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भागलपुर के सुल्तानगंज में साल भर बहेगी उत्तरवाहिनी गंगा, 165 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेगा घाटों का स्वरूपधर्म
31 जुल॰ 2026, 5:49 pm (1 दिन पहले)· 2

भागलपुर के सुल्तानगंज में साल भर बहेगी उत्तरवाहिनी गंगा, 165 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेगा घाटों का स्वरूप

बिहार के भागलपुर स्थित प्रसिद्ध सुल्तानगंज धाम में गंगा को 12 महीने उत्तरवाहिनी बनाए रखने के लिए 165 करोड़ रुपये की योजना पर काम जारी है, जिससे अगले साल तक श्रद्धालुओं को निरंतर पवित्र जल मिल सकेगा।

बिहार राज्य के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र भागलपुर स्थित सुल्तानगंज में आने वाले श्रद्धालुओं को जल्द ही एक बड़ी सुविधा मिलने वाली है। भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए सुल्तानगंज का विशेष महत्व है, क्योंकि यहां की पावन गंगा नदी में स्नान कर जल उठाना अत्यंत शुभ माना जाता है। अब तक यहां गंगा नदी केवल सावन और भादो के दो महीनों में ही उत्तरवाहिनी रहती थी, जिसके बाद जलधारा पूर्व तथा पश्चिम दिशा की ओर मुड़ जाती थी। हालांकि, बिहार सरकार द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत अब यहां पूरे बारह महीने उत्तरवाहिनी गंगा का अविरल प्रवाह बना रहेगा। इससे देश और विदेश से आने वाले कांवड़ियों को साल के किसी भी समय पवित्र जल प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

165 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट: घाटों का विकास और गाद की सफाई

सुल्तानगंज में गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को वर्ष भर उत्तर दिशा की ओर बनाए रखने के लिए 165 करोड़ रुपये की लागत वाली विस्तृत कार्ययोजना पर काम बेहद तीव्र गति से चल रहा है। इस पूरी परियोजना को दो मुख्य चरणों में विभाजित कर पूरा किया जा रहा है। पहले चरण के अंतर्गत सुल्तानगंज के सभी प्रमुख घाटों के चारों ओर आधुनिक और मजबूत सीढ़ियों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के भव्य रिवर फ्रंट के रूप में विकसित किया जा सके। इसके बाद दूसरे चरण में नदी के तटवर्ती और मध्य भागों में जमा हुई सिल्ट यानी गाद को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। गाद हटने से जलधारा के बहाव में आ रही रुकावटें दूर होंगी और नदी का प्राकृतिक मार्ग सुचारू हो जाएगा। निर्माण कार्य की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए उम्मीद है कि अगले वर्ष तक श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा पूरी तरह शुरू हो जाएगी।

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32 साल पुरानी प्राकृतिक स्थिति और अजगैबीनाथ मठ का स्वरूप

स्थानीय अजगैबीनाथ मठ का इतिहास इस उत्तरवाहिनी गंगा से गहराई से जुड़ा हुआ है। मठ के मठाधीश प्रेमानंद गिरि जी महाराज ने बताया, "लगभग 32 साल पहले सुल्तानगंज में गंगा हर समय उत्तर दिशा में बहती थी और मठ चारों तरफ से जल से घिरा रहता था।" उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन दशक पूर्व तक यहां का वातावरण अत्यंत विहंगम और अलौकिक दिखाई देता था। कालक्रम के अनुसार नदी की तली में धीरे-धीरे भारी मात्रा में मिट्टी और सिल्ट जमा होती चली गई, जिसके कारण गंगा का स्वाभाविक प्रवाह बदल गया। अब 165 करोड़ रुपये के इस नए जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट के संपन्न होने के बाद सुल्तानगंज में तीन दशक पुराना वही ऐतिहासिक और मनमोहक दृश्य एक बार फिर से जीवंत हो उठेगा।

पौराणिक मान्यता और केवल दो स्थानों पर उत्तरवाहिनी गंगा का योग

सनातन संस्कृति और पौराणिक मान्यताओं में उत्तर दिशा को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है, क्योंकि उत्तर में ही पवित्र कैलाश पर्वत स्थित है। यही कारण है कि महादेव को उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होने वाली गंगा का जल सर्वाधिक प्रिय माना गया है। संपूर्ण विश्व में केवल दो ही ऐसी पवित्र भूमियां हैं जहां गंगा नदी उत्तरवाहिनी होकर बहती हैं। इनमें पहला स्थान काशी विश्वनाथ यानी वाराणसी है और दूसरा स्थान भागलपुर का सुल्तानगंज है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने भी सुल्तानगंज की इसी उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया था। प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि और साधु-संत भी इसी स्थान से पवित्र जल उठाकर पैदल यात्रा करते हुए देवघर जाते रहे हैं। धार्मिक आस्था के अनुसार सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर देवघर की पैदल यात्रा करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सवाल-जवाब

सुल्तानगंज में गंगा को साल भर उत्तरवाहिनी बनाने के लिए कितने रुपये की परियोजना शुरू की गई है?
सुल्तानगंज में गंगा नदी के प्रवाह को 12 महीने उत्तर दिशा में बनाए रखने के लिए 165 करोड़ रुपये की लागत वाली योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।
सुल्तानगंज की इस परियोजना का काम कब तक पूरा होने की उम्मीद है?
जिस गति से निर्माण और गाद सफाई का कार्य चल रहा है, उसके अनुसार अगले वर्ष तक श्रद्धालुओं को साल भर उत्तरवाहिनी गंगा का जल उपलब्ध होने लगेगा।
वर्तमान में सुल्तानगंज में गंगा नदी किन महीनों में उत्तरवाहिनी बहती है?
फिलहाल सुल्तानगंज में गंगा नदी केवल सावन और भादो यानी दो महीनों के दौरान उत्तर दिशा की ओर बहती है, जिसके बाद इसका बहाव पूर्व और पश्चिम की ओर बदल जाता है।
दुनिया में उत्तरवाहिनी गंगा किन दो स्थानों पर बहती है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पूरे विश्व में केवल काशी विश्वनाथ (वाराणसी) और सुल्तानगंज (भागलपुर) में ही गंगा नदी उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होती है।
सुल्तानगंज से जल भरकर किस धार्मिक स्थल पर जलाभिषेक की परंपरा है?
श्रद्धालु सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल उठाकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं और जलाभिषेक करते हैं।
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