भीलवाड़ा में एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहाँ की परंपरा और आस्था का रूप बेहद अनूठा और खास माना जाता है। यहाँ के प्रसिद्ध बालाजी मार्केट क्षेत्र में स्थित पेच एरिया हनुमान मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर भक्ति भाव का एक अद्भुत और भव्य नजारा देखने को मिला। इस धार्मिक स्थल पर भगवान भोलेनाथ का कुल 21 हजार लीटर पवित्र गंगाजल के जरिए सहस्त्रधारा महाअभिषेक पूरी विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। इस पूरे अनुष्ठान के दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के गूंजते जयकारों से पूरी तरह सराबोर नजर आया।
हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर से मंगाया गया था गंगाजल
मंदिर के मुख्य पुजारी आशुतोष शर्मा ने इस परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया कि हर साल सावन के पवित्र महीने में इस भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करने की पुरानी परंपरा चली आ रही है। इस विशेष महाअभिषेक को पूर्ण करने के उद्देश्य से हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के गढ़मुक्तेश्वर से बड़े-बड़े कंटेनरों की सहायता से कुल 21 हजार लीटर शुद्ध गंगाजल भीलवाड़ा तक पहुँचाया गया था। जैसे ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान के साथ गंगाजल की सहस्त्रधाराएं भगवान शिव के ऊपर अर्पित की जाने लगीं, वहाँ मौजूद सभी श्रद्धालुओं का उत्साह चरम सीमा पर पहुँच गया और पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
महाआरती और फूलों से हुआ भव्य श्रृंगार
इस महाअभिषेक के मुख्य कार्यक्रम के शुरू होने से पहले मंदिर में विराजमान श्री हनुमान जी और भगवान शिव की बहुत ही भव्य महाआरती उतारी गई। इस विशेष अवसर पर ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक बैंड-बाजे की मधुर धुनों पर भक्त जन आनंद से झूमते हुए नजर आए। मंदिर के पूरे परिसर को देश-विदेश से मंगाए गए भांति-भांति के सुगंधित फूलों और रंग-बिरंगी आकर्षक रोशनी से बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था। सुबह तड़के से ही इस अलौकिक दर्शन को पाने और महाअभिषेक का पुण्य लाभ हासिल करने के लिए भीलवाड़ा शहर के साथ-साथ आसपास के तमाम इलाकों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुँचना शुरू हो गए थे।
प्रसाद के रूप में बांटा गया पवित्र गंगाजल
भगवान शिव का यह महाअभिषेक सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद मंदिर समिति की तरफ से वहाँ मौजूद सभी श्रद्धालुओं के बीच उस पवित्र गंगाजल को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। उपस्थित भक्तों ने बहुत ही श्रद्धा और भाव के साथ इस प्रसाद रूपी गंगाजल को ग्रहण किया और अपने-अपने घरों के लिए साथ लेकर गए। बरसों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा के दर्शन करने और इसमें अपनी सहभागिता निभाने के लिए भीलवाड़ा के इस पावन मंदिर में पूरे दिन भर आस्था का भारी सैलाब उमड़ता रहा।



















