राजस्थान के भरतपुर शहर में स्थित ऐतिहासिक गोलमोल महादेव मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और गहरी आस्था के लिए पूरे क्षेत्र में विशेष स्थान रखता है। यह धार्मिक स्थल केवल पूजा-पाठ का केंद्र नहीं है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और पुरानी परंपराओं का एक जीवंत प्रतीक भी है। ऐसा माना जाता है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है, जिसके चलते इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है।
जसवंत मेले से जुड़ा पुराना इतिहास
भरतपुर में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध जसवंत प्रदर्शनी एवं राष्ट्रीय पशु मेले की शुरुआत हमेशा इस प्राचीन मंदिर के आशीर्वाद के साथ ही जुड़ी रही है। परंपरा के अनुसार, मेले का शुभारंभ होने से पहले प्रशासनिक अमला और मेले से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी सबसे पहले इसी मंदिर में हाजिरी लगाते हैं। मेला मजिस्ट्रेट और पशुपालन विभाग के अधिकारी विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति और मेले के निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना करते हैं।
व्यापारियों की अटूट श्रद्धा
मंदिर के पुजारी बाबा भूमानंद गिरी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मंदिर सदियों पुराना है और इसका इतिहास भरतपुर राज परिवार से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने इसका निर्माण कराया था। जब भी जसवंत मेला लगता है, तो देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले व्यापारी अपनी दुकानें सजाने से पहले मंदिर में माथा टेकते हैं। व्यवसाय में तरक्की और अच्छी बिक्री की कामना के साथ व्यापारी अपने व्यापारिक सफर की शुरुआत इसी देवालय से करते हैं ताकि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।



















