नौकरी बदलने या छोड़ने पर अटक गया है प्रोविडेंट फंड? जानिए ईपीएफओ में शिकायत का कानूनी तरीकाअमेरिकी सेना के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड खोजी कुत्ते तैयार करेगा नया रक्षा स्टार्टअपअमेरिकी नशीले पदार्थों की एजेंसी में डार्क वेब और क्रिप्टो अपराधों को बेनकाब करने वाली महिला जासूस की अनसुनी दास्तानसांवलिया सेठ के दरबार में दिल्ली के व्यापारी ने चढ़ाए चांदी के दो शोरूम, 3 किलो से ज्यादा है वजनतिब्बत में 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने ढहाए सैकड़ों मकान, 16 की मौत और 32 घायलदीपोत्सव पर झुंझुनूं की अनूठी मिठास, चाशनी और कारीगरी से सजती है बिसाऊ की सेंठोलीउत्तर प्रदेश पुलिस ने पुलिस स्मृति दिवस-2026 पर जारी की विशेष शॉर्ट फिल्म ‘वर्दी’, शहीद सुनील कुमार को समर्पित है प्रोजेक्टबोर्ड परीक्षा की तैयारी के आसान टिप्स, इन तरीकों को अपनाकर पा सकते हैं शानदार अंककच्चे तेल में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव के बीच चांदी में भारी गिरावट, 54 डॉलर के नए निचले स्तर पर फिसली कीमतेंभारत से कश्मीर और सिंधु जल विवाद जल्द सुलझाएं, पाकिस्तानी जनरल जुबैर महमूद हयात ने शहबाज शरीफ और आसिफ मुनीर को चेताया
उत्तराखंड के इस ऐतिहासिक मंदिर में गोपी रूप में पूजे जाते हैं भगवान शिव, परिसर में गड़ा है प्राचीन त्रिशूलधर्म
23 अग॰ 2026, 8:59 am (61 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड के इस ऐतिहासिक मंदिर में गोपी रूप में पूजे जाते हैं भगवान शिव, परिसर में गड़ा है प्राचीन त्रिशूल

चमोली जिले के गोपेश्वर में स्थित प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जहां वे गोपी रूप में पूजे जाते हैं। कत्यूरी राजवंश द्वारा निर्मित इस मंदिर में एक विशाल अष्टधातु का त्रिशूल भी स्थापित है।

उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की शांत और खूबसूरत वादियों में स्थित चमोली जिला अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है। इसी जिले के मुख्यालय गोपेश्वर में स्थापित श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध स्थल है। गोपेश्वर के मुख्य इलाके में बसा यह पावन मंदिर केवल गहरी आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह कत्यूरी राजवंश की भव्य वास्तुकला और नागर शैली का एक बेहतरीन नमूना भी माना जाता है। यह मंदिर अपनी अनूठी बनावट, चौबीस द्वारों वाले गर्भगृह और इसके प्रांगण में खड़े प्राचीन अष्टधातु के त्रिशूल के कारण देश और दुनिया भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

प्रकृति की गोद में बसा महादेव का पवित्र धाम

चमोली जिले के गोपेश्वर में मौजूद प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर, देवों के देव महादेव की अटूट और गहरी भक्ति का एक अनूठा प्रतीक है। प्रकृति की गोद में शांति से बसे इस पवित्र धाम में भगवान शिव के दर्शन करने मात्र से ही श्रद्धालुओं के मन को असीम शांति और एक गहरा आध्यात्मिक सुकून मिलता है। विशेषकर सावन के पवित्र महीने के दौरान देश और विदेश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं और अपनी झोली फैलाकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

ये भी पढ़ें

गोपी रूप में होती है महादेव की अनोखी पूजा

उत्तराखंड के चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर में स्थित यह ऐतिहासिक श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव का एक बेहद पवित्र धाम है। हालांकि इसका नाम गोपीनाथ है, जो आमतौर पर भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ माना जाता है, लेकिन यहां भगवान शिव की पूजा बहुत ही अनूठे तरीके से गोपी रूप में की जाती है। इसके अलावा, इस स्थान को चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल भी माना जाता है, जहां सर्दियों के दिनों में उनकी विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिर के विशाल आंगन में अष्टधातु से बना एक भारी भरकम त्रिशूल गड़ा हुआ है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह हजारों साल पुराना है।

पौराणिक कथाएं और भगवान शिव का गोपी स्वरूप

इस पावन मंदिर से कई दिलचस्प पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान शिव ने इसी स्थान पर गोपी का रूप धारण किया था, जिसकी वजह से इस जगह का नाम गोपेश्वर और मंदिर का नाम गोपीनाथ पड़ गया। जब भगवान कृष्ण वृंदावन में महारास रचा रहे थे और अपनी बांसुरी की धुन बिखेर रहे थे, तब उस मोहक संगीत को सुनकर भगवान शिव वहां पहुंच गए थे। शिवजी ने भी उस रास लीला में शामिल होने की तीव्र इच्छा जताई थी, जिसके बाद उन्हें गोपियों का रूप धारण करना पड़ा था। तभी से इस स्थल पर भगवान शिव के गोपी रूप की मान्यता स्थापित हो गई। इसके अलावा, एक अन्य मान्यता यह भी कहती है कि जब भगवान शिव यहां गहन तपस्या में लीन थे और कामदेव ने उनकी साधना भंग करने की कोशिश की थी, तब शिवजी ने अपना त्रिशूल उन पर चला दिया था। वही त्रिशूल आज इस मंदिर परिसर में स्थापित है।

वास्तुकला की भव्यता और भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन प्रवास

कत्यूरी राजवंश द्वारा आठवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के बीच बनवाया गया यह मंदिर अपनी विशेष निर्माण शैली के लिए जाना जाता है। इस ऐतिहासिक मंदिर का गर्भगृह लगभग तीस वर्ग फुट के दायरे में फैला हुआ है और इसके भीतर पहुंचने के लिए कुल चौबीस द्वार बनाए गए हैं। सर्दियों के मौसम में जब अत्यधिक बर्फबारी के कारण भगवान रुद्रनाथ के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली और उनके प्रतीकात्मक विग्रह को इसी श्री गोपीनाथ मंदिर में ससम्मान लाया जाता है। यहीं पर जाड़े के पूरे महीनों में उनकी विधिवत और नियमित पूजा संपन्न होती है।

सवाल-जवाब

श्री गोपीनाथ मंदिर कहां स्थित है?
श्री गोपीनाथ मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर में स्थित है।
इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा किस रूप में की जाती है?
इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा गोपी रूप में की जाती है।
गोपीनाथ मंदिर को किसका शीतकालीन गद्दी स्थल माना जाता है?
इसे चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल माना जाता है।
मंदिर परिसर में कौन सी प्रमुख प्राचीन वस्तु स्थित है?
मंदिर के आंगन में अष्टधातु का एक विशाल और प्राचीन त्रिशूल गड़ा हुआ है।
श्री गोपीनाथ मंदिर का निर्माण किस राजवंश ने कराया था?
इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी राजवंश द्वारा आठवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के बीच कराया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp