आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया गया, ताकि लोग यहां आकर राधा रानी के जन्म से जुड़ी कथा को करीब से जान और महसूस कर सकें। खास बात यह है कि इस कमल कुंड में आज भी हजारों कमल के फूल खिले हुए नजर आते हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को मानो द्वापर युग जीवंत होता महसूस होता है। कहा जाता है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग ही आनंद और शांति का अनुभव करता है। भक्ति में डूबकर लोग राधा नाम का जाप करते हुए अपनी सुधबुध तक खो बैठते हैं, ऐसा यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं।

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मां कीर्ति को कमल पुष्प में मिली थीं राधा रानी

मान्यता के अनुसार यह कमल कुंड द्वापर युग का बताया जाता है। कथा के मुताबिक मां कीर्ति हर दिन इसी कुंड में स्नान करने आया करती थीं। उस दौर में यमुना जी का किनारा सीधे इसी कुंड से होकर गुजरता था, यानी कुंड और यमुना बिल्कुल सटे हुए थे। एक दिन मां कीर्ति स्नान के बाद जब वापस लौटने लगीं, तभी उनके हाथों से एक कमल का फूल टकरा गया। जैसे ही उन्होंने उस कमल पुष्प को अपने हाथों में उठाकर देखा, फूल की पंखुड़ियां अपने आप खुल गईं। पंखुड़ियों के खुलते ही उसमें से एक सुंदर सी कन्या खिलखिलाकर हंस पड़ी। मां कीर्ति की तब तक कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने उस कन्या को खुशी खुशी अपनी बेटी के रूप में अपना लिया। यही वजह है कि राधा रानी को आज भी मां कीर्ति की पुत्री के रूप में जाना जाता है।

स्थानीय लोगों की मान्यता, हर दिन आते हैं दर्शनार्थी

मथुरा से रावल गांव दर्शन करने पहुंचे कृष्णा चौहान नाम के एक युवक ने बताया कि राधा रानी की असली जन्मस्थली रावल गांव ही है। उनके मुताबिक यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और रावल गांव को राधा रानी की जन्मस्थली के तौर पर ही जाना जाता है। कृष्णा चौहान ने बताया कि मां कीर्ति यमुना में रोज स्नान के लिए आया करती थीं और उसी दौरान उन्हें कमल पुष्प से राधा रानी की प्राप्ति हुई थी। उनका कहना है कि यहां आकर मन को गहरी शांति मिलती है और सारी चिंताएं अपने आप दूर हो जाती हैं।

यमुना किनारे आज भी जिंदा हैं द्वापर की यादें

राधा रानी का यह पौराणिक कुंड आज भी उनके जन्म का साक्षी बना हुआ है। यमुना किनारे बना यह कुंड आज भी द्वापर युग की उस घटना की याद दिलाता है, जब मां कीर्ति को कमल पुष्प में राधा रानी मिली थीं। यही वजह है कि बरसाना के अलावा मथुरा का यह रावल गांव भी ब्रज की धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा में एक अहम पड़ाव बन चुका है, जहां श्रद्धालु राधा रानी की जन्मस्थली से जुड़ी इस अनोखी मान्यता के दर्शन करने पहुंचते हैं।

सवाल-जवाब

राधा रानी को बरसाने वाली क्यों कहा जाता है?
सदियों से राधा रानी को बरसाना गांव से जोड़ा जाता रहा है, इसलिए उन्हें बरसाने वाली के नाम से जाना जाता है।
राधा रानी का असली जन्म स्थान कौन सा माना जाता है?
मान्यता के अनुसार राधा रानी का असली जन्म मथुरा के रावल गांव के कमल कुंड में हुआ था, न कि बरसाना में।
कमल कुंड से जुड़ी कहानी क्या है?
मां कीर्ति यमुना में स्नान के लिए इसी कुंड में आती थीं, और वहीं उन्हें एक कमल पुष्प के भीतर राधा रानी मिली थीं।
क्या कमल कुंड आज भी मौजूद है?
हां, इस कुंड का जीर्णोद्धार कराकर इसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला गया है और यहां आज भी हजारों कमल के फूल खिले हुए हैं।
रावल गांव में हर दिन कितने श्रद्धालु आते हैं?
लेख के मुताबिक हर दिन हजारों श्रद्धालु रावल गांव के कमल कुंड के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
राधा रानी को मां कीर्ति की पुत्री क्यों कहा जाता है?
क्योंकि निःसंतान मां कीर्ति ने कमल पुष्प में मिली कन्या को खुशी-खुशी अपनी बेटी के रूप में अपनाया था, इसलिए राधा रानी उनकी पुत्री के रूप में जानी जाती हैं।
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