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बाड़मेर के इस मठ में मुस्लिम समुदाय भी झुकाता है शीश, भारत-पाकिस्तान में हैं मठ की 62 शाखाएंधर्म
29 जुल॰ 2026, 2:08 pm (46 दिन पहले)· 0

बाड़मेर के इस मठ में मुस्लिम समुदाय भी झुकाता है शीश, भारत-पाकिस्तान में हैं मठ की 62 शाखाएं

बाड़मेर के चंचल प्राग मठ में हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम समाज के लोग भी पूरी आस्था से माथा टेकते हैं, गुरु परंपरा की यह गद्दी भारत और पाकिस्तान में मिलाकर 62 शाखाओं तक फैली हुई है.

बाड़मेर जिले के चंचल प्राग मठ में सदियों से कुछ ऐसा होता आया है जो धर्म की तमाम सीमाओं को धता बताता है, यहां हिंदू श्रद्धालुओं के साथ-साथ मुस्लिम समाज के लोग भी पूरी आस्था के साथ माथा टेकने पहुंचते हैं. भारत के सीमांत इलाके में बसा यह मठ अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन चुका है, जिसकी जड़ें पाकिस्तान तक फैली हुई हैं और जिसने बरसों से दोनों मुल्कों के लोगों को एक ही गुरु परंपरा से जोड़ रखा है.

तप और चमत्कारों की परंपरा

बाड़मेर को लंबे समय से तप और साधना की धरती माना जाता रहा है. यहां कई संत हुए जिन्होंने अपनी तपस्या के बूते ऐसे काम कर दिखाए जिनके आगे आज भी लोग नतमस्तक होते हैं. कभी बादलों को बुलाकर सूखे इलाकों में बरसात करवाना, कभी किसी मृत प्राणी में जान फूंककर उसे नया जीवन देना, तो कभी गांव में लगातार हो रही मौतों के सिलसिले को रोक देना, ऐसी ही चमत्कारी घटनाओं से जुड़ी है चंचल प्राग मठ की स्थापना की कहानी, जो किसी धर्मगाथा जैसी सुनाई देती है. यह किस्से पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाए जाते रहे हैं और आज भी स्थानीय लोग मठ की स्थापना को इसी तपस्या की परंपरा से जोड़कर देखते हैं.

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गुरु पूर्णिमा पर उमड़ता आस्था का सैलाब

हर साल गुरु पूर्णिमा के मौके पर सुबह होते ही श्री चंचल प्राग मठ के बाहर श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं. आसपास के गांवों से ही नहीं बल्कि गुजरात, राजस्थान के दूसरे जिलों और सरहद से सटे इलाकों से भी बड़ी तादाद में लोग यहां पहुंचते हैं. भक्त गुरु गद्दी के सामने माथा टेककर परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की दुआ मांगते हैं. पूरे दिन भजन-कीर्तन और सत्संग का माहौल रहता है, साथ ही प्रसादी का वितरण भी होता है.

भारत-पाकिस्तान तक फैली 62 मठों की शृंखला

फिलहाल इस गद्दी की जिम्मेदारी महंत शेम्भूनाथ सैलानी संभाल रहे हैं, जबकि उनके शिष्य अभयनाथ महाराज यहां नियमित पूजा-अर्चना करते हैं. इस मठ की सबसे खास बात यह है कि यहां सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम परिवार भी पीढ़ियों से आस्था रखते आए हैं और गहरी आस्था के साथ मत्था टेकते हैं. यही परंपरा इसे धार्मिक एकता और भाईचारे की मिसाल बनाती है. आज भारत और पाकिस्तान में मिलाकर इस मठ की कुल 62 शाखाएं मौजूद हैं. स्थानीय लोगों में मान्यता है कि जो भी सच्चे दिल से यहां मुराद मांगता है, वह जरूर पूरी होती है. संतान सुख, अच्छी सेहत, कारोबार में तरक्की, खेती-किसानी और घर-परिवार की खुशहाली जैसी मनोकामनाएं लेकर लोग यहां आते हैं. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा मठ आकर प्रसाद चढ़ाते हैं और गुरु का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते, यह सिलसिला सिर्फ एक बार की हाजिरी तक सीमित नहीं बल्कि पीढ़ियों तक चलता है.

हर वर्ग को जोड़ने वाली कड़ी

यही वजह है कि सरहद के इस इलाके में चंचल प्राग मठ को अलग-अलग समुदायों को आपस में जोड़ने वाली एक अहम कड़ी माना जाता है. गुरु परंपरा की यह डोर पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है और आज भी हर वर्ग, हर समुदाय के लोग यहां बराबर आस्था के साथ आते हैं.

सवाल-जवाब

चंचल प्राग मठ कहां स्थित है?
यह राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित है.
इस मठ की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ माथा टेकते हैं, जिससे यह सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गया है.
मठ की कुल कितनी शाखाएं हैं और कहां-कहां फैली हैं?
भारत और पाकिस्तान में मिलाकर इस मठ की कुल 62 शाखाएं हैं.
वर्तमान में मठ की गद्दी कौन संभाल रहा है?
वर्तमान में महंत शेम्भूनाथ सैलानी गद्दी संभाल रहे हैं और उनके शिष्य अभयनाथ महाराज नियमित पूजा-अर्चना करते हैं.
यहां श्रद्धालु किस मौके पर सबसे ज्यादा पहुंचते हैं?
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर यहां सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है और सुबह से ही कतारें लग जाती हैं.
लोग यहां कौन सी मनोकामनाएं लेकर आते हैं?
संतान सुख, अच्छी सेहत, व्यापार में तरक्की, खेती-किसानी और परिवार की खुशहाली जैसी मनोकामनाएं लेकर श्रद्धालु यहां आते हैं.
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